Question types

MODEL PAPER 5 question types

46 questions across 16 question groups — pick any mix to generate a Hindi - B paper with step-by-step answer keys.

46
Questions
16
Question groups
5
Question types
01

पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।(5M) ( स्पर्श भाग 2 - काव्य – खंड )

1 Q
02

पध्य पाठ प्रश्नो (2M) ( स्पर्श भाग 2 - काव्य – खंड )

4 Q
03

गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।(5M) ( स्पर्श भाग 2 - गद्य – खंड )

1 Q
04

गध्य पाठ प्रश्नो (2M) ( स्पर्श भाग 2 - गद्य – खंड )

4 Q
05

'पदबंध पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ)(1M)

5 Q
06

निर्देशानुसार रचना के आधार पर वाक्य भेद (MCQ)(1M)

5 Q
07

समास पर आधारित प्रश्नों के उत्तर (MCQ)(1M)

5 Q
08

मुहावरे पर आधारित प्रश्नों के उत्तर (MCQ)(1M)

5 Q
09

संकेत-बिंदुओं के आधार पर शब्दों में अनुच्छेद (5M))

3 Q
10

पत्र लेखन(5M)

2 Q
11

सूचना (4M)

2 Q
12

विज्ञापन (3M)

2 Q
13

ई- मेल (5M)

1 Q
14

लघुकथा (5M)

1 Q
15

गध्यांश पर आधारित (7M)

2 Q
16

पूरक पाठ्यपुस्तक प्रश्नो (3M)

3 Q
Sample Questions

MODEL PAPER 5 questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

क्षुधार्त रंतिदेव ने दिया करस्थ थाल भी,
तथा दधीचि ने दिया परार्थ अस्थिजाल भी।
उशीनर-क्षितीश ने स्वमांस दान भी किया,
सहर्ष वीर कर्ण ने शरीर-चर्म भी दिया।
अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे?
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

(i) रंतिदेव कोन थे?
क)एक दानी राजा
ख)महाराजा
ग) ऋषि
घ) सेनापति
(ii) कबूतर को बचाने के लिए राजा शिवि ने क्या किया?
क) इनमें से कोई नहीं
ख) अपना राज्य दान किया
ग) अपना भोजन दान दिया
घ) अपने मांस का दान दिया
(iii) किसने अपने कवच-कुडंल दान में दिए?
क) दधीचि ने
ख) रंतिदेव ने
ग) कुती पुत्र कर्ण ने
घ) राजा शिवि ने
(iv) वास्तव में असली मनुष्य किसको माना है?
क)जो दूसरों की चिंता करता है।
ख) जो संसार को त्यागकर तपस्वी बन जाता है।
ग) जो अपने लिए जीता है।
घ) जो परोपकारी भाव रखता है।
(v) दधीचि ने समाज के लिए क्या त्याग किया ?
क) अपना ऐश्वर्य
ख) अपने शरीर की हड्डियाँ
ग) अपनी धन संपत्ति
घ) अपना राजपाट
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पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे ओर वे किस बात को प्रतिबिबिबत करते हैं? पर्वत प्रदेश में पावस कविता के आधार पर लिखिए।
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एक दिन संध्या समय, होस्टल से दूर मैं एक कनकोआ लूटने बेतहाशा दोड़ा जा रहा था। आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो। बालकों की पूरी सेना लग्गे और झाड़दार बाँस लिए इनका स्वागत करने को दोड़ी आ रही थी। किसी को अपने आगे-पीछे की खबर न थी। सभी मानो उस पतंग के साथ ही आकाश में उड़ रहे थे, जहाँ सब कुछ समतल हे, न मोटरकारें हैं, न ट्राम, न गाड़ियाँ। सहसा भाई साहब से मेरी मुठभेड़ हो गई, जो शायद बाजार से लौट रहे थे। उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया ओर उग्र भाव से बोले-इन बाजारी लोंडों के साथ धेले के कनकोए के लिए दोड़ते तुम्हें शर्म नहीं आती? तुम्हें इसका भी कुछ लिहाज नहीं कि अब नीची जमात में नहीं हो, बल्कि आठवीं जमात में आ गए हो और मुझसे केवल एक दरजा नीचे हो। आखिर आदमी को कुछ तो अपनी पोजीशन का खयाल रखना चाहिए।

