प्रत्येक सिक्के के दो पहलू होते हैं। इसी प्रकार जीवन के दो पक्ष हैं – श्रद्धा और विज्ञान। हम बाल्यकाल से अपने बड़े-बुजुर्गों से जो कुछ सीखते हैं; उसके प्रति हमारे मन में श्रद्धा होती है। हमारी संस्कृति प्राचीन है। प्राचीन काल से कुछ मान्यताएँ, रीति-रिवाज, परंपराएँ चली आ रही हैं। अशिक्षा के कारण इसमें कुछ कुरीतियाँ भी समाविष्ट हो गई हैं।
आधुनिक समय विज्ञान का युग है। ऐसे में बहुत सारी परंपराएँ, मान्यताएँ एवं रीति-रिवाज आज अपना मूल्य खोती जा रही हैं। अत: जीवन में भक्ति, ज्ञान, श्रद्धा का महत्त्व तो है; लेकिन वह विज्ञान सम्मत ही होनी चाहिए।आज हमें अंधश्रद्धा का निर्मूलन कर सही ज्ञान की आवश्यकता है जो कि विज्ञान की कसौटियों पर खरा उतर सके।