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Question 15 Marks
किसान $-$ चार बेटे $-$ चारो आलसी $-$ किसान का बुढापा $-$ बेटों की चिता $-$ मरते समय कहा $-$ मैंने खेत में धन का कलश रखा हैं $-$ चारों बेटों ने खेत को खोद डाला $-$ कुछ न मिला $-$ निराश होकर खेत में काम करना $-$ अच्छी फसल $-$ बोध।
Answer
परिश्रम का फल
कोई एक किसान था |वह बुढाथा |उसके चार लड़के थे,लेकिन वे सभी आलसी थे | किसान के पास अधिक जीवन थी, पहले वह उस जमीन में अच्छा अनाज पैदा करता था लेकिन अब उस भूमि का उपजाठपन घट गया था, क्योंकि उनके बेटे खेती में रुचि नहीं रखते थे इससे किसान को अधिक चिन्ता होती थी।
एक दिन वह बूढा बीमार हुआ। वह मृत्यु शय्या पर था, तब उसने अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा, "मैंने सोने का एक घड़ा अपने खेत में गाड़ रखा है, मेरे अवसान के बाद जमीन खोदकर उसे निकालना।"
थोडे दिनों के बाद वह बूढा किसान चल बसा। पिता के मरने के बाद लडकों को सोने के घड़े की चिंता सताती रही। खेत में घड़े की निश्चित जगह का पता नहीं था इसलिए उन्होंने धीरे धीरे सारा खेत खोद डाला। लेकिन उन्हें कहीं भी वह घडा न मिला। वे अपने पिता को कोसने लगे।
उन्होंने अपने खेत में गेहूं बोये । गेहूं की फसल इस वक्त बहुत अच्छी हुई। पोधे पर खूब दाने आए। गेहूँ के दाने का ढेर देखकर लड़कों को पिता की बात का रहस्य मालूम हुआ। गेहूँ के दाने सोने की तरह चमक रहे थे | सोने के घडे के लालच में उन्होंने खेत की गहरी खुदाई की थी जिससे उपजाऊ मिट्टी उपर आ गई थी और इससे सोने की फसल हुई थी। अब चारों लडकों को परिश्रम का मूल्य समझ में आया | उन्होंने खेती करनेका और खेत में ध्यान रखने का निश्चय कर लिया।
सीख : परिश्रम ही सच्चा सोना है, परिश्रम से ही समृद्धि मिलती है। आलसी व्यक्ति को व्यक्ति से राह पर लायां जा सकता है।
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Question 25 Marks
एक लोभी धूर्त व्यापारी $-$ गरीब ग्राहक $-$ दुकानदार का तोलना $-$ ग्राहक का असंतोष $-$ सही तौल की मांग $–$ दूकानदार का प्रत्युत्तर $-$ अधिक उठाना नहीं पड़ेगा $-$ ग्राहक के द्वारा कम पैसा देना $-$ पूरे पैसे की मांग $-$ ज्यादा गिनना नहीं  $-$ पड़ेगा ग्राहक का जवाब।
Answer
जैसे को तैसा
एक गाँव में एक व्यापारी रहता था। वह जीवन के आवश्यक सभी चीजवस्तु बेचता था। उसकी दुकान अच्छी चलती थी। वह व्यापारी लोभी और धूर्त था। वह कीमत ज्यादा लेता था और वस्तु कम तौलता था। इस तरह से वह दोनों तरफ से लोगों को दोनों हाथों से लुटाता रहता था। गांव में दूसरी कोई दुकान थी ही नहीं, तो लाचार ग्राहक भला जाये तो कहाँ $?$ दूकानदार के प्रति सब को असंतोष था। फिर भी लाचार बनकर मन मारकर लुटाने वहीं आते थे।
