शैली का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे उत्सवों, त्योहारों और दैनिक जीवन के अनुभवों का प्रतिनिधित्व करते हैं, साथ ही स्थानीय रीति-रिवाजों, परम्पराओं और विश्वासों को भी दर्शाते हैं जैसे खेती के काम में पति-पत्नी मिलजुल कर हाथ बंटाते हैं। दोनों की बातचीत में खेतीबाड़ी के प्रसंग भी आते रहते हैं और गीत बन जाते हैं-
मत बाओ म्हारा परण्या जीरो,
यो जीरो जीव रो बेरी रे,
मत बाओ म्हारा परण्या जीरो।