Question 17 Marks
अनुशासन के अभाव में समाज में अराजकता और अशांति का साम्राज्य होता है। वन्य पशुओं में अनुशासन का कोई महत्त्व नहीं है, इसी कारण उनका जीवन असुरक्षित, आतंकित एवं अव्यवस्थित रहता है। सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ-साथ जीवन में अनुशासन का महत्त्व भी बढ़ता गया। आज के वैज्ञानिक युग में तो अनुशासन के बिना मनुष्य का कार्य भी नहीं चल सकता। कुछ व्यक्ति सोचते हैं कि अब मानव, सभ्य ओर शिक्षित हो गया है, उस पर किसी भी प्रकार के नियमों का बंधन नहीं होना चाहिए। वह स्वतंत्र रूप से जो भी करे, उसे करने देना चाहिए, लेकिन यदि व्यक्ति को यह अधिकार दे दिया जाए तो वन्य जीवन जेसी अव्यवस्था आ जाएगी। मानव, मानव ही हे, देवता नहीं। उसमें सुप्रवृत्तियाँ ओर कुप्रवृत्तियाँ दोनों ही होती हैं। मानव सभ्य तभी तक रहता है जब तक वह अपनी सुप्रवृत्तियों की आज्ञा के अनुसार कार्य करे। इसलिए मानव के पूर्ण विकास के लिए कुछ बंधनों ओर नियमों का होना आवश्यक है।
1. मानव कब सभ्य कहा जा सकता है?
(क) जब वह अपनी सुप्रवृत्तियों के अनुसार कार्य करे
(ख) जब वह अपनी मर्ज़ी के अनुसार कार्य करे
(ग) जब वह अपने लिए कार्य करे
(घ) जब वह अपनी सुविधा के अनुसार कार्य करे
2. अनुशासन के अभाव में समाज की क्या स्थिति होगी?
(क) समाज में शांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी
(ख) समाज में जागरूकता उत्पन्न हो जाएगी
(ग) समाज में अराजकता ओर अशांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी
(घ) समाज तेज़ी से उत्रति करेगा
3. मानव में निहित प्रवृत्तियाँ कौन-कौन सी हैं?
(क) लालच ओर बुराई
(ख) अधर्म और धर्म
(ग) आदर और अनादर
(घ) सुप्रवृत्तियाँ और कुप्रवृत्तियाँ
4. अनुशासन के अभाव में पशुओं का जीवन कैसा होता है?
5. कुछ लोग अनुशासन को उचित क्यों नहीं मानते?
1. मानव कब सभ्य कहा जा सकता है?
(क) जब वह अपनी सुप्रवृत्तियों के अनुसार कार्य करे
(ख) जब वह अपनी मर्ज़ी के अनुसार कार्य करे
(ग) जब वह अपने लिए कार्य करे
(घ) जब वह अपनी सुविधा के अनुसार कार्य करे
2. अनुशासन के अभाव में समाज की क्या स्थिति होगी?
(क) समाज में शांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी
(ख) समाज में जागरूकता उत्पन्न हो जाएगी
(ग) समाज में अराजकता ओर अशांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी
(घ) समाज तेज़ी से उत्रति करेगा
3. मानव में निहित प्रवृत्तियाँ कौन-कौन सी हैं?
(क) लालच ओर बुराई
(ख) अधर्म और धर्म
(ग) आदर और अनादर
(घ) सुप्रवृत्तियाँ और कुप्रवृत्तियाँ
4. अनुशासन के अभाव में पशुओं का जीवन कैसा होता है?
5. कुछ लोग अनुशासन को उचित क्यों नहीं मानते?
Answer
View full question & answer→1. (क) मानव तभी सभ्य कहा जा सकता है जब तक वह अपनी सुप्रवृत्तियों की आज्ञा के अनुसार सबकी भलाई के लिए कार्य करें। अत: कुछ बंधनों ओर नियमों का पालन करके ही मानव समाज का विकास कर सकता है।
2. (ग) अनुशासन का अर्थ होता है नियम -नीतियों का पालन करना। इसके पालन करने से मानव जीवन उन्नति को प्राप्त करता है जबकि इसके अभाव में समाज में अराजकता ओर अथांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी ओर चारों ओर जंगतराज जेसी स्थिति उत्पन्न हो जाने से लोग असुरक्षित ओर अव्यवस्थित महसूस करेंगे।
3. (घ) मानव में निहित प्रवृत्तियाँ सुप्रवृत्तियाँ ओर कुप्रवृत्तियाँ हैं, जिनके प्रभाव से वह अच्छा आचरण करता हे ओर बुरा भी।
4. वन्य पशुओं में अनुशासन का कोई महत्व नहीं होता, जिसके कारण उनका जीवन असुरक्षित, आतंकित एवं अव्यवस्थित रहता है।
5. कुछ लोगों का मानना है कि मानव के सभ्य ओर शिक्षित हो जाने के कारण उस पर किसी प्रकार के नियमों का बंधन नहीं होना चाहिए। वह स्वतंत्र रूप से जो करे, उसे करने देना चाहिए।
2. (ग) अनुशासन का अर्थ होता है नियम -नीतियों का पालन करना। इसके पालन करने से मानव जीवन उन्नति को प्राप्त करता है जबकि इसके अभाव में समाज में अराजकता ओर अथांति की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी ओर चारों ओर जंगतराज जेसी स्थिति उत्पन्न हो जाने से लोग असुरक्षित ओर अव्यवस्थित महसूस करेंगे।
3. (घ) मानव में निहित प्रवृत्तियाँ सुप्रवृत्तियाँ ओर कुप्रवृत्तियाँ हैं, जिनके प्रभाव से वह अच्छा आचरण करता हे ओर बुरा भी।
4. वन्य पशुओं में अनुशासन का कोई महत्व नहीं होता, जिसके कारण उनका जीवन असुरक्षित, आतंकित एवं अव्यवस्थित रहता है।
5. कुछ लोगों का मानना है कि मानव के सभ्य ओर शिक्षित हो जाने के कारण उस पर किसी प्रकार के नियमों का बंधन नहीं होना चाहिए। वह स्वतंत्र रूप से जो करे, उसे करने देना चाहिए।