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आशय स्पष्ट कीजिए :

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Question 13 Marks
दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय॥
Answer
दुःख में सब लोग भगवान को याद करते हैं, सुख में उसे कोई याद नहीं करता। यदि सुख में भगवान को याद किया जाए तो दुःