Question
सूत्री विभाजन के कोई चार महत्त्व लिखिए।

Answer

सूत्री विभाजन के महत्त्व (Significance of Mitosis Division)-
1. एककोशिकीय जीवों में जनन काल की एकमात्र विधि है।
2. इस प्रक्रिया द्वारा जन्तुओं एवं पौधों दोनों में निरन्तर अधिकाधिक कोशिकाओं के बढ़ते रहने के कारण वृद्धि होती है।
3. वृद्धि द्वारा यह ऊतकों की मरम्मत में योगदान है। उदाहरण के लिए घाव के भरने में क्षतिग्रस्त भागों के पुनरुद्भवन में जैसे छिपकली की पूँछ आदि।
4. अधिचर्म की ऊपरी सतह की कोशिकाएँ, आहारनाल की भीतरी सतह की कोशिकाएँ एवं रक्त कोशिकाएँ निरन्तर प्रतिस्थापित होती रहती हैं।
5. युग्मक जनन (Gametogenesis) की गुणन प्रावस्था (multiplication phase) में भी समसूत्री विभाजन पाया जाता है।

Need a full question paper?

Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.

Start Generating Free

Similar questions

अगर आपको ऐसा करने को कहा जाए तो एक पादप वृद्धि नियामक का नाम दें-
  1. किसी टहनी में जड़ पैदा करने हेतु
  2. फलों को जल्दी पकाने हेतु
  3. पत्तियों की जरावस्था को रोकने हेतु
  4. कक्षस्थ कलिकाओं में वृद्धि कराने हेतु
  5. एक रोजेट पौधे में ‘बोल्ट’ हेतु
  6. पत्तियों में रन्ध्र को तुरंत बंद करने हेतु
प्रोकैरियोटिक कोशिका में क्या मीसोसोम होता है? इसके कार्य का वर्णन करो।
शैवालांश तथा कवकांश शब्दों से क्या पता लगता है?
श्वसन को परिभाषित कीजिए। श्वसन में कौन-कौनसे चरण सम्मिलित हैं?
शिरा अलिंद पर्व (कोटरालिंद गांठ SAN) को हृदय का गति प्रेरक (पेस मेकर) क्यों कहा जाता है?
निम्नलिखित का नामांकित चित्र बनाइए -
मस्तिष्क
परासरण नियमन का अर्थ बताइए।
क्या आप व्यापारिक दृष्टि से उपलब्ध परमाणु मॉडल (बल व स्टिक नमूना) का प्रयोग करते हुए जैव अणुओं के उन प्रारूपों को बना सकते हैं?
कर्ण अस्थिकाएं पर टिप्पणी लिखिए।
निम्नलिखित कथनों के लिए दिए गए शब्दों में से सम्बन्धित शब्द लिखिए-
(i) पूर्वावस्था (Prophase), (ii) मेटाफेज (Metaphase), (iii) पश्चावस्था (Anaphase), (iv) अन्त्यावस्था (Telophase) ।
(अ) केन्द्रक झिल्ली पुनः प्रकट होती है।
(ब) गुणसूत्र सर्वाधिक मोटे तथा छोटे होते हैं।
(स) गुणसूत्र कुण्डलित होना प्रारम्भ हो जाते हैं।
(द) गुणसूत्र बिन्दु/सेन्ट्रोमीयर दो में विभाजित हो जाते हैं।
(य) साइटोकाइनेसिस की पूर्ववर्ती अवस्था।
(र) प्रत्येक गुणसूत्र, दो क्रोमेटिड्स/अर्द्धगुणसूत्रों से बने होते हैं।