प्रतिभूतियों में सारा व्यापार अब कम्प्यूटर टर्मिनल के माध्यम से होता है। सम्पूर्ण प्रणाली के कम्प्यूटरीकृत होने के कारण प्रतिभूतियों के क्रय तथा विक्रय इलैक्ट्रॉनिक बहीखाता प्रविष्टि रूप में निपटाया जाता है। यह मुख्य रूप से समस्याओं, चोरी, नकली/ जाली अंतरण, अंतरण में देरी तथा भौतिक रूप में रखे गए अंश प्रमाण-पत्रों अथवा ऋणपत्रों संबंधी कागजी कार्य के उन्मूलन हेतु किया जाता है।
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निवेशक द्वारा भौतिक रूप में रखी गयी प्रतिभूतियां रद्द हो जाती हैं तथा निवेशक को एक इलैक्ट्रॉनिक प्रविष्टि अथवा संख्या दे दी जाती है जिससे वह एक खाते में इलैक्ट्रॉनिक शेष के रूप में प्रतिभूतियाँ रख सकता है। इलैक्ट्रॉनिक रूप में प्रतिभूतियाँ रखने की यह प्रक्रिया विभौतिकीकरण कहलाती है। इसके लिए निवेशक को एक संगठन जिसे निक्षेपागार (डिपोजिटरी) कहा जाता है, के पास एक डिमैट खाता खोलना होता है वस्तुतः, अब सभी प्रांरभिक सार्वजनिक निर्गम (IPOS) विभौतिकीय रूप में जारी किए जाते हैं तथा 99% से अधिक आवर्त का निपटान डिमैट रूप में सुपुर्दगी द्वारा किया जाता है।