Gujarat Boardहिन्दी माध्यमकक्षा 7विज्ञानरेशों से वस्त्र तक5 Marks
Question
रेशम कीट पालन पर एक टिप्पणी लिखिए।
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Answer
रेशम कीट पालन: रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम कीटों को पाला जाता है और उनके कोकूनों को एकत्रित करके रेशम के फाइबर प्राप्त किए जाते हैं। एक मादा रेशम कीट एक बार में सैकड़ों अंडे देती है। अंडों को सावधानी से कपड़े की पट्टियों अथवा कागज पर संग्रहित करके रेशम कीट पालकों को बेचा जाता है। ये पालक/किसान अंडों को स्वास्थ्यकर स्थितियों, उचित ताप एवं आर्द्रता की अनुकूल परिस्थितियों में रखते हैं। अंडों को उपयुक्त ताप तक गर्म रखा जाता है, जिससे अंडों में से लार्वा निकल आए।
यह तब किया जाता है जब शहतूत के वृक्षों पर नई पत्तियाँ आती हैं। लार्वा, जो कैटरपिलर अथवा रेशम कीट कहलाते हैं, दिन - रात खाते रहते हैं और आमाप (साइज) में काफी बड़े हो जाते हैं। कीटों को शहतूत की ताजी कटी पत्तियों के साथ बाँस की स्वच्छ ट्रे में रखा जाता है। 25 से 30 दिनों के बाद कैटरपिलर खाना बंद कर देते हैं और कोकून बनाने के लिए वे बाँस के बने छोटे - छोटे कक्षों में चले जाते हैं। (इसके लिए ट्रे में छोटी रैक या टहनियाँ रख दी जाती हैं, जिनसे कोकून जुड़ जाते हैं।) कैटरपिलर अथवा रेशम कीट कोकून बनाते हैं, जिसके भीतर प्यूपा विकसित होता है।
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