पूँजी संरचना का अर्थ-पूँजी संरचना से आशय स्वामिगत तथा ग्रहीत निधि के मिश्रण से है। स्वामिगत निधि में समता अंश, पूर्वाधिकार अंश तथा संचय एवं आधिक्य अथवा प्रतिधारित उपार्जन सम्मिलित होते हैं। ग्रहीत निधि में ऋण, ऋण-पत्र, सार्वजनिक जमा आदि सम्मिलित होते हैं। इनको बैंक, अन्य वित्तीय संस्थाओं, ऋणपत्रधारियों एवं जनता से उधार लिया जा सकता है।
व्यवसाय की पूँजी संरचना लाभदायकता तथा वित्तीय जोखिम दोनों को प्रभावित करती है। पूँजी संरचना सर्वोत्तम तब कहलाती है जबकि ऋण तथा समता का अनुपात ऐसा हो जिसके कारण समता अंशों के मूल्य में वृद्धि होती हो। अन्य शब्दों में, पूँजी संरचना से सम्बन्धित सभी निर्णय ऐसे हों जिससे अंशधारियों की पूँजी में वृद्धि हो।