एक दिन एक गरीब किसान दो किलो चावल लेने आया। भावताल पूछा, कुछ रिकजिक भी किया। परंतु वह लाचार था, जाता तो कहा जाता $?$ चावल तोल देने के लिए दुकानदार से कहा। वह व्यापारी डांडी मारने में बड़ा उस्ताद था | वह अपने स्वभाव के अनुसार डांडी मार बैठा। उसने दूकानदार से आग्रह किया कि फिर से मेरे सामने तौलो, नहीं तो लाओ मैं तुम्हारे सामने तौलता हूँ। वह व्यापारी ने हंसते हुए बड़ी बेरहमी से जवाब दिया कि इससे तुम्हें तो फायदा ही होगा कि कम उठाना पड़ेगा। धूर्तता की भी एक सीमा होती है | वह बेचारा ग्राहक सहम सा हो गया | कुछ सोचकर चावल की थैली उठा ली तथा जेब से कुछ कम पैसे निकालकर उस व्यापारी के हाथ में दे मारा।
पैसे गिनकर व्यापारी बोला 'अरे ! क्या तुझे पैसे गिनने नहीं आते $?$' गरीब ने बड़ी स्वास्थ्य पूर्वक जवाब दिया, 'थोड़ा कम पैसा लोगे तो फायदा ही होगा, आपको कम पैसे गिनने पड़ेंगे।' ऐसा कहते बिन्दास चल पड़ा। व्यापारी को भान हुआ कि दुनिया में शेर के उपर सवा शेर होता है।
बोध : जैसे के साथ तैसा। सामने वाला व्यक्ति हमारे साथ जैसा व्यवहार करें वैसा ही व्यवहार हमें उसके साथ करना चाहिए।
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Question 35 Marks
सज्जन का गुणवान पुत्र$-$ बुरी संगत $-$ पिता को दुःख उपदेश व्यर्थ $-$ बाजार से अच्छे, आम खरीदना $-$ पुत्र को बुलाना $-$ उन आमों में एक सड़ा आम रखने के लिए कहना$-$ दूसरे दिन खाने की आज्ञा$-$सभी आम सडे हुए $-$ पुत्र पर असर $–$ सीख |
Answer
संगति का फल
आणंद में एक सज्जन रहते थे। उनका पुत्र बडा गुणवान था किन्तु कुछ दिनों से वह बुरी संगति में फंस गया था। धीरे धीरे वह पढाई की और से लापरवाह हो गया | उसके माता पिता पुत्र की यह दशा देखकर बहुत चिंतित हुए उनके उपदेशों का उस पर कोई असर न हुआ।
एक दिन उसके पिता बाजार से कुछ आम ले आये। अपने पुत्र को बुलाकर उन्होंने कहा, "बेटा, इन आमों को एक टोकरी रख दो और देखो, यह आम सडा आम है। इसे भी इन आमो के बीच में रख दो। कल हम इन्हें खाएंगे।" पुत्र की समझ में यह बात नहीं आई कि उसके पिता उसे सड़ा आम टोकरी में रखने के लिए क्यों कह रहे हैं। फिर भी उसने पिता की आज्ञानुसार आमों की टोकरी में उस सड़े आम को भी रख दिया। दूसरे दिन पिता ने पुत्र से कहा, "बेटा, जरा वह आमकी टोकरी ले आ।" पुत्र आम की टोकरी के पास गया तो देखा कि सब आम सड़ गए थे। उसने कहा, "पिताजी ये सभी आम सड़ गए थे । उस सड़े आम ने सब आमों को सड़ा दिया।"
पिताजी ने तुरन्त कहा, "हां, बेटा ! देखो, एक सड़े आम की संगति से अच्छे आम भी सड़ गये। फिर तू तो न जाने कितने खराब लड़को की संगति में रहता है। क्या तेरा जीवन भी इन "आमों की तरफ बरबाद नहीं होगा?"