(i) संध्या समय होस्टल से दूर लेखक बेतहाशा क्यों दोड़ा जा रहा था?
क)कनकोआ लूटने के लिए
ख) बड़े भाई साहब की मार से बचने के लिए
ग) भाई साहब रास्ते में न मिल जाएँ
घ) अध्यापक से डरकर
(ii) आकाशगामी पथिक से लेखक किसकी ओर इंगित कर रहा है?
क) पक्षी की ओर
ख) पतंग की ओर
ग) बड़े भाई साहब की ओर
घ) सूर्य की ओर
(iii) बाजार में लेखक की किससे मुठभेड़ हो गई?
क) अध्यापक से
ख) पिताजी से
ग) बड़े भाई साहब से
घ) एक मित्र से
(iv) अब नीची जमात में नहीं हो, वल्कि आठवीं जमात में आ गए हो यह कथन किसके लिए कहा गया हे?
क) लेखक के लिए
ख) लेखक के मित्र के लिए
ग) बड़े भाई साहब के लिए
घ)इनमें से कोई नहीं
(v) मुझसे केवल एक दरजा नीचे हो कथनानुसार लेखक के बड़े भाई साहब किस कक्षा में थे?
क)आठवीं कक्षा में
ख) सातवीं कक्षा में
ग) दसवीं कक्षा में
घ) नोवीं कक्षा में
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जीवन संघर्ष का दुसरा नाम है विषय पर दिए गए संकेत बिंदु ओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए।
संकेत बिंदु:
- जीवन ओर संघर्ष क्या है?
- संघर्ष : सफलता का मूलमंत्र
- असफलता से उत्पन्न निराशा ओर उत्कट जिजीविषा
- जीवन का मूलमंत्र
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मेरा प्रिय खेल - बैडमिंटन विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर अनुच्छेद लिखिए।
संकेत-बिंदु
- बेडमिंटन ही प्रिय क्यों
- खेल-भावना
- मेरी ताक़त
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अपने प्रथानाचार्य को कारण सहित सेवशन बदलने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखिए।
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आप विद्यालय के सांस्कृतिक सचिव हैं; विद्यालय की रंग-मंडली द्वारा प्रस्तुत नाटक को देखने ओर उसके बाद श्रेष्ठ अभिनेताओं को पुरस्कृत करने का आग्रह करते हुए शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर अनुरोध कीजिए।
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आप केन्द्रीय विद्यालय की सुचेता हैं। आप दसवीं कक्षा की छात्रा हैं। विद्यालय में आपका परीक्षा प्रवेश-पत्र खो गया है। विद्यालय सूचना-पट के लिए लगभग 50 शब्दों में एक सूचना लिखिए।
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अभिषेक वर्मा, दिल्ली पब्लिक विद्यालय के हेड ब्वाय की ओर से सुनामी पीड़ितों के लिए धनराशि दान करने हेतु 25-30 शब्दों में सूचना लिखिए।
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पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए एक विज्ञापन 25-50 शब्दों में तैयार कीजिए।
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देश की जनता को मतदान अधिकार के प्रति जागरूक करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त कार्यालय की ओर से लगभग 25-50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
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ई-मेल द्वारा किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को लगभग 80 शब्दों में सूचित कीजिए कि आपके निवास स्थान के आसपास अधिक वर्षा के कारण बाढ़ का-सा माहौल बन गया है। जल-भराव से मुक्ति के लिए तुरंत सहायता अपेक्षित है।
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परीक्षा संकट में फंसा बेचारा विद्यार्थी विषय पर लगभग 100-120 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए।
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समय परिवर्तनशील है। जो आज हमारे साथ नहीं है कल हमारे साथ होगा ओर हम अपने दु ख ओर असफलता से मुक्ति पा लेंगे यह विचार ही हमें सहजता प्रदान कर सकता है। हम दूसरे की सम्पन्नता, ऊँचा पद ओर भोतिक साधनों की उपतश्धता देखकर विचलित हो जाते हैं कि यह उसके पास तो हे किन्तु हमारे पास नहीं हे। यह हमारे विचारों की गरीबी का प्रमाण हे ओर यही बात अन्दर विकट असहज भाव का संचालन करती है। जीवन में सहजता का भाव न होने के वजह से अधिकतर लोग हमेशा ही असफल होते हैं। सहज भाव लाने के लिए हमें एक तो नियमित रूप से योगासन-प्राणायाम ओर ध्यान करने के साथ ईश्वर का स्मरण अवशय करना चाहिए। इसमें हमारे तन-मन ओर विचारों के विकार बाहर निकलते हैं ओर तभी हम सहजता के भाव का अनुभव कर सकते हैं। याद रखने की बात है कि हमारे विकार ही अन्दर हैं। ईर्ष्या -द्वेष ओर परनिंदा जैसे दुगुर्ण हम अनजाने में ही अपना लेते हैं ओर अंततः जीवन में हर पल असहज होते हैं ओर उससे बचने के लिए आवश्यक है कि हम आध्यात्म के प्रति अपने मन ओर विचारों का रुझान रखें।

