Question 11 Markयावत् सफलः न भवति ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ परिश्रमं कुरु। (तावत्, अपि, एव)Answerयावत् सफलः न भवति तावत् परिश्रमं कुरु।View full question & answer→
Question 21 Mark‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ राजा तथा प्रजा (अपि, एव, यथा)Answerयथा राजा तथा प्रजाView full question & answer→
Question 31 Markतेषु ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ त्रिषु तुष्टेषु तपः समाप्यते। (एव, यथा, नित्यं)Answerतेषु एव त्रिषु तुष्टेषु तपः समाप्यते।View full question & answer→
Question 41 Markवर्षशतैः ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ निष्कृतिः न कर्तुं शक्या। (तावत्, अपि, एव)Answerवर्षशतैः अपि निष्कृतिः न कर्तुं शक्या।View full question & answer→
Question 51 Mark‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ कर्म करिष्यसि। तादृशं फलं प्राप्स्यसि। (यथा, नित्यं, यादृशम्)Answerयादशम् कर्म करिष्यसि। तादृशं फलं प्राप्स्यसि।View full question & answer→
Question 61 Markतयोः ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ प्रियं कुर्यात्। (यथा, नित्यं, यादृशम्)Answerतयोः नित्यं प्रियं कुर्यात्।View full question & answer→
Question 71 Markमनुष्यः मातापित्रो: आचार्यस्यय च सर्वदा ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ कुर्यात्। (प्रियम् / अप्रियम् / अकार्यम्)Answerमनुष्यः मातापित्रो: आचार्यस्यय च सर्वदा प्रियम् कुर्यात्।View full question & answer→
Question 81 Markदृष्टिपूतम् न्यसेत् ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾। (हस्तम् / पादम् / मुखम्)Answerदृष्टिपूतम् न्यसेत् पादम्।View full question & answer→
Question 91 Markएतत् विद्यात् ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ लक्षणं सुखदुःपयो:। (शरीरेण!समासेन / विस्तारेण)Answerएतत् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःपयो:।View full question & answer→
Question 101 Markत्रिषु तुष्टेषु ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ सर्वं समाप्यते (जप: / तप / कर्म)।Answerत्रिषु तुष्टेषु तपः सर्वं समाप्यते। View full question & answer→
Question 111 Markनित्यं वृद्धोपसेविनः ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ वर्धन्ते (चत्वारि / पञ्च/षट्)।Answerनित्यं वृद्धोपसेविनः चत्वारि वर्धन्ते। View full question & answer→
Question 121 Markमातापित्रे: तपसः निष्कृतिः ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ कर्तुमशक्या। (दशवर्षैरपि / षष्टि; वर्षेरपि / वर्षशतैरपि)।Answerमातापित्रे: तपसः निष्कृतिः वर्षशतैरपि कर्तुमशक्या। View full question & answer→