राम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै — हिन्दी कक्षा 10 — Question
Bihar BoardHindi Mediumकक्षा 10हिन्दीराम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै2 Marks
Question
वाणी कब विष के समान हो जाती है?
✓
Answer
कवि गुरुनानक का कहना है कि सच्चे हृदय से राम-नाम कीर्तन की सच्ची स्थायी शान्ति देकर व्यक्ति को इस दुखमय जीवन के पार पहुँचा पाता है। जो व्यक्ति राम-नाम का कीर्त्तन नहीं करता, जो सिर्फ सांसारिक मोह माया में लगा रहता है, उसकी वाणी विष के समान हो जाती है।
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