Question
उपनयन संस्कार का वर्णन करें।

Answer

शिक्षा संस्कारों में उपनयन संस्कार का विशेष महत्व है। जब बालक शिक्षा ग्रहण करने योग्य हो जाता था तो अभिभावकों (माता-पिता) के द्वारा उसे गुरुकुल में भेज दिया जाता था। उपनयन संस्कार के अन्तर्गत गुरु बालक का हाथ पकड़कर अपने घर (आश्रम) में ले जाता था तथा अब वह उसका मानस-पिता की भूमिका निभाता था। छात्र भी मानस-पुत्र बन गुरु-गृह में रहकर विद्याध्ययन करना प्रारम्भ करता था। जीवन की इस अवस्था में ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना भी अनिवार्य था। अतएव उसे ब्रह्मचारी भी कहा जाता था। शिक्षा नियमपूर्वक प्रदान की जाती थी।

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