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नागरी लिपि question types

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नागरी लिपि questions

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नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रादेशिक भाषाएँ भी जन्म लेती हैं। आठवीं-नौवीं सदी से आरंभिक हिन्दी का साहित्य मिलने लग जाता है। हिन्दी के आदिकवि सरहपाद (आठवीं) के ‘दोहाकोश’ की तिब्बत से जो हस्तलिपि मिली है वह दसवीं-ग्यारहवीं सदी की लिपि में लिखी गई है। नेपाल से और भारत के जैन-भंडारों से भी इस काल की बहुत सारी हस्तलिपियाँ मिली हैं। इसी काल में भारतीय आर्यभाषा परिवार की आधुनिक भाषाएँ-मराठी, बंगला आदि जन्म ले रही थीं। इस समय से इन भाषाओं के लेख मिलने लगते हैं।
(i) नागरी लिपि के साथ-साथ किस प्रकार की भाषाओं का जन्म हुआ और यह प्रक्रिया कब शुरू हुई?
(ii) सरहपाद कौन थे और उनके किस ग्रंथ की हस्तलिपि तिब्बत से प्राप्त हुई है?
(iii) दसवीं-ग्यारहवीं सदी की नागरी लिपि में लिखी गई हस्तलिपियाँ हमें किन-किन स्थानों से प्राप्त हुई हैं?
(iv) भारतीय आर्यभाषा परिवार की कौन-कौन सी आधुनिक भाषाएँ आठवीं-नौवीं सदी में जन्म ले रही थीं?
(v) आठवीं-नौवीं सदी में प्रादेशिक भाषाओं और साहित्य के विकास का क्या महत्त्व है?
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इतना निश्चित है कि यह नागरी शब्द किसी नगर अर्थात् बड़े शहर से संबंधित है। ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र (पटना) को नगर कहते थे। हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्य की उत्तर भारत की एक विशेष शैली को ‘नागर शैली’ कहते हैं। अतः ‘नागर’ या ‘नागरी’ शब्द उत्तर भारत के किसी बड़े नगर से संबंध रखता है।
असंभव नहीं कि यह बड़ा नगर प्राचीन पटना ही हो। चन्द्रगुप्त (द्वितीय) “विक्रमादित्य’, का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, इसलिए गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ भी कह जाता होगा। देवनागरी’ की लिपि होने से उत्तर भारत की प्रमुख लिपि को बाद में देवनागरी नाम दिया गया होगा। लेकिन यह सिर्फ एक मत हुआ। हम सप्रमाण नहीं बता सकते कि यह देवनागरी नाम कैसे अस्तित्व में आया।
(i) नागरी शब्द का अर्थ क्या है और इसका संबंध किससे माना जाता है?
(ii) ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक से हमें नागरी शब्द के संदर्भ में क्या जानकारी मिलती है?
(iii) उत्तर भारत की स्थापत्य कला में ‘नागर शैली’ क्या है और इसका नागरी शब्द से क्या संबंध है?
(iv) गुप्तों की राजधानी पटना को ‘देवनगर’ कहा जाता था, इसका कारण क्या था?
(v) देवनागरी लिपि के नामकरण के संबंध में विद्वानों का क्या मत है?
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अनेक विद्वानों का मत है कि दक्षिण भात में नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख राष्ट्रकूट राजा तिदुर्ग का सामागंड दानपत्र (754 ई०) है। दंतिदुर्ग ने ही राष्ट्रकूट शासन की नींव डाली थी। ये राष्ट्रकूट शासक मूलतः कर्णाटक के रहनेवाले थे और इनकी मातृभाषा कन्नड़ थी; परंतु ये खानदेश-विदर्भ में बस गए थे। दंतिदुर्ग के बाद उसका चाचा कृष्ण (प्रथम) राष्ट्रकूटों की गद्दी पर बैठा। इसी कृष्ण के शासनकाल में एलोरा (प्राचीन एलापुर, वेरूल) में अनुपम कैलाश मंदिर पहाड़ को काटकर बनाया गया था।कृष्ण के कुछ लेख भी मिले हैं। नौवीं सदी में अमोघवर्ष एक प्रख्यात राष्ट्रकूट राजा हुआ। इसी अमोघवर्ष ने राष्ट्रकूट की नई राजधानी मान्यखेट (मालखेड) की नींव डाली। अमोघवर्ष के शासनकाल में ही जैन गणितज्ञ महावीराचार्य (850 ई.) ने ‘गणितसार-संग्रह’ की रचना की थी।
(i) राष्ट्रकूट राजा तिदुर्ग के सामागंड दानपत्र का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
(ii) राष्ट्रकूटों की मातृभाषा कौन सी थी और वे किन क्षेत्रों में बसे थे?
(iii) कृष्ण प्रथम राष्ट्रकूट के शासनकाल में क्या महत्वपूर्ण निर्माण हुआ था?
(iv) अमोघवर्ष के शासनकाल में राष्ट्रकूटों की कौन सी नई राजधानी स्थापित हुई थी?
(v) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने कौन-सी महत्वपूर्ण रचना की और किस राजा के शासनकाल में?
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ईसा की चौदहवीं-पंद्रहवीं सदी के विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को नंदिनागरी कहा है। विजयनगर के राजाओं के लेख कन्नड़-तेलगु और नागरी लिपि में मिलते हैं। जानकारी मिलती है कि विजयनगर के राजाओं के शासनकाल में ही पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया था। यह वैदिक साहित्य निश्चय ही नागरी लिपि में लिखा गया होगा। विद्वानों का यह भी मत है कि वाकाटकों और राष्ट्रकूटों के समय के महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगर (आधुनिक नांदेड़) की लिपि होने के कारण इसका नाम नदिनागरी पड़ा।
(i) विजयनगर के शासकों ने अपनी लिपि को नंदिनागरी क्यों कहा और इसका क्या ऐतिहासिक महत्व है?
(ii) विजयनगर के राजाओं के लेख किन भाषाओं और लिपियों में मिलते हैं? इसके कारण क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(iii) विजयनगर शासनकाल में वेदों के लिपिबद्ध होने का क्या महत्व है?
(iv) नंदिनागरी लिपि के नामकरण के पीछे विद्वानों का क्या मत है?
(v) विजयनगर के शासकों द्वारा नागरी लिपि में लेखन के महत्व पर प्रकाश डालिए।
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