Questions

प्रश्नों का उत्तर लिखिए : [सप्रसंग व्याख्या] [5M]

Take a timed test

2 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 15 Marks
व्याख्या करें-
"बनकर शायद हंस मैं किसी किशोरी का;
घुँघरू लाल पैरों में;
Answer
प्रस्तुत पंक्तियाँ बांग्ला साहित्य के प्रसिद्ध कवि जीवनानंद दास द्वारा रचित कविता 'लौटकर आऊँगा फिर' शीर्षक कविता से ली गई है।
प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि अपनी मातृभूमि बंगाल की भूमि पर बार-बार जन्म लेने की उत्कृट इच्छा को अभिव्यक्त करता है। कवि फिर अगले जन्म में किशोरियों के लाल पैरों का घुँघरू बनकर हंस की मधुर चाल में चलना चाहता है।
कवि बंगाल की बहती नदी के पानी में दिन-दिन भर तैरते रहना चाहता है, जिसके किनारे की घासों में बंगाल की महक बसी हुई है।
View full question & answer
Question 25 Marks
सप्रसंग व्याख्या करें-
”खेत हैं जहाँ धान के, बहती नदी
के किनारे फिर आऊँगा लौटकर
एक दिन-बंगाल में;
Answer
प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्युपस्तक के “लौटकर आऊँगा फिर” शीर्षक से उद्धत हैं। इस अंश से पता चलता है कि कवि अगले जन्म में भी अपनी मातृभूमि बंगाल में ही जन्म लेना चाहते हैं।
प्रस्तुत पद्यांश में कवि की मातृभूमि के प्रति उसका प्रेम दिखाई पड़ता है। कवि बंगाल के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ वहाँ के खेतों में उगने वाली धान की फसलों का मनोहर चित्र खींचा है। कवि कहता है कि जिस बंगाल के खेतों में लहलहाती हुई धान की फसलें हैं वहाँ मैं फिर लौटकर आना चाहता हूँ। जहाँ कल-कल करती हुई नदी की धारा अनायास ही लोगों को आकर्षित कर लेती हैं वहाँ ही मैं जन्म लेना चाहता हूँ। यहाँ स्पष्ट है कि कवि अपनी भावना को स्वच्छंद स्वरूप प्रदान करता है।
View full question & answer