उनकी इस स्थिति ने मुझे चिंतित कर दिया है। जैसे कोई नाव बीच मझधार में फँसी हो और उस पर सवार लोग चिल्ला कर भी अपनी रक्षा न कर सकते हों क्योंकि उनकी चिल्लाहट दूर तक फैले सागर के बीच उठती गिरती लहरों में विलीन हो जाने के अतिरिक्त कर ही क्या सकती है। लेखक के इस कथन की संदर्भ सहित विवेचना कीजिए।