योजना दो प्रकार की होती है-
1. एकल प्रयोग योजना
2. स्थायी योजना
व्यवसाय प्रचालन के संबंध में कोई निर्णय लेने अथवा किसी परियोजना को प्रारंभ करने से पूर्व एक संगठन को योजना बनानी होती है। योजनाओं को प्रयोग तथा नियोजन अवधि की लंबाई के आधार पर कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है। कुछ योजनाएँ अल्पकालिक होती हैं तथा प्रचालन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होती हैं। ये योजनाएँ एकल प्रयोग योजनाओं तथा स्थायी योजनाओं में वर्गीकृत की जा सकती हैं।
1. एकल प्रयोग योजना-एकल प्रयोग योजना एक बारी की घटना अथवा परियोजना हेतु विकसित की जाती है जो कि भविष्य में दोहराई नहीं जाती. अर्थात् ये अनावृत परिस्थितियों हेतु होती हैं। इस योजना की अवधि परियोजना के प्रकार पर निर्भर करती है एवं इनका विस्तार एक सप्ताह अथवा एक माह हो सकता है। परियोजनाएँ कार्यक्रमों जैसे होती हैं परन्तु इनके क्षेत्र तथा जटिलता में अंतर होता है। उदाहरणार्थ-एक कार्यक्रम में चरणों, अन्य छोटे निर्माण कार्यों से व्यवहार करने हेतु एक नया विभाग खोलने के लिए आवश्यक कार्यविधियों को पहचानना सम्मिलित है।
2. स्थायी योजना-एक समयावधि के दौरान नियमित रूप से घटित होने वाली क्रियाओं हेतु प्रयोग की जाती है। इससे अभिकल्पित किया जाता है कि एक संगठन के आंतरिक प्रचालन भली प्रकार से चल रहे हैं। यह योजना मुख्य रूप से नैत्यिक निर्णयन में कार्यकुशलता को बढ़ाती है। यह सामान्यतः एक बार विकसित की जाती परंतु जरूरत पड़ने पर समय-समय पर व्यवसाय की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु संशोधित की जाती है। स्थायी योजनाओं में नीतियाँ, कार्यविधियाँ तथा नियम सम्मिलित हैं।
अर्थात् एकल प्रयोग तथा स्थायी योजनाएँ प्रचालन नियोजन प्रक्रिया के भाग हैं। इस आधार पर कि योजनाएँ क्या प्राप्त करने हेतु बनी हैं, योजनाएँ उद्देश्य, व्यूहरचना, नीति, कार्यविधि, विधि, नियम, कार्यक्रम तथा बजट के रूप में वर्गीकृत की जा सकती हैं।