मालवजी शिवाजी का वध करना चाहता था। वध की इच्छा का कारण जानकर शिवाजी उसके प्रति क्षमाशील हो गए थे।
उनके हृदय में मालवजी के प्रति प्रेम उमड़ रहा था। जब तक वह अपनी माँ के दर्शन कर नहीं लौटा, तब तक वे उसी बालक के बारे में सोचते रहे।
जिस शिवाजी के नाम से मुगलसेना कॉँपती थी, उसके सामने मालवजी वीरता, निंडरता और साहस से पेश आया। इस तरह शिवाजी मालवजी से बहुत प्रभावित हुए।