मैं नहीं जानता कि 'पढ़ाई में सुंदर लेखन आवश्यक नहीं है', यह गलत ख्याल मुझे कैसे हो गया था, पर ठेठ विलायत जाने तक यह बना रहा । बाद में और खास करके दक्षिण अफ्रीका में, जब मैंने वकीलों के तथा दक्षिण अफ्रीका में जन्मे और पढ़े-लिखे नवयुवकों के मोती के दानों जैसे अक्षर देखे, मैं शरमाया और पछताया । मैंने अनुभव किया कि खराब अक्षर अधूरी शिक्षा की निशानी मानी जानी चाहिए । बाद में मैंने अक्षर सुधारने का प्रयत्न किया, पर पक्के घड़े पर कहीं गला जुड़ता है ? जवानी में मैंने जिसकी उपेक्षा की, उसे मैं आज तक सुधार नहीं सका ।
प्रश्न :
$Q.1.$ गांधीजी को कौन-सा गलत ख्याल हो गया था ? वह कब तक जारी रहा ?
$Q.2.$ दक्षिण अफ्रीका के वकीलों और नवयुवकों के अक्षरों का गांधीजी पर क्या असर पड़ा था ?
$Q.3.$ गांधीजी प्रयत्न करने पर भी अपने अक्षर क्यों न सुधार सके ?
$Q.4.$ इस परिच्छेद के लिए एक उचित शीर्षक दीजिए ।
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$Q.1.$ गांधीजी को कौन-सा गलत ख्याल हो गया था ? वह कब तक जारी रहा ?
$Q.2.$ दक्षिण अफ्रीका के वकीलों और नवयुवकों के अक्षरों का गांधीजी पर क्या असर पड़ा था ?
$Q.3.$ गांधीजी प्रयत्न करने पर भी अपने अक्षर क्यों न सुधार सके ?
$Q.4.$ इस परिच्छेद के लिए एक उचित शीर्षक दीजिए ।