मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।
इस गम्भीर अनंत नीलिमा में असंख्य जीवन इतिहास।
यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य मलिन उपहास।
तब भी कहते हो - कह डातू दुँ बलता अपनी बीती।
तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे - यह गागर रीती।
किन्तु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले-
अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।
यह विडंबना! अरी सरलते! तेरी हँसी उड़ाऊँ में
भलें अपनी या प्रवंचना ओरों की दिखलाऊँ में
(i) गागर रीती का क्या आशय है?
(क) खाली घड़ा
(ख) उपलब्धियों से रहित जीवन
(ग) दुःख से भरा जीवन
(घ) रेत से भरी गगरी
(ii) मुरझाकर गिरती पत्तियों से क्या अर्थ निकलता है?
(क) पतझड़ का मोसम
(ख) सूखा पड़ जाना
(ग) जीवन में खुशियाँ आना
(घ) जीवन की नश्वरता
(iii) असंख्य जीवन इतिहासों का क्या हश्र होता है?
(क) प्रसिद्ध होते हैं
(ख) उपहास के पात्र होते हैं
(ग) पुरस्कृत होते हैं
(घ) अमर हो जाते हैं
(iv) कथन (A): कवि द्वारा पूरी ईमानदारी से आत्मकथा लिखने पर मित्र बुरा मान सकते हैं।
कारण (R): कवि के मित्रों ने कई बार विश्वासघात करके उनकी खुशियाँ छीनीं हैं।
(क) कथन (A) गलत है किन्तु कारण (R) सही है।
(ख) कथन (A) और कारण R) दोनों गलत है।
(ग) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) सही हे और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(v) कवि आत्मकथा लेखन को अपने भोलेपन का मज़ाक क्यों मानता है?
(क) सपना टूट जाने के कारण
(ख) लोगों के व्यवहार के कारण
(ग) अपनी कमजोरियाँ दर्शनि के
(घ) आत्मकथा पसंद न होने के कारण कारण