Question
राजा ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ बनवाने के लिए अपने को दोष दे रहा था।

Answer

स्वप्रयत्न

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कला पर ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ टूट पड़ी है।(कंठहार, मदांधता, शिल्पियों, महाविपत्ति, संहारक, उजाला, संजीवनी)
कुछ गोष्ठियों के ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ - पत्र।(बतियाती, गहराती, निमंत्रण, व्यक्तित्व, मोबाइल)
कविताएँ थीं तो मामूली, लेकिन उनमें मेरी अपनी ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ थी।
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बहाव इतना तेज कि ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ भी बह जाए।
बरसाँ री ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ सावन री, सावण री मणभावण री।
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उनकी असली इच्छा उस गलत में अपने हिस्से के ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ की है।