Questions

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सविस्तर लिखिए : [5 गुण ]

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Question 15 Marks
ध्रुवीय क्षेत्रों में रहने वाले पक्षी प्रवास क्यों करते हैं? उनके प्रवास के बारे में आप क्या जानते हैं? 
Answer
ध्रुवीय क्षेत्रों में रहने वाले पक्षियों को जीवित रहने के लिए अपने शरीर को गर्म रखना आवश्यक होता है। इसी कारण अनेक प्रकार के पक्षी सर्दियों के आते ही अपेक्षाकृत गर्म स्थानों पर प्रवास के लिए चले जाते हैं। सर्दियाँ समाप्त होने पर वे पुनः अपने आवास पर वापस लौट आते हैं। प्रवासी पक्षी इसके लिए 15000 किमी तक की लम्बी यात्रा भी करते हैं। ये अधिक ऊँचाई पर उड़ान भरते हैं जहाँ वायु प्रवाह उड़ान में सहायक होता है। ये वर्ष दर वर्ष एक ही स्थान पर प्रवास के लिए आते रहते हैं। ऐसा माना जाता है कि इनमें दिशा का सहजबोध होता है। मार्गदर्शन के लिए संभवत: ये कुछ भू - चिन्हों (Landmark) का भी उपयोग करते हैं। संभवतः अनेक पक्षियों को दिन में सूर्य से और रात्रि में तारों से मार्गदर्शन मिलता है। ऐसा भी प्रमाण है कि पक्षी दिशा का पता लगाने के लिए पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं। भारत में भी अनेक पक्षी प्रवास के लिए आते हैं। इनमें राजस्थान का भरतपुर तथा हरियाणा का सुल्तानपुर प्रमुख स्थान हैं।
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Question 25 Marks
उदाहरण सहित समझाइए कि उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में अनेक जंतु वृक्षों पर रहने के लिए अनुकूलित होते हैं।
Answer
उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में चूँकि जन्तुओं की जनसंख्या अधिक होती है, अत: उनमें भोजन और आश्रय के लिए सघन प्रतिस्पर्धा रहती है। इस कारण अनेक जन्तु वृक्षों पर रहने के लिए अनुकूलित होते हैं। उदाहरणस्वरूप
(i) इन वनों में पाये जाने वाले लाल नेत्रों वाले मेंढक के पैर के तलवे चिपचिपे होते हैं, जो उन्हें उन वृक्षों पर चढ़ने में सहायता करते हैं, जिन पर वे रहते हैं।
(ii) वृक्षों पर रहने में सहायता के लिए बंदरों की लम्बी पूँछ होती है, जो शाखाओं को पकड़ने में सहायक होती है। इनके हाथ-पैर ऐसे होते हैं, जिससे ये आसानी से शाखाओं को थामे रहते हैं।
(iii) इन वनों में पाये जाने वाले टूकन नामक पक्षी की लम्बी, बड़ी चोंच होती है, जिसकी सहायता से वह ऐसी शाखाओं में लगे फलों तक पहुँच सकता है, जो बहुत कमजोर होती हैं और उसका भार नहीं सहन कर सकती हैं।
(iv) लॉयन टेल्ड लंगूर भी वृक्षों पर आसानी से चढ़ जाता है और अपने जीवन का अधिकांश समय वृक्षों पर ही व्यतीत करता है। यह मुख्यतः फल खाता है। बीज, कोमल पत्तियाँ, तने, पुष्प और कलियाँ भी खाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में रहने वाले अनेक जंतु वृक्षों पर रहने के लिए अनुकूलित होते हैं।
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Question 35 Marks
पृथ्वी के दो ऐसे क्षेत्रों के विषय में लिखिए, जहाँ चरम जलवायवी परिस्थितियाँ पायी जाती हैं। 
Answer
चरम जलवायवी परिस्थितियों वाले पृथ्वी के दो क्षेत्र निम्नलिखित हैं।
(i) धुवीय क्षेत्र: ये ध्रुवों के पास स्थित होते हैं, जैसेउत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव । ध्रुवीय क्षेत्र के कुछ परिचित देश कनाडा, ग्रीनलैण्ड, आइसलैण्ड, नार्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड तथा अमेरिका में अलास्का और रूस के साइबेरियाई क्षेत्र हैं। ध्रुवीय क्षेत्रों में चरम जलवायु पायी जाती है। ये क्षेत्र सदैव बर्फ से ढके रहते हैं। ध्रुवों पर छ: महीने के दिन और छ: महीने की रात पायी जाती है। सर्दियों का तापमान -37°C तक हो जाता है। यहाँ रहने वाले जन्तु, जैसेध्रुवीय भालू (पोलर बियर), पेंग्विन, अनेक प्रकार का मछलियाँ, कस्तूरी मृग, रेनडियर, लोमड़ी, सील, व्हेल तथा अन्य कई प्रकार के पक्षी इन चरम स्थितियों में रहने के लिए अनुकूलित हो गए हैं।
(ii) उष्णकटिबंधीय वर्षावन:उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की जलवायु सामान्यतः गर्म होती है, क्योंकि ये क्षेत्र भूमध्यरेखा के आस-पास स्थित होते हैं। यहाँ सबसे सर्द महीनों में भी तापमान सामान्यतः 15°C से अधिक रहता है। गर्मियों में तापमान 40°C से अधिक हो जाता है। वर्षभर दिन और रात की लम्बाई लगभग बराबर होती है। इन क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में वर्षा होती है। इस क्षेत्र की एक प्रमुख विशेषता उष्णकटिबंधीय वर्षावन है। उष्णकटिबंधीय वर्षावन, भारत में पश्चिमी घाटों और असम में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त ऐसे वन दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य अमेरिका और मध्य अफ्रीका में भी पाए जाते हैं। सतत् गर्मी और वर्षा के कारण इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के पादप और जन्तु पाए जाते हैं। वर्षावनों में पाए जाने वाले प्रमुख प्रकार के जन्तुओं में बंदर, कपि (ऐप्स),गुरिल्ला, शेर, चीता, हाथी, तेंदुआ, छिपकली, सर्प, पक्षी और कीट हैं।
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