विद्युत घंटी की कार्य - प्रणाली: इसमें एक विद्युत चुम्बक होता है। इसमें लोहे के टुकड़े पर ताँबे के तार की कुंडली लिपटी होती है। विद्युत चुम्बक के निकट लोहे की एक पत्ती लगी होती है, जिसके एक सिरे से हथौड़ा जुड़ा होता है। लोहे की पत्ती के समीप एक सम्पर्क पेंच होता है। जब लोहे की पत्ती इस पेंच के सम्पर्क में आती है, तो विद्युत परिपथ पूरा हो जाता है तथा कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, जिससे वह विद्युत चुम्बक बन जाती है। तब यह लोहे की पत्ती को अपनी ओर खींचती है। इस प्रक्रिया में पत्ती के सिरे से जुड़ा हथौड़ा घंटी से टकराता है और ध्वनि उत्पन्न होती है। परन्तु, जब विद्युत चुम्बक लोहे की पत्ती को अपनी ओर खींचती है, तो यह परिपथ को भी तोड़ देती है। इससे कुंडली से विद्युत धारा का प्रवाह समाप्त हो जाता है।
RBSE Class 7 Science Important Questions Chapter 14 विद्युत्तुत धारा और इसके प्रभाव 1अब कुंडली विद्युत चुम्बक नहीं होती। यह लोहे की पत्ती को भी अपनी ओर नहीं खींचती है। लोहे की पत्ती अपनी मूल स्थिति में आकर पुनः सम्पर्क पेंच से स्पर्श करती है। इससे परिपथ फिर से पूरा हो जाता है। कुंडली से पुन: विद्युत धारा प्रवाहित होती है तथा हथौड़ा पुनः घंटी से टक्कर मारता है। यह प्रक्रिया अति शीघ्रता से दोहराई जाती है। हर बार परिपथ पूरा होने पर हथौड़ा घंटी से टकराता है और इस प्रकार विद्युत घंटी बजती है।