पिता की बात पुत्र की समझ में आ गई। उसने पिताजी से क्षमा मांगी और उसी दिन से उसने बुरे साथियों को छोड दिया।
सीख : बुरी संगति का फल बुरा होता है। उससे सदा बचना चाहिए। बुरी संगत नहीं करनी चाहिए।
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Question 45 Marks
एक विधार्थी $-$ मंदबुद्धि होना $-$ माता$-$पिता निराश $-$ शिक्षक का समझना $-$ ध्यान न देना $-$ परिणाम$-$ अनुत्तीर्ण $-$ निराश   होकर आत्महत्या करने चल पड़ना $-$ मार्ग में कुआ $-$ स्त्रियों को पानी भरते हुए देखना $-$ कुएं के पत्थरो पर गहरे निशान $-$ स्त्रियों से कारण पूछना $-$ रस्सी के निशान $-$ बोध होना $-$ अभ्यास में जुट जाना $-$ बड़ा विद्वान बनना $-$ सिख |
Answer
कठोर परिश्रम का फल
एक गांव था। उस गाँव में एक शाला थी। उसमें एक लड़का पढ़ता था। वह पांचवी कक्षा में पढ़ता था। वह मंदबुद्धिवाला था। उसे कुछ भी याद नहीं रहता था एक ही कक्षा में वह दो बार फैल हुआ। सहपाठी उसको छेड़ते। उसकी मजाक उड़ाते।
वह स्वस्थ और हुष्टपुष्ट था। देखने में अच्छा था। सुशील था। लेकिन पढाई में कमजोर था। शिक्षकों ने भी बहुत समझाया लेकिन कोई असर न हुआ। वह तीसरी दफा एक ही कक्षा में फैल होता है। इससे वह बहुत निराश हो गया। वह जंगल में आत्महत्या करने के लिए जाता है। रास्ते में उसने एक कुआँ देखा। कुए पर कुछ स्त्रियां पानी भर रही थी। उसको भी प्यास लगी थी, इसलिए वह लडका पानी पीने के लिए कुों के पास गया।
पानी पीते पीते उस लडके का ध्यान अचानक कुएँ के पत्थरों पर बने गहरे निशानों पर गया। उसने उस स्त्री से उन निशानों के बनने का कारण पूछा, स्त्री ने कहा, "रस्सी की मदद से हम रोज इस कुएँ से पानी भरते हैं। रस्सी की बार बार रगड़ से इन पत्थरों पर ये निशान बन गए हैं।"
उस स्त्री के उन शब्दों से उसकी आँखे खुल गई। उसने सोचा जब रस्सी की बार $-$ बार की रगड़ से कठोर पत्थरों पर भी निशान बन सकते हैं, तो बार$-$बार याद करने से मुझे भी पाठ याद हो सकता है | यह बोध होते ही वह घर की तरफ लौट पड़ा।
उस दिन से वह अभ्यास में मन लगाकर जुट गया। फिर कभी उसने असफलता का मुंह नहीं देखा । उसने ऊँची शिक्षा प्राप्त की। एक दिन उसकी गिनती देश के बड़े विद्वानों में होने लगी।
करत$-$करत अभ्यास ते जडमति होत सुजान ।
रसरी आवत$-$जात से, सिल पर परत निशान ॥
बोध :लगन ओर महेनत से जुट जाने पर असंभव काम भी संभव हो जाता है ओर सफलता के द्वार खुल जाते है |
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Question 55 Marks
बंदर और मगर में भिन्नता $-$ बंदर का मगर को जामुन खिलाना $-$ कुछ जामुन मगरी के पास ले जाना $-$ मगरी के द्वारा बंदर का कलेजा मांगा $–$ बंदर का नदी में पानी पीना $-$ मगर का पकड़ना $-$ कारण पूछना $-$ मगर का कारण बताना $-$ बंदर का उपाय सोचना $-$ मेरा कलेजा तो वृक्ष पर है $-$ भागना $-$ सीख।
Answer
बंदर की चतुराई
एक नदी थी। वहां पानी पीने के लिए एक बन्दर प्रतिदिन आता था। उस नदी में एक मगर रहता था। मगर के साथ बंदर की मित्रता हो गई नदी के किनारे एक जामुन का पेड़ था। बंदर अपने मित्र मगर को रोज पके हुए जामुन खिलाया करता था। एक दिन मगर कुछ जामुन मगरी के लिए ले गया और अपने दोस्त बंदर का परिचय दिया। मीठे जामुन खाकर मगरी ने मन में सोचा कि रोज रोज मीठे जामुन खानेवाले बंदर का कलेजा काफी मीठा होगा। इसलिए किसी भी तरह उसका कलेजा खाना चाहिए।
उसने एक दिन मगर से अपने मन की बात कही। अब मगर बंदर को पकड़ने का मौका देखने लगा। एक दिन बंदर नदी में पानी पी रहा था कि अचानक मगरने उसे पकड़ लिया। बंदर को लेकर मगर पानी में घुस गया। बंदरने मगर से पूछा कि तुम
मुझे कहाँ ले जा रहे हो?
