2. पर्यावरण प्रदूषण का कुप्रभाव - जनसंख्या की अप्रत्याशित वृद्धि होने, औद्योगीकरण एवं शहरीकरण के कारण हरे - भरे खेतों - वनों को उजाड़ देने, भूमिगत जलवायु को प्रदूषित करने तथा प्राकृतिक संसाधनों का अतिशय दोहन होने से पर्यावरण में निरन्तर प्रदूषण बढ़ रहा है।
इससे मानव के साथ ही वन्य - जीवों के स्वास्थ्य है, जैविक विकास की क्रिया बाधित हो रही है, आनुवंशिक दुष्प्रभाव पड़ रहा है तथा बाढ़ व भू - स्खलन आदि की वृद्धि भी हो रही है। राजस्थान में इसी कारण रेगिस्तान बढ़ रहा है। पर्यावरण प्रदूषण का सबसे अधिक कुप्रभाव मानव सभ्यता पर पड़ रहा है जो कि आगे चलकर इसके विनाश का कारण हो सकता हैं। धरती के तापमान की वृद्धि तथा असमय ऋतु - परिवर्तन होने से प्राकृतिक वातावरण नष्ट होता जा रहा है।
3. प्रदूषण - निवारण के उपाय - विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रदूषण रोकने के अनेक उपाय कर रहा है। भारत सरकार द्वारा प्रदूषण - निवारण के लिए ये प्रयास किये जा रहे हैं -
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