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बहादुर question types

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बहादुर questions

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यह किसने कहा कि - "ग्यारह रुपए साड़ी के खूंट से निकालकर यहीं चारपाई पर रखे __________ पर वे मिल नहीं रहे हैं __________ "?
  • A
    लेखक की पत्नी ने
  • रिश्तेदार की पत्नी
  • C
    लेखक की माँ ने
  • D
    इनमें से कोई नहीं

Answer: B.

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दिन मजे में बीतने लगे। बरसात आ गई थी। पानी रुकता था और बरसता था। मैं अपने को बहुत ऊँचा महसूस करने लगा था। अपने परिवार और सम्बन्धियों के बड़प्पन तथा शान-बान पर मुझे सदा गर्व रहा है। अब मैं मुहल्ले के लोगों को पहले से भी तुच्छ समझने लगा। मैं किसी से सीधे मुँह बात नहीं करता। किसी की ओर ठीक से देखता भी नहीं था। दूसरों के बच्चों को मामूली-सी शरारत पर डाँट-डपट देता। कई बार पड़ोसियों को सुना चुका था जिसके पास कलेजा है, वही आजकल नौकर रख सकता है। घर के स्वांग की तरह रहता है। निर्मला भी सारे मुहल्ले में शुभ सूचना दे आई थी-आधी तनख्वाह तो नौकर पर ही खर्च हो रही है, पर रुपया-पैसा कमाया किसलिए जाता है ? वे तो कई बार कह ही चुके थे तुम्हारे लिए दुनिया के किसी कोने से नौकर जरूर लाऊँगा वही हुआ।
(i) लेखक अपने को ऊँचा क्यों समझने लगा था ?
(ii) नौकर को पाकर लेखक के व्यवहार में कौन-सा परिवर्तन आ गया था? और क्यों?
(iii) लेखक की पत्नी निर्मला ने पड़ोसियों को क्या खबर सुनाई थी?
(iv) घर में नौकर किस तरह होता है ?
(v) रुपया-पैसा किसलिए कमाया जाता है ?
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उसके स्वर में एक मीठी झनझनाहट थी। मुझे ठीक-ठीक याद नहीं कि मैंने उसको क्या हिदायतें दी। शायद यह कि वह शरारतें छोड़कर ढंग से काम करे और घर को अपना घर समझे। इस घर में नौकर-चाकर को बहुत प्यार और इज्जत से रखा जाता है। जो सब खाते-पहनते हैं, वही नौकर-चाकर खाते-पहनते हैं। अगर वह यहाँ रह गया तो ढंग-शऊर सीख जाएगा, घर के और लड़कों की तरह पढ़-लिख जाएगा और उसकी जिंदगी सुधर जाएगी। निर्मला ने उसी समय कुछ व्यावहारिक उपदेश दे डाले थे। इस मुहल्ले में बहुत तुच्छ लोग रहते हैं, वह न किसी के यहाँ जाए और न किसी का काम करे। कोई बाजार से कुछ लाने की कहे तो वह ‘अभी आता ‘ हूँ’ कहकर अन्दर खिसक जाए। उसको घर के सभी लोगों से सम्मान और तमीज से बोलना चाहिए। और भी बहुत-सी बातें। अन्त में निर्मला ने बहुत ही उदारतापूर्वक लड़के के नाम में से ‘दिल’ शब्द उड़ा दिया।
(i) लेखक ने दिलबहादुर को कौन-कौन सी हिदायतें दी थीं?
(ii) दिलबहादुर को पाकर लेखक के मन में उसके प्रति कौन-सी मनोदशाएँ जागृत हो गई?
(iii) निर्मला ने दिलबहादुर को कौन-कौन-सी व्यावहारिक शिक्षा दी?
(iv) निर्मला ने दिलबहादुर को बहादुर कैसे बना दिया ?
(v) निर्मला ने दिलबहादुर के नाम से 'दिल' शब्द क्यों हटा दिया?
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निर्मला ने उसको एक फटी-पुरानी दरी दे दी थी। घर से वह एक चादर भी ले आया था। रात को काम-धाम करने के बाद वह भीतर के बरामदे में एक टूटी हुई बँसखट पर अपना बिस्तर बिछाता था। वह बिस्तरे पर बैठ जाता और अपनी जेब में से कपड़े की एक गोल-सी नेपाली टोपी निकालकर पहन लेता, जो बाईं ओर काफी झुकी रहती थी। फिर वह एक छोटा-सा आईना निकालकर बन्दर की तरह उसमें अपना मुँह देखता था। वह बहुत ही प्रसन्न नजर आता था।
उसके बाद कुछ और भी चीजें उसकी जेब से निकलकर उसके बिस्तर पर सज जाती थीं कुछ गोलियाँ, पुराने ताश की एक गड्डी, कुछ खूबसूरत. पत्थर के टुकड़े, ब्लेड, कागज की नावें। वह कुछ देर तक उनसे खेलता था। उसके बाद वह धीमे-धीमे स्वर में गुनगुनाने लगता था। उन पहाड़ी गानों का अर्थ हम समझ नहीं पाते थे, पर उसकी मीठी उदासी सारे घर में फैल जाती, जैसे कोई पहाड़ की निर्जनता में अपने किसी बिछुड़े हुए साथी को बुला रहा हो।
(i) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिएँ।
(ii) निर्मला ने बहादुर को सोने के लिए क्या व्यवस्था दी थी?
(iii) रात को काम करने के बाद बहादुर कहाँ सोता था ?
(iv) बहादुर सोते समय अपनी जेब से क्या निकालता था और क्या-क्या करता था?
(v) बहादुर के गीत का लेखक के घर में क्या प्रभाव पड़ता था ?
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सहसा मैं काफी गंभीर हो गया था, जैसा कि उस व्यक्ति को हो जाना चाहिए, जिस पर एक भारी दायित्व आ गया हो। वह सामने खड़ा था और आँखों को बुरी तरह मल रहा था। बारह-तेरह वर्ष की उम्र। ठिगना चकइठ शरीर, गोरा रंग और चपटा मुंह। वह सफेद नेकर, आधी बांह की ही सफेद कमीज और भूरे रंग का पुराना जूता पहने था। उसके गले में स्काउटों की तरह एक रूमाल बंधा था। उसको घेरकर परिवार के अन्य लोग खड़े थे। निर्मला चमकती दृष्टि से कभी लड़के को देखती और कभी मुझको और अपने भाई को। निश्चय ही वह पंच-बराबर हो गई थी।
(i) प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है ? और इसके लेखक कौन हैं.?
(ii) परिवार के सभी सदस्य किसे घेरकर खड़े थे? और क्यों ?
(iii) नवागन्तुक कौन था? उसका संक्षिप्त चित्रण करें।
(iv) निर्मला कौन थी? और वह पंच-बराबर कैसे हो गई थी?
(v) लेखक गंभीर क्यों हो गया था?
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