मगर ने कहा, "मेरी पत्नी तुम्हारा मीठा कलेजा खाना चाहती है। सुना है, वह बहुत मीठा होता है।"मगर से बचने के लिए बंदर को एक उपाय सूझा। उसने कहा, "दोस्त ! मुझे अफसोस है कि मैं भाभी को अपना मीठा कलेजा नहीं खिला सकुगा| वह तो पेड़ पर रखा हुआ है। मुझे पेड़ पर जाने दो। मैं अभी ले आता हूं ।"
मूर्ख मगर ने बंदर की बात पर विश्वास कर लिया। उसने बंदर को किनारे पर लाकर छोड़ दिया। बंदर लंबी छलांग मारता हुआ दूर भाग गया यह फिर कभी उस ओर नहीं आया ।
बोध: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि धोखेबाज मित्रों से हमेशा सावधान रहना चाहिए।
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Question 65 Marks
एकजंगल $-$ पेड़ के ननीचे सिंह का सोना $-$ पास में चूहों की दौड़$-$धूप $-$ सिंह का जाग जाना $-$ गुस्सा करना $-$ एक चूहे को पकड़ना $-$ चूहे द्वारा दया की भीख मांगना $-$ सिंह को मदद करने का वादा $-$ सिंह का हंसना $-$ चूहे का छुटकारा $-$ एक शिकारी द्वारा जाल फैलाना $-$ सिंह का जाल में फंसना दहाड़ मारना $-$ उस चूहे का आना $-$ जाल को कुतरकर सिंह को मुक्त करना $-$ सीख;
Answer
सिंह और चूहा
एक जंगल में एक सिंह रहता था। एक दिन वह एक पेड़ की शीतल छाया में सो रहा था। पेड़ के पास ही एक बिल में कुछ चूहे रहते थे। सिंह को सोता हुआ देखकर चूहे बिल में से निकले और इधर$-$उधर दौड़$-$धूप करने लगे। कुछ तो सिंह के शरीर पर भी दौड़ने लगे। इससे सिंह की नींद टूट गई। उसे चूहों पर बहुत गुस्सा आया।
सिंह के जाग जाने पर चूहे डर के मारे बिल में घुस गए। लेकिन एक चूहा सिंह की पकड़ में आ गया। सिंह का गुस्सा देखकर वह चूहा डर से कांपने लगा। उसने सिंह से कहा, "वनराज, क्षमा कीजिए। अब मैं कभी आपको परेशान नहीं करूंगा। मुझे छोड़ दीजिए। कभी मैं आपके काम आऊँगा।" एक छोटे $-$ से चूहे की ऐसी बात सुनकर सिंह को हंसी$-$ आ गई । उसने चूहे को छोड़ दिया। कुछ दिनों बाद एक शिकारी उस जंगल में शिकार करने आया। संयोग से वही सिंह उसकी जाल में फंस गया। सिंह जाल से छूटने के लिए बहुत कोशिश की, पर वह सफल नहीं हुआ। हताशा और क्रोध के कारण वह जोर$-$जोर से दहाढने लगा। उस चूहे ने सिंह की दहाड़ सुनी। वह फौरन सिंह के पास पहुंच गया। उसने अपने पैने दांतों से जाल को कुतरकर सिंह को मुक्त कर दिया। सिंह ने उस चूहे का आभार माना।
बोध : किसी भी व्यक्ति को कभी तुच्छ नहीं समझना चाहिए। वक्त आने पर छोटा प्राणी भी बड़ा काम कर सकता है।
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Question 75 Marks
जंगल में एक डाकू $-$ लोगों के सिर काट लेना $-$ एक महात्मा का जंगल से गुजरना $-$ डाकू का उन्हें मारने के लिए आना $-$ महात्मा का मुस्कराकर उस डाकू का स्वागत करना $-$ डाकू का रुक जाना $-$ महात्मा को डाकू से सामनेवाले पेड़ की टहनी तोड़ लाने के लिए कहना $-$ टहनी तोड़कर लाना $-$ टहनी को फिर इसी जगह जोड़ने के लिए कहना $–$ असंभव $-$फिर सिर क्यों काटते हो ?" $–$ 
Answer
सीख ; तोड़ो नहीं, जोड़ो
पुराने समय की बात है। किसी जंगल में एक खूंखार डाकू रहता था। वह जंगल से गुजरनेवाले लोगों के सिर काट लेता था। उसके भय से लोग उस जंगल से जाने में डरते थे। एक बार एक महात्मा उस जंगल से जा रहे थे | वे बहुत निर्भय स्वभाव के थे उस डाकू ने उन्हें देखा। वह तलवार लेकर उन्हें मारने दौड़ा। वह महात्मा के पास पहुंचा, तो महात्मा ने मुस्कराकर उसका स्वागत किया। महात्मा की मुस्कराहट में न जाने क्या जादू था कि डाकू को उन्हें मारने का साहस न हुआ। फिर महात्मा ने डाकू से कहा, "जाओ, जरा सामनेवाले पेड़ से एक टहनी तोड़ लाओ।" डाकू फौरन सामने के पेड़ से एक टहनी तोड़ लाया। महात्मा ने कहा, "अब उसे टहनी को पेड़ में उसी जगह फिर से जोड़ आओ।"
डाकू बोला, "यह असंभव है। टूटी हुई टहनी क्या फिर पेड़ से जुड़ सकती है?" तब महात्मा ने उसे समझाया, "क्या कटा हुआ सिर फिर घड़ से जुड़ सकता है ? जब तुम किसी सिर को धड़ से जोड़ नही सकते, तो फिर तुम्हें लोगों के सिर काटने का क्या अधिकार है?"
