साम्यावस्था स्थिरांक के महत्वपूर्ण लक्षण निम्न हैं- (i) साम्यावस्था स्थिरांक का व्यंजक तभी उपयोगी होगा, जब अभिकारकों तथा उत्पादों की सांद्रता, साम्यावस्था पर स्थिर हो जाए। (ii) साम्यावस्था-स्थिरांक का मान अभिकारकों एवं उत्पादों की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता है। (iii) प्रतीप अभिक्रिया का साम्यावस्था-स्थिरांक अग्र अभिक्रिया के साम्यावस्था-स्थिरांक का व्युत्क्रम होता है। (iv) किसी अभिक्रिया का साम्यावस्था-स्थिरांक (K) उस संगत अभिक्रिया के साम्यावस्था स्थिरांक से संबंधित होता है जिसका समीकरण मूल अभिक्रिया के समीकरण में किसी छोटे पूर्णांक से गुणा या भाग देने पर प्राप्त होता है। (v) साम्य स्थिरांक का मान एक संतुलित समीकरण द्वारा व्यक्त किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए निश्चित होता है अर्थात् यह अभिक्रिया की रससमीकरणमिति तथा अभिकारकों व उत्पादों की प्रकृति पर निर्भर करता है। (vi) किसी अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक का मान निश्चित ताप पर स्थिर होता है अर्थात् यह ताप पर निर्भर करता है।
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