12वीं व 13वीं शताब्दी के दौरान लोगों के मन-मस्तिष्क को आकार देने के साधन केवल औपचारिक शिक्षा ही नहीं थी बल्कि कला, वास्तुकला और साहित्य ने मानवतावादी विचारों के प्रसार में प्रभावी भूमिका निभायी। जीवन के अनेक क्षेत्रों यथा-शरीर क्रिया विज्ञान, रेखागणित, भौतिकी एवं सौन्दर्य की उत्कृष्ट भावना ने इतालवी कला, चित्रकला व वास्तुकला को एक नया रूप प्रदान किया जिसे बाद में 'यथार्थवाद' का नाम दिया गया। यथार्थवाद की यह परम्परा 19वीं शताब्दी तक चलती रही।