Question 15 Marks
व्याख्या करें-
"बनकर शायद हंस मैं किसी किशोरी का;
घुँघरू लाल पैरों में;
"बनकर शायद हंस मैं किसी किशोरी का;
घुँघरू लाल पैरों में;
Answer
View full question & answer→प्रस्तुत पंक्तियाँ बांग्ला साहित्य के प्रसिद्ध कवि जीवनानंद दास द्वारा रचित कविता 'लौटकर आऊँगा फिर' शीर्षक कविता से ली गई है।
प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि अपनी मातृभूमि बंगाल की भूमि पर बार-बार जन्म लेने की उत्कृट इच्छा को अभिव्यक्त करता है। कवि फिर अगले जन्म में किशोरियों के लाल पैरों का घुँघरू बनकर हंस की मधुर चाल में चलना चाहता है।
कवि बंगाल की बहती नदी के पानी में दिन-दिन भर तैरते रहना चाहता है, जिसके किनारे की घासों में बंगाल की महक बसी हुई है।
प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि अपनी मातृभूमि बंगाल की भूमि पर बार-बार जन्म लेने की उत्कृट इच्छा को अभिव्यक्त करता है। कवि फिर अगले जन्म में किशोरियों के लाल पैरों का घुँघरू बनकर हंस की मधुर चाल में चलना चाहता है।
कवि बंगाल की बहती नदी के पानी में दिन-दिन भर तैरते रहना चाहता है, जिसके किनारे की घासों में बंगाल की महक बसी हुई है।