1. अधिकतर लोग हमेशा ही असफल क्यों होते हैं?
(क) जीवन में सहजता का भाव न होने के कारण
(ख) आध्यात्म के प्रति रुझान न होने के कारण
(ग) गरीबी के कारण
(घ) सम्पन्नता, ऊँचा पद ओर भोतिक साधनों की उपलब्थता के कारण

2. असहजता से बचने का क्या उपाय है?
(क) ईर्ष्या -द्वेष ओर परनिंदा को छोड़कर
(ख) योगासन-प्राणायाम और ध्यान करके
(ग) अधिक धन कमाकर
(घ) आध्यात्म के प्रति रुझान रखकर

3. कौन से विचार हमें सहजता प्रदान कर सकते हैं?
(क) आध्यात्मिक विचार
(ख) परनिंदा के विचार
(ग) धन अर्जन के विचार
(घ) स्वस्थ शरीर के विचार

4. विचारों की गरीबी से लेखक का क्या अभिप्राय हे?
5. हम सहजता का विकास कैसे कर सकते हैं?
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मैं यह नहीं मानता कि समृद्धि ओर आध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तोर पर, में खुद न्यूनतम वस्तुओं का भोग करते हुए जीवन बिता रहा हूँ, लेकिन में सर्वन्र समृद्धि की कद्र करता हूँ, क्योंकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अंततः हमारी आज़ादी को बनाए रखने में सहायक है। आप अपने आस-पास देखेंगे तो पाएँगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे-अधूरे मन से नहीं करती। किसी बगीचे में जाइए। मोसम में आपको फूलों की बहार देखने को मिलेगी। अथवा ऊपर की तरफ ही देखें, यह ब्रहाण्ड आपको अनंत तक फेला दिखाई देगा, आपके यकीन से भी परे। जो कुछ भी हम इस संसार में देखते हैं वह ऊर्जा का ही स्वरूप है। जेसा कि महर्षि अरविंद ने कहा है कि हम भी ऊर्जा के ही अंश हैं। इसलिए जब हमने यह जान लिया है कि आत्मा ओर पदार्थ दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा हैं, वे एक-दूसरे से पूरा तादात्य रखे हुए हैं तो हमें यह एहसास भी होगा कि भोतिक पदार्थों की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गेर-आध्यात्मिक बात नहीं है।

1. लेखक के अनुसार समृद्धि और आध्यात्म में क्या सम्बन्ध है?
(क) एक-दूसरे के विरोधी हैं
(ख) एक-दूसरे के पूरक हैं
(ग) एक-दूसरे से संबंधित नहीं हैं
(घ) समृद्धि, आध्यात्म से बेहतर है
2. भोतिक शब्द का विलोम शब्द क्या है?
(क) अभौतिक
(ख) सांसारिक
(ग) ईश्वरीय
(घ) स्थूल
3. समृद्धि को आवश्यक क्यों बताया गया है?
(क) समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है
(ख) समृद्धि हमारी आज़ादी को बनाए रखने में सहायक है
(ग) समृद्धि ओर आध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं
(घ) उपरोक्त सभी
4. भौतिक वस्तुओं की इच्छा के बारे में लेखक का क्या मत है?
5. लेखक ने प्रकृति का क्या स्वभाव बताया है?
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सपनों के से दिन पाठ के आधार पर बताइए कि अभिभावकों को बर्चों का अधिक खेलकूद करना पंसद क्यों नहीं आता? छात्र जीवन में खेलों का क्या महत्व है? इनसे हमें किन गुणों की प्रेरणा मिलती है?
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