Question 15 Marks
किसान $-$ चार बेटे $-$ चारो आलसी $-$ किसान का बुढापा $-$ बेटों की चिता $-$ मरते समय कहा $-$ मैंने खेत में धन का कलश रखा हैं $-$ चारों बेटों ने खेत को खोद डाला $-$ कुछ न मिला $-$ निराश होकर खेत में काम करना $-$ अच्छी फसल $-$ बोध।
Answer
View full question & answer→परिश्रम का फल
कोई एक किसान था |वह बुढाथा |उसके चार लड़के थे,लेकिन वे सभी आलसी थे | किसान के पास अधिक जीवन थी, पहले वह उस जमीन में अच्छा अनाज पैदा करता था लेकिन अब उस भूमि का उपजाठपन घट गया था, क्योंकि उनके बेटे खेती में रुचि नहीं रखते थे इससे किसान को अधिक चिन्ता होती थी।
एक दिन वह बूढा बीमार हुआ। वह मृत्यु शय्या पर था, तब उसने अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा, "मैंने सोने का एक घड़ा अपने खेत में गाड़ रखा है, मेरे अवसान के बाद जमीन खोदकर उसे निकालना।"
थोडे दिनों के बाद वह बूढा किसान चल बसा। पिता के मरने के बाद लडकों को सोने के घड़े की चिंता सताती रही। खेत में घड़े की निश्चित जगह का पता नहीं था इसलिए उन्होंने धीरे धीरे सारा खेत खोद डाला। लेकिन उन्हें कहीं भी वह घडा न मिला। वे अपने पिता को कोसने लगे।
उन्होंने अपने खेत में गेहूं बोये । गेहूं की फसल इस वक्त बहुत अच्छी हुई। पोधे पर खूब दाने आए। गेहूँ के दाने का ढेर देखकर लड़कों को पिता की बात का रहस्य मालूम हुआ। गेहूँ के दाने सोने की तरह चमक रहे थे | सोने के घडे के लालच में उन्होंने खेत की गहरी खुदाई की थी जिससे उपजाऊ मिट्टी उपर आ गई थी और इससे सोने की फसल हुई थी। अब चारों लडकों को परिश्रम का मूल्य समझ में आया | उन्होंने खेती करनेका और खेत में ध्यान रखने का निश्चय कर लिया।
सीख : परिश्रम ही सच्चा सोना है, परिश्रम से ही समृद्धि मिलती है। आलसी व्यक्ति को व्यक्ति से राह पर लायां जा सकता है।
कोई एक किसान था |वह बुढाथा |उसके चार लड़के थे,लेकिन वे सभी आलसी थे | किसान के पास अधिक जीवन थी, पहले वह उस जमीन में अच्छा अनाज पैदा करता था लेकिन अब उस भूमि का उपजाठपन घट गया था, क्योंकि उनके बेटे खेती में रुचि नहीं रखते थे इससे किसान को अधिक चिन्ता होती थी।
एक दिन वह बूढा बीमार हुआ। वह मृत्यु शय्या पर था, तब उसने अपने बेटे को अपने पास बुलाया और कहा, "मैंने सोने का एक घड़ा अपने खेत में गाड़ रखा है, मेरे अवसान के बाद जमीन खोदकर उसे निकालना।"
थोडे दिनों के बाद वह बूढा किसान चल बसा। पिता के मरने के बाद लडकों को सोने के घड़े की चिंता सताती रही। खेत में घड़े की निश्चित जगह का पता नहीं था इसलिए उन्होंने धीरे धीरे सारा खेत खोद डाला। लेकिन उन्हें कहीं भी वह घडा न मिला। वे अपने पिता को कोसने लगे।
उन्होंने अपने खेत में गेहूं बोये । गेहूं की फसल इस वक्त बहुत अच्छी हुई। पोधे पर खूब दाने आए। गेहूँ के दाने का ढेर देखकर लड़कों को पिता की बात का रहस्य मालूम हुआ। गेहूँ के दाने सोने की तरह चमक रहे थे | सोने के घडे के लालच में उन्होंने खेत की गहरी खुदाई की थी जिससे उपजाऊ मिट्टी उपर आ गई थी और इससे सोने की फसल हुई थी। अब चारों लडकों को परिश्रम का मूल्य समझ में आया | उन्होंने खेती करनेका और खेत में ध्यान रखने का निश्चय कर लिया।
सीख : परिश्रम ही सच्चा सोना है, परिश्रम से ही समृद्धि मिलती है। आलसी व्यक्ति को व्यक्ति से राह पर लायां जा सकता है।