Question
स्थायी व्यतिकरण की आवश्यक शर्तें लिखें।

Answer

(i) दोनों तरंगों की आवृत्ति समान होनी चाहिए।
(ii) तरंगों में कलान्तर समय पर निर्भर नहीं होना चाहिए अर्थात् तरंगें कला सम्बद्ध होनी चाहिए।
(iii) दोनों तरंगें एक ही दिशा में एक ही सरल रेखा पर संचरित होती हुई अध्यारोपित होनी चाहिए।
(iv) स्पष्ट व्यतिकरण के लिए दोनों तरंगों का आयाम समान होना चाहिए यद्यपि यह आवश्यक प्रतिबन्ध नहीं है।

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आइए निम्नलिखित समीकरण पर विचार करें
$\frac{1}{2}$ mv$^2$= mgh
यहाँ m वस्तु का द्रव्यमान, v इसका वेग है, g गुरुत्वीय त्वरण और h ऊँचाई है। जाँचिए कि क्या यह समीकरण विमीय दृष्टि से सही है।
नीचे तरंग गति के कुछ उदाहरण दिए गए हैं, प्रत्येक स्थिति में यह बताइए कि क्या तरंग गति अनुप्रस्थ है, तरंगदैर्ध्य है अथवा दोनों का संयोजन है:
  1. किसी लंबी कुंडलित कमानी के एक सिरे को एक ओर विस्थापित करने पर उस कमानी की किसी विभंग (ऐंठन) की गति।
  2. द्रव से भरे किसी सिलिंडर में इसके पिस्टन को आगे-पीछे करके सिलिडर में उत्पन्न तरंगें।
  3. जल के पृष्ठ पर चलती मोटरबोट द्वारा उत्पन्न तरंगें।
  4. किसी कंपायमान क्वार्ट्ज़्र क्रिस्टल द्वारा वायु में उत्पन्न पराश्रव्य तरंगें।
जल का घनत्व $1000 kg m ^{-3}$ है। $100^{\circ} C$ और 1 atm दाब पर जलवाष्प का घनत्व $0.6 kg m ^{-3}$ हैं। एक अणु के आयतन को कुल अणुओं की संख्या से गुणा करने पर हमें आण्विक आयतन प्राप्त होता है। ताप और दाब की उपरोक्त अवस्था में जलवाष्प के कुल आयतन और इसके आण्विक आयतन का अनुपात ज्ञात कीजिए।
किसी राकेट का बाह्य आवरण उड़ान के दौरान घर्षण के कारण जल जाता है। जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा किसके व्यय पर प्राप्त की गई-राकेट या वातावरण?
सही विकल्प का चयन कीजिए:
  1. यदि स्थितिज ऊर्जा का शून्य अनन्त पर है, तो कक्षा में परिक्रमा करते किसी उपग्रह की कुल ऊर्जा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक है।
  2. कक्षा में परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा समान ऊंचाई (जितनी उपग्रह की है) के किसी स्थिर पिण्ड को पृथ्वी के प्रभाव से बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा से अधिक/कम होती है।
प्रतिरोध R = $\frac V I$, जहाँ V = (100 $\pm$ 5) V एवं I = (10 $\pm$ 0.2) A है। R में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए।
दिया है $\vec a + \vec b + \vec c + \vec d$ = 0, नीचे दिए गए कथनों में से कौन-सा सही है:
  1. $\vec a + \vec b + \vec c$ तथा $\vec d$ में से प्रत्येक शून्य सदिश है,
  2. $(\vec a + \vec c)$ का परिमाण $(\vec b + \vec d)$ के परिमाण के बराबर है
  3. a का परिमाण b, c तथा d के परिमाणों के योग से कभी भी अधिक नहीं हो सकता,
  4. यदि $\vec a$ तथा $\vec d$ संरेखीय नहीं हैं तो $\vec b + \vec c$ अवश्य ही $\vec a$ तथा $\vec d$ के समतल में होगा, और यह $\vec a$ तथा $\vec d$ के अनुदिश होगा यदि वे संरेखीय हैं।
मूल सिद्धांत के आधार पर समीकरण $\omega = \omega_0 + \alpha t$ व्युत्पन्न कीजिए।
किसी डोरी के अनुदिश गमन करती तरंग का विवरण निम्न प्रकार दिया गया है,

y(x, t) = 0.005 sin (80.0 x - 3.0 t)

यहाँ आंकिक स्थिरांक SI मात्रकों में हैं (0.005 , 80.0 rad/m तथा 3.0 rad/s)। तरंग का

  1. आयाम
  2. तरंगदैर्ध्य
  3. आवर्तकाल एवं
  4. आवृत्ति परिकलित कीजिए।

तथा दूरी x = 30.0 cm तथा समय t = 20 s पर तरंग का विस्थापन y भी परिकलित कीजिए।

नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन (लगभग) सरल आवर्त गति को तथा कौन आवर्ती परंतु सरल आवर्त गति नहीं निरूपित करते हैं?
  1. पृथ्वी की अपने अक्ष के परितः घूर्णन गति।
  2. किसी U-नली में दोलायमान पारे के स्तंभ की गति।
  3. किसी चिकने वक्रीय कटोरे के भीतर एक बॉल बेयरिंग की गति जब उसे निम्नतम बिंदु से कुछ ऊपर के बिंदु से मुक्त रूप से छोड़ा जाए।
  4. किसी बहुपरमाणुक अणु की अपनी साम्यावस्था की स्थिति के परितः व्यापक कंपन।