सेठ जी ने कहा-“ऐसा ही है तो ले जाओ अपनी गाय और मेरे रुपए वापस करो। ”
लेकिन रुपए हीरासिंह गाँव भेज चुका था। उसमें से काफी रुपया मकान की मरम्मत में लग गया । अब सेठ जी को देने के लिए रुपए कहाँ से लाए ?
उसे चुप देख, सेठ जी बोले- ले जाना।”
‘अच्छा, तनख्वाह में से रकम कटती जाएगी। जब पूरी हो जाएगी तो अपनी गाय
अगले दिन सवेरे बहुत-सा दूध ड्योढ़ी में बिखरा हुआ था। उससे पहली शाम गाय ने दूध देने से बिलकुल इंनकार कर दिया था।
सेठ जी ने पूछा–“हीरा, यह क्या बात है ? ” हीरासिंह सिर झुकाकर रह गया ।
फिर उसने पूछा- “रात गाय खुली तो नहीं रह गई थी ? आप इसकी खबर तो लीजिए। ‘ घोसी को बुलाकर पूछा गया तो उसने कहा – ” कल रात मैंने गाय को खुद खूंटे से बाँधा था ।”
हीरासिंह ने कहा–“नहीं, ऐसा नहीं हो सकता । गाय रात को आकर ड्योढ़ी में खड़ी रही है और अपना दूध गिरा गई है।”
सेठ जी बोले–“ऐसा मसनूई बातें औरों से कहना । जाओ, खबर लगाओ कि वह कौन आदमी है, जिसकी करतूत है?”
Q.1. सेठ ने हीरासिंह से क्या वापस करने को कहा ?
Q.2. हीरासिंह ने सेठ से मिले रुपए का काफी हिस्सा किस काम में खर्च कर दिया था?
Q.3. सेठ ने हीरासिंह की तनख्वाह से कैसी रकम कटने की बात कही ?
Q.4. सुबह में सेठ की ड्योढ़ी पर क्या बिखरा हुआ था ?