डाकू की आँखे खूल गई। वह महात्मा के चरणो पर गिर पड़ा। वह हिंसा का रास्ता छोड़कर उनका शिष्य बन गया।
बोध : हम तोड़ने का नहीं, जोड़ने का काम करें।
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Question 85 Marks
नदी के किनारे एक पेड़ $–$ उस पर कौए का एक जोड़ा $-$ बिल में एक सांप $-$ सांप का कौए के बच्चों को खा जाना $-$ कौए की लाचारी $–$ नदी पर सत्रान के लिए राजकुमारी का आगमन $-$ सोने का हार उतारकर किनारे पर रखना $-$कौए का हार उठाकर साप के बिल के पास रख देना $-$  सेवकों का हार ढूढना $-$ सांप के बिल के पास हार देखना $-$  सांप को लाठी से मार डालना $-$ नर$-$भादा कौए का खुश होना $-$ सीख।
Answer
ताकत से अकल बड़ी
सरस्वती नदी के किनारे बरगद का एक पेड़ था। उस पर कौए का एक जोड़ा रहता था। पेड़ के पास बिल में एक विषैला सांप रहता था | कौए का जोड़ा जब आहार को तलाश में बाहर जाता तब सांप उनके बच्चों को खा जाता था। इससे कौए का जोड़ा बहुत दुखी था, लेकिन उस सांप के सामने वह लाचार था।
एक बार चंद्रपुर की राजकुमारी अपनी सखियों और कुछ सेवकों के साथ उस नदी पर स्नान करने आई उसने अपनी अन्य चीजों के साथ अपना सोने का हार भी किनारे पर रख दिया। वह सखियों के साथ स्नान करने के लिए नदी में उतरी राजकुमारी के सोने के हार पर कौए की नजर पड़ी। उसे एक युक्ति सूझी। उसने तुरंत हार उठाकर सांप के बिल के पास रख दिया|
राजकुमारी स्रान करके नदी से बहार आई। किनारे पर अपना स्वर्णहार न पाकर वह चीख पड़ी। उसने अपने सेवकों को बुलाया और हार ढूंढ़ लाने का आदेश दिया।
सेवक हार ढूंढने में लग गए। अचानक वह हार उन्हें साप के बिल के पास पड़ा दिखाई दिया। हार के पास ही एक विषैला साँप कुंडली मारकर बैठा हुआ था उन्होंने लाठियों से सांप को मार डाला और हार ले जाकर राजकुमारी को सौंप दिया। राजकुमारी अपना हार पाकर खुश हो गई। इस प्रकार कौए ने बड़ी युक्ति से अपने दुश्मन सांप से छुटकारा पा लिया।
बोध : जो काम ताकत से नहीं हो सकता, वह बुद्धि और चतुराई से हो सकता है।
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Question 95 Marks
एक कमजोर लड़का $-$ परीक्षा में असफल रहना $-$ निराशा $-$ आत्महत्या करने जंगल में जाना $-$पेड़ पर मकडी के बार बार चढ़ने का फल करते देखना $-$ सफलता का मार्ग मिलना $-$ वापस लौटना $-$ ध्यान से पढ़ना $-$ सफल होना बोध ।
Answer
सफलता की चाबी
नरेश नामक एक विधार्थी आणंद की डी.एन.हाई स्कूल में पढ़ने जाता था। वह नौवीं कक्षा में पढ़ता था। वह पढ़ने बहुत कमजोर था। यह पढ़ने के बदले मित्रों के साथ गप$-$सप करने में और व्यर्थ बातें करने में समय बीताता था। उसके, भाई$-$बहन तथा पड़ोस के सभी लड़के अच्छे अंको से उत्तीर्ण होते थे।
वार्षिक परीक्षा समाप्त हो गई। नरेश नौवीं कक्षामें दुबारा अनुत्तीर्ण हुआ तो उसे बहुत शर्मिन्दा होना पड़ा। बहुत दुःख हुआ उसका दिल भी टूट गया। वह घर जाने में भी गभराया । उसे संकोच भी हुआ। उसने सोचा कि अब मैं क्या मुंह लेकर घर पहुँच जाऊँ $?$ मेरे लिए मर जाना अच्छा है।
