साहित्यिक परिचय - भाव पक्ष - निराला छायावादी कवि होने के साथ-साथ प्रगतिवादी कवि भी हैं क्योंकि उनकी कविता में शोषण का विरोध और शोषकों के प्रति घृणा की अभिव्यक्ति हुई है। वे क्रान्तिदर्शी कवि हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति का चित्रण भी अपनी रचनाओं में किया है।
कला पक्ष - निराला छायावाद तथा स्वच्छन्दतावादी कविता के आधार स्तम्भ थे। उनका काव्य जगत बहुत व्यापक है। उनके काव्य में विचारों की व्यापकता, विविधता और गहराई मिलती है। उन्होंने छन्द मुक्त तथा छन्दबद्ध कवितायें लिखी हैं। प्राचीन तथा मानवीकरण, विशेषण विपर्यय आदि अंग्रेजी काव्य के अलंकार उनकी कविता की शोभा बढ़ाते हैं। बोलचाल की भाषा तथा संस्कृतनिष्ठ शब्दावली युक्त भाषा - उनकी भाषा के ये दो रूप हैं। उन्होंने हिन्दी में गजलें भी लिखी हैं।
कृतियाँ - प्रमुख काव्य कृतियाँ - परिमल, गीतिका, अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, नए पत्ते। उपन्यास-बिल्लेसुर बकरिहा, अप्सरा, अलका, प्रभावती। कहानियाँ सुकुल की बीबी, लिली।