Question 14 Marks
आपने की हुई किसी यात्रा का वर्णन करते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।
Answer
View full question & answer→$14$, सद्गुरु सोसायटी,
भक्तिनगर,
अहमदाबाद – $380\ 007$.
$20$ नवंबर, $2013$
प्रिय मित्र आरुषि,
सप्रेम नमस्कार।आज सुबह ही तुम्हारा पत्र मिला। यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तुम्हारी माताजी अब पूरी तरह स्वस्थ हो गई हैं।
हम दस दिन पहले कश्मीर-दर्शन के लिए गए थे। दो दिन पहले ही वहाँ से लौटे हैं। पहले हम नैनीताल गए थे। उसके बारे में जैसा सुना था, वैसा ही पाया! उसकी परिक्रमा करने में सचमुच बड़ा मजा अया। हम नयनादेवी के दर्शन करने गए। देवी की सुंदर मूर्ति ऐसी लगी जैसे अभी बोल उठेगी।
फिर हम श्रीनगर गए। सचमुच सुंदर नगर है। हमने सारा नगर घूमकर देखा। डलझील की सुंदरता ने हमारा मन मोह लिया। उसमें हमने शिकारे में बैठकर जलविहार का आनंद लिया। वूलर और मानसबल झीलें भी हमें बहुत अच्छी लगी, लेकिन वे डल का मुकाबला तो नहीं कर सकतीं। श्रीनगर और पहलगाँव के बीच केसर की क्यारियों से आ रही खुशबू ने हमें मदमस्त कर दिया। शालीमार और निशातबाग में घूमते हुए हमें स्वर्ग के नंदनवन में घूमने के जैसा आनंद आया।
मैंने वहाँ के कई स्थानों के फोटो लिए हैं। कुछ फोटो तुम्हें भेज रहा हूँ।
शेष मिलने पर।
तुम्हारा मित्र,
आलोक।
भक्तिनगर,
अहमदाबाद – $380\ 007$.
$20$ नवंबर, $2013$
प्रिय मित्र आरुषि,
सप्रेम नमस्कार।आज सुबह ही तुम्हारा पत्र मिला। यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तुम्हारी माताजी अब पूरी तरह स्वस्थ हो गई हैं।
हम दस दिन पहले कश्मीर-दर्शन के लिए गए थे। दो दिन पहले ही वहाँ से लौटे हैं। पहले हम नैनीताल गए थे। उसके बारे में जैसा सुना था, वैसा ही पाया! उसकी परिक्रमा करने में सचमुच बड़ा मजा अया। हम नयनादेवी के दर्शन करने गए। देवी की सुंदर मूर्ति ऐसी लगी जैसे अभी बोल उठेगी।
फिर हम श्रीनगर गए। सचमुच सुंदर नगर है। हमने सारा नगर घूमकर देखा। डलझील की सुंदरता ने हमारा मन मोह लिया। उसमें हमने शिकारे में बैठकर जलविहार का आनंद लिया। वूलर और मानसबल झीलें भी हमें बहुत अच्छी लगी, लेकिन वे डल का मुकाबला तो नहीं कर सकतीं। श्रीनगर और पहलगाँव के बीच केसर की क्यारियों से आ रही खुशबू ने हमें मदमस्त कर दिया। शालीमार और निशातबाग में घूमते हुए हमें स्वर्ग के नंदनवन में घूमने के जैसा आनंद आया।
मैंने वहाँ के कई स्थानों के फोटो लिए हैं। कुछ फोटो तुम्हें भेज रहा हूँ।
शेष मिलने पर।
तुम्हारा मित्र,
आलोक।