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पत्र लेखन(5M)

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Question 15 Marks
विदेश में रहने वाले अपने मित्र को भारतीय पर्वों की विशेषताएँ बताते हुए लगभग 120 शब्दों में पत्र लिखिए।
Answer
परीक्षा भवन,
दिल्ली।
दिनांक : 03 मई, 2022
प्रिय मित्र गोविंद,
सस्नेह नमस्कार!
कल ही तुम्हारा पत्र मिला। पढ़कर एक नई जानकारी प्राप्त हुई। तुमने ऑस्ट्रेलिया में मनाए जाने वाले त्योहारों का बड़ा ही सुदरं वर्णन किया है। अब मैं इस पत्र में भारतीय त्योहारों के विषय में लिख रहा हूँ। भारत त्योहारों का देश है जिनमें दीवाली, दशहरा, होली, रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, लोहड़ी, करवाचौथ, बसंत पंचमी, बैसाखी, 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर, 14 नवंबर आदि प्रमुख हैं। पर इसके अतिरिक्त भी यहाँ बहुत-से त्योहार मनाए जाते हैं। दीवाली अज्ञान पर ज्ञान की विजय, दशहरा असत्य पर सत्य की जीत, होली में सभी पुराने बैरों को भूलकर एक दूसरे से गले मिलते हैं। हर त्योहार भारतीय बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं। दीवाली दीपों का त्योहार है, दशहरा मेलों का त्योहार तथा होली रंगों का त्योहार है। मित्र, इस पत्र में इतनी जानकारी पर्याप्त है। शेष अगले पत्र में लिखूगाँ। अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना तथा छोटे भाई को प्यार देना।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
पंकज
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Question 25 Marks
उत्तराखण्ड आपदा में स्वयं भोगी कठिनाइयों का वर्णन करने हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।
Answer
ग्राम पोस्ट -पटना, बिहार
२४ मार्च २०१९
प्रिय मित्र गोविन्द
सस्नेह नमस्कार
आशा है आप सपरिवार सकुशल होंगे। हमारा तुम्हारा बहुत दिनों से संपर्क नहीं था किन्तु मैं तुम्हें अपने साथ घटी एक दुर्घटना के विषय में बताना चाहता हूँ कि अभी पिछले वर्ष मैं अपने माता-पिता के साथ चार धाम की यात्रा पर गया था और उत्तराखण्ड में जो भयंकर त्रासदी हुई उसका भोक्ता बना। मैं माता-पिता के साथ केदारनाथ धाम पहुँचा ही था कि 16 जून को बादल फट जाने से उत्तराखण्ड की नदियों में भयंकर जल प्लावन हो उठा और उसने पूरे क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया मैं तो ईश्वर की कृपा और स्थानीय लोगों की सहायता से माता-पिता के साथ सकुशल बच गया। ऐसी विषम परिस्थितियों में पुजारी जी ने मुझे अपने घर ठहराया था इसलिए प्राण रक्षा हो गयी। बाद में जो भयंकर त्रासदी टीवी, समाचार पत्रों में देखी-पढ़ी उससे तो यही प्रतीत हुआ कि हम सच में भाग्यशाली ही थे जो बच पाए हैं।
दो दिनों तक मैं वहीं फँसा रहा क्योंकि वापस आने के सारे रास्ते बन्द हो चुके थे। किन्तु सरकार ने तत्परता दिखाई और उस त्रासदी में फँसे लोगों के लिए राहत कार्य शुरू कर दिया तभी सेना का हेलीकाप्टर वहाँ पहुँचा तब उसकी सहायता से हम तीनों बच पाए और देहरादून तक आ सके। वहाँ से मुझे अपने नगर के लिए रेल मिल गई और मैं सकुशल घर आ गया किन्तु कई दिनों तक मैं वहाँ के दृश्य नहीं भूल पाया।
हम जब मिलेंगे तब विस्तार से चर्चा होगी और मैं तुम्हें अपना अनुभव बताऊँगा। शेष फिर-
आपका मित्र
राहुल
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