Question
वाणी कब विष के समान हो जाती है?

Answer

कवि गुरुनानक का कहना है कि सच्चे हृदय से राम-नाम कीर्तन की सच्ची स्थायी शान्ति देकर व्यक्ति को इस दुखमय जीवन के पार पहुँचा पाता है। जो व्यक्ति राम-नाम का कीर्त्तन नहीं करता, जो सिर्फ सांसारिक मोह माया में लगा रहता है, उसकी वाणी विष के समान हो जाती है।

Need a full question paper?

Generate a complete, print-ready paper with questions like this in minutes — across 16+ boards, with answer keys.

Start Generating Free

Similar questions

कवि किसके बिना जगत् में जन्म व्यर्थ मानता है?
बहादुर के नाम से “दिल” शब्द क्यों उड़ा दिया गया ? विचार करें।
इस कविता में एक रूपक की रचना हुई है। रूपक क्या है ? और ‘यहाँ उसका क्या स्वरूप है ? स्पष्ट कीजिए।
बहुजातीय राष्ट्र की हैसियत से कोई भी देश भारत का मुकाबला क्यों नहीं कर सकता ?
कवि वीरेन डंगवाल किन अत्याचारियों का और क्यों जिक्र करता है?
लेखक आविन्यों क्या साथ लेकर गए थे और वहाँ कितने दिनों तक रहे ? लेखक की उपलब्धि क्या रही?
कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
बिरजू महाराज कौन-कौन से वाद्य बजाते थे ?
बिस्मिला खाँ के बचपन का वर्णन पाठ के आधार पर दें ।
‘प्रतीक्षा करते हैं पत्थर’ शीर्षक कविता में कवि क्यों और कैसे पत्थर का मानवीकरण करता है ?