धर्म के नाम पर परस्पर लड़ने वाले यह नहीं सोचते कि वास्तव में सभी धर्म एक ही सत्य पर आधारित है |हिंदू बौद्ध ,इस्लाम ,ईसाई, आदि सारे धर्म सहिष्णुता की सीख देते हैं | अहिंसा परमो धर्म की भावना सभी धर्मों से मिलती है |बाइबिल में ईशा की सूची love the neighbour as thyself -और गीता में श्रीकृष्ण स: पंडित: एक ही सत्य को प्रतिबिंबित करते हैं|
कोई भी मजहब अपने अनुयाई को लड़ना नहीं सिखाता | फिर भी मजहबी हिंसा से इतिहास भरा पड़ा है |मजहबी लड़ाई ओके पीछे धर्मों के कट्टर नेताओं और राजनीति दोनों के स्वार्थ छिपे रहते हैं |
आज सांप्रदायिकता को करारा जवाब स्वाध्याय प्रवेश प्रणेता पांडुरंग शास्त्री ने “दूसरा .”दूसरा नहीं है ,”वह मेरा देवी भाई है “कि बल पर दिया है| तेरी मेरी क्या है सगाई ?हम दोनों हैं भाई भाई |चर्च एवं मस्जिद में भी स्वाध्याय कार्य चल रहा है |
मजहब के नाम पर लड़ते रहने के कारण ही वसुधैव कुटुंबकम का आदर्श साकार नहीं हो पा रहा है |धर्म पर आधारित शत्रुता युद्ध या उपद्रव का रूप ले लेती है | विश्व इतिहास के कुछ धर्मयुद्ध के रक्त से छूटे हुए हैं | भारत का विभाजन भी तो धर्म के आधार पर ही हुआ है |दुख की बात है कि लोग धर्म के मर्म को नहीं जान पाते |वे अपने धर्म को दूसरे धर्म से अलग मानते हैं |जबकि सभी धर्म हमें ईश्वर सत्य और मानवता की और ले जाते हैं |और भाईचारे की प्रेरणा देते हैं |आज की दुनिया में धार्मिक कटुता को सर्वधर्म समभाव में बदलने की जरूरत है |
दरअसल दुनिया के सारे मजहब अच्छे है | वे हमें पशुता से ऊपर उठने और प्राणीमात्र की सेवा करने की शिक्षा देते है | सभी धर्मो में पारस्पर प्रेम से रहने का उपदेश दिया है | सेवा और सहयोग के मह्र्त्व का सब धर्मो ने स्वीकार किया है | सभी धर्म हिंसा की निंदा करते है और अहिंसा में विश्वास रखते है | कोई भी धर्म आपस में बैर रखना और मारना काटना नहीं सीखता | बुद्ध, महाविर ,नानक , मुहम्मद और ईसा आदि सभी धर्मगुरूओ और धर्मप्रवर्तक ने हमें मिल झूलकर रहने का उपदेश दिया है | इसके बावजूद भी इतिहास में धर्म के नाम पर अनेक युद्ध हुए है | यूरोप के धर्मयुध्हो से कौन परिचित नही है | वास्तव में धर्म के तत्वों को ठीक से न समझने और स्वार्थी लोगो के बहकावे में आ जाने से ही दो भिन्न सम्प्रदायों के लोग मार काट पर उतर आते है इसमें दोष मजहब का नहीं , मजहबी नेताओ का है | उर्दू शायर इकबाल ने कहा था –
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना |
हिन्दी है हम ,हमवतन है, यह गुलिस्ता हमारा ||
सचमुच कोई भी मजहब या संप्रदाय मानव मानव को लड़ने की बात नहीं करता |सभी संप्रदाय आपसी भाईचारे ,प्रेम और शांति की बात कहते है | फिर भी जितने अंधे ,क्रूर और जंगली बनकर दो भिन्न सम्प्रदायों के लोग लड़ते है ,उतने क्रूर और जंगली तो धन सम्पति के झगड़ो में भी लोग नहीं लड़ते | कारण ?
जब कोई संप्रदाय या मत स्वयं को सर्वश्रेष्ठ और एनी को संप्रदाय को निम्न मानने लगता है, तब उसके मन में अंधे अहंकार की एक बू उठती है | उस बू के कारण वह भिन्न सम्प्रदायों को निचा दिखाने का प्रयत्न करता है | दूसरी तरफ भी कम अंधे लोग नहीं होते | परिणाम स्वरूप संप्रदाय के अंधे लोग अन्य धर्मान्धो से भीड़ पड़ते है | और सारा जन जीवन लहू लुहान कर देते है | वास्तव में सांप्रदायिकता की लड़ाई नहीं होती , बल्कि यह सांप्रदायिक अंधेपन की लड़ाई होती है | इन्ही अन्धो को फटकारते हुए महात्मा कबीर ने कहा है –
हिन्दू कहत राम हमारा ,मुसलमान रहमाना |
आपस में दोउ लरे मरतु है, मरम कोई नहीं जाना ||
साम्प्रदायिकता विश्व भरमे व्याप्त बुराई है | इंग्लेंड में रोमन केथोलिक और प्रोटेस्टेन्ट , मुस्लोम देशो में शिया और सुन्नी, भारत में बुध्ह – वैष्णव ,शैव –बौध्ह ,सनातनी आर्यसमाजी ,हिन्दू सिख झगड़े उमरते रहे है | इन झगड़ो के कारण नरसंहार होता है, धन सम्पति की हानि होती है, उसे देखकर रोगटे खड़े हो जाते है | भारत में सांप्रदायिकता की शुरुआत मुसलमानों के भारत में आने से हुई | शासन और शक्ति के मद में अंधे आक्रमणकारियों ने धर्म को आधार बनाकर हिन्दू जन जीवन को रोंद डाला | हिन्दूओ के धार्मिक तीर्थो को तोडा ,देवी देवताओ को अपमानित किया, बहु बेटीयो को अपवित्र किया, जान मालका हरण किया परिणाम स्वरूप हिन्दू जाति के मन में उन पाप कर्मो के प्रति हिन्दू धृणा भर गई ,जो आज तक भी जीवित है | बात बात पर हिन्दू मुस्लिम संघर्ष का भड़क उठना उसी धृणा का सूचक है |
सांप्रदायिकता को भड़काने में अंग्रेज शासको का गहरा षड्यंत्र था | वे हिन्दू मुलिम झगडे फैलाकर शासक बने रहना चाहते थे | उन्होंने सफलतापूर्वक दोनों को लड़ाया | आजादी से पहले अनेक खुनी संघर्ष हुए | आजादी के बाद तो विभाजन का जो संघर्ष हुआ ,भीषण नर संहार हुआ , उसे देखकर समूची मानवता रो पड़ी | शहर के शहर गाजर मुली की तरह कान्त डाले गए | अरबो रुपयों की संपती स्वाहा कर दी गई | अयोध्या के रामजन्मभूमि विवाद ने देश में फिर से सांप्रदायिक आग भड़का दी है | बाबरी मस्जिद का ढहाया जाना और उसके बदले सेंकडो मंदिरों का ढहाया जाना ताज़ी घटनाए है | न जाने यह समस्या कब तक भारतवर्ष के माथे का कलंक बनी रहेगी |
सांप्रदायिकता की समस्या कठिन अवश्य है ,परन्तु असंभव नहीं | सांप्रदायिकता का अंधापन अज्ञान और अविवेक से उत्पन होता है | इसीलिए शिक्षा का प्रसार सर्वोत्तम उपाय है | शिक्षित व्यक्ति धार्मिक नेताओ के बहकावे में कम आता है |