नरेश ने आत्महत्या करने का निश्चय कर लिया। आत्महत्या करने के लिए जंगल का रास्ता पकड़ा। मन उदास था। रास्ते में चलते$-$चलते उसकी दृष्टि एक मकड़ी पर पड़ी। मकड़ी पेड पर चढने के लिए प्रयत्न कर रही थी। वह बार बार नीचे गिरती थी और फिर ऊपर चढती थी। बारबार प्रयत्न करने पर उसे सफलता मिली। वह पेड़ की डाल पर पहुँच गई।
मकड़ी की सफलता देखकर नरेश की निराशा चली गई। वह सोचने लगा, 'जब छोटी$-$सी मकड़ी अपने प्रयत्न करने में सफल होती हो तो मैं क्यों नहीं हो सकता। मैं तो मनुष्य$-$हूँ। मैं मकड़ी से ज्यादा बुद्धिमान हूँ। प्रयत्न करने पर मुझे जरुर सफलता मिलेगी। असफलता से शर्मिन्दा तथा निराश नहीं होना चाहिए।
मकड़ी से नरेश को नयाजीवन मिला। नया मार्ग दिखाया। वह घर लौट आया। अपने माता$-$पिता की माफी मागू । नये वर्ष से पूरा ध्यान लगाकर पढ़ने लगा। वार्षिक परीक्षा में उसे अवश्य सफलता मिली। वह अच्छे अंको में उत्तीर्ण हुआ।
सीख : मेहनत और लगन से काम करने से अवश्य सफलता मिलती है। सफलता मिलने पर निराश नहीं होना चाहिए। असफलता ही सफलता की चाभी है |
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Question 105 Marks
एक तालाब $-$ बातूनी कछुआ और दो हंसों में मित्रता होना $-$ तालाब का सूखना $-$ दूसरे तालाब में जाने का विचार करना $-$ कछुए का उपाय बताना $-$ हंसों का कछुए को एक लकडी के सहारे लेकर उड़ना $-$ कछुए का अपने स्वभाव के अनुसार बोल पड़ना $-$ गिरना $-$ सीख ।
Answer
बातूनी कछुआ
एक तालाब था। उसमें एक कछुआ और दो हंस रहते थे। इन तीनों में गहरी दोस्ती थी। कछुआ बहुत बातूनी था। एक साल बरसात कम हुई। तालाब सूख गया। तीनों ने दूसरे तालाब में जाने का विचार किया। दोनों हंस तो उड़कर जा सकते थे, पर कछुआ कैसे जाता?
हंसो ने काफी विचार किया, पर उन्हें कोई उपाय न सूझा। अंत में कछुए ने कहा, "मैं उपाय बताता हूँ। तुम दोनों एकलकडी ले आओ। उसका एक $-$ एक सिरा तुम दोनों अपनी चोंच में पकड़ लेना। मैं लकडी को बीच से अपने मुंह से पकड लूंगा। इस तरह तुम मुझे अपने साथ दूसरे तालाब में ले जा सकोगे।"
हंसो ने कहा, "ठीक है, पर तुम रास्ते में बोलना मत । नहीं तो लकडी मुँह से छुट जाएगी और तुम नीचे गिर पडोगे।" कछुआ रास्ते में एक भी शब्द न बोलने के लिए राजी हो गया। अब दोनों हंस, कछुए को लेकर एक गाँव के उपर होकर उड रहे थे, तब गांव के लोग कहने लगे, "देखो, हंस कछुए को लिये जा रहे हैं। यदि कछुआ गिर गया, तो वह जरुर मर जाएगा | यह सुनकर कछुए से न रहा गया। उसने बोलने को मुह खोला ही था कि उसके मुंह से लकडी छूट गई | वह धड़ाम से जमीन पर आ गिरा।
बोध : सच्चे मित्र की सीख माननी चाहिए। बिना सोचे$-$समझे बोलने से हमें हानि होती है।
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