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लेखन question types

23 questions across 4 question groups — pick any mix to generate a हिन्दी paper with step-by-step answer keys.

23
Questions
4
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5
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Sample Questions

लेखन questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

Q 1कहानी5 Marks
एक गधा - दूर से आते हुए भेड़िए को देखना - भयभीत होना - तरकीब - लँगड़ाकर चलना - भेड़िए का कारण पूछना - "पिछले पैर में काँटा चुभ गया है" - भेड़िए की झूठी - हमदर्दी शिकार के इरादे से काँटा निकालने का प्रयास - गधे का लात मारना - भेड़िए का बेहोश होना - गधे का भाग जाना।
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Q 2कहानी5 Marks
एक राजा - लड़ाई में हारना शत्रु का भय - गुफा में छिपना - छत पर मकड़ी का चढ़ना-गिरना - फिर चढ़ना-गिरना - अंत में सफलता - राजा को प्रेरणा - साहस जुटाना - विजय प्राप्त करना - सीख।
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Q 3कहानी5 Marks
एक लड़का - रेललाइन के किनारे-किनारे जाना - एक जगह रेल की पटरी उखड़ी हुई देखना - गाड़ी के पटरी से उतरने की आशंका - दूर से आती हुई गाड़ी दिखाई देना - निर्णय - अपना लाल कमीज हाथ में लेकर लहराना - लाल झंडी की तरह फहराना - रेलगाड़ी का रुकना, भीषण दुर्घटना टलना - लड़के को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करना - सीख ।
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Q 4कहानी5 Marks
एक भिखारी - एक धनी आदमी से भीख माँगना - कारण पूछना भिखारी - का उत्तर पाँच हजार रुपये में भिखारी से उसके हाथ मांगना - भिखारी का निकम्मा हो जाने की बात कहना - "निकम्मे तो तुम अभी भी हो।" - भिखारी को बात लगना - भीख न माँगने की कसम खाना - धनी आदमी का उसे बूट पालिश का सामान दिलाना - सीख।
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Q 5कहानी5 Marks
एक चरवाहा - जंगल में बकरियाँ चराने जाना - एक बकरी का दूर चले जाना - भेड़िए का आना - बकरी को खाने की इच्छा - बकरी का गाना गाने की इच्छा - में-में करना - आवाज सुनकर चरवाहे का लाठी लेकर आना - भेड़िए का भाग जाना - बकरी की जान बचना - सीख।
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Q 7पत्र :5 Marks
आपने किए हुए एक दिवसीय प्रवास का वर्णन करता हुआ पत्र अपने मित्र / सखी को लिखिए।
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Q 8पत्र :5 Marks
'खेल का महत्त्व' समझाते हुए अपने मित्र / सखी को पत्र लिखिए।
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Q 9पत्र :5 Marks
वृक्षों का फायदा समझाते हुए अपने मित्र / सखी को पत्र लिखिए।
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गीता जीवन की कला सिखाती है। जब मैं देखता हूँ कि हमारा समाज आज हमारी संस्कृति के मौलिक सिद्धांतों की अवहेलना करता है, तब मेरा हृदय फटता है। आप चाहे जहाँ जाएँ, परंतु संस्कृति के मौलिक सिद्धांतों को सदैव साथ रखें। संसार के सारे सुख क्षणभंगुर एवं अस्थायी होते हैं। वास्तविक सुख हमारी आत्मा में ही है। चरित्र नष्ट होने से मनुष्य का सबकुछ नष्ट हो जाता है। संसार के राज्य पर विजयी होने पर भी आत्मा की हार सबसे बड़ी हार है। यही है हमारी संस्कृति का सार, जो अभ्यास द्वारा सुगम बनाकर कार्यरूप में परिणत किया जा सकता है।
प्रश्न:
(1) लेखक का हृदय कब फटता है?
(2) संसार के सारे सुख कैसे होते हैं?
(3) मनुष्य का सबकुछ कब नष्ट हो जाता है?
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आप शुद्ध हृदय से इस बात पर विचार करें कि माता, मातृभूमि और मातृभाषा का आप पर भी ऋण है। एक जननी आपको जन्म देती है, एक की गोद में खेल-कूदकर और खा-पीकर आप पुष्ट होते हैं और एक आपको अपने भावों को प्रकट करने की शक्ति देकर आपके सांसारिक जीवन को सुखमय बनाती है, जिसका आप पर इतना उपकार है, उसके लिए कुछ करना क्या आपका परम कर्तव्य नहीं है?
प्यारे भाइयो उठो ! आलस्य छोड़ो, काम करो और अपनी मातृभाषा की सेवा में तत्पर हो जाओ, इस व्रत का पालन करना तलवार की धार पर चलने के समान है।
अत्यंत खेद का विषय है कि आज अधिकांश भारतवासी अपनी मातृभाषा की उपेक्षा करते हैं। वे अंग्रेजी बोलकर अपने अहंकार तथा दूषित मनोवृत्ति का परिचय देते हैं। जो अपनी मातृभाषा का तिरस्कार करता है, उसे कभी देशभक्त नहीं कहा जा सकता।
प्रश्न :
(1) हम पर किस-किस का ऋण है?
(2) माता का ऋण हमें क्यों अदा करना चाहिए?
(3) किसे देशभक्त नहीं कहा जा सकता ?
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मानव के व्यक्तित्व का निर्माण करनेवाले विभिन्न तत्त्वों में चरित्र का सबसे अधिक महत्त्व है। चरित्र एक ऐसी शक्ति है जो मानवजीवन को सफल बनाती है। चरित्र की शक्ति ही आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता उत्पन्न करती है। चरित्र मनुष्य के क्रियाकलाप और आचरण के समूह का नाम है। चरित्ररूपी शक्ति के सामने पाशविक शक्ति भी नष्ट हो जाती है। चरित्र की शक्ति विद्या, बुद्धि और संपत्ति से भी महान होती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि कई चक्रवर्ती सम्राट धन, पद, वस्तु के स्वामी थे, परंतु चरित्र के अभाव में अस्तित्वविहीन हो गए।
प्रश्न :
(1) चरित्र किसे कहते हैं?
(2) मानवजीवन पर चरित्र का क्या असर पड़ता है?
(3) इस परिच्छेद के लिए उचित शीर्षक दीजिए।
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बापू का स्पष्ट मत था कि स्वर्ग का राज्य बच्चों के लिए है, बच्चों के सिवा उसमें कोई प्रवेश नहीं कर पाता, क्योंकि बच्चे निर्दोष हुआ करते हैं। उनके जैसा छलरहित, निष्पाप और भोला-भाला संसार में दूसरा कोई नहीं। अगर किसी बच्चे में अवगुण हैं, कोई बुराई है तो यह उसका दोष नहीं, उसके आसपास रहनेवाले व्यक्तियों का दोष है, क्योंकि बच्चा जो कुछ सीखता है अपने आसपास के वातावरण से ही सीखता है। बच्चों को पीटना बापू की दृष्टि में एक महापाप है। कारण कोई भी हो, कैसा भी अपराध हो गया हो, भय दिखाकर या मार-पीटकर बच्चे के साथ दुर्व्यवहार करना कभी उचित नहीं। बच्चों की गलतियों को उन्हें प्रेम-स्नेह से समझा देना चाहिए। ऐसा करने से उनमें सुधार हो जाता है।
प्रश्न :
(1) बापू की दृष्टि से क्या करना महापाप है?
(2) बापू बच्चों के सुधार के लिए कौन-सा मार्ग बताते हैं?
(3) बापू के मतानुसार बच्चे किसके अधिकारी हैं? क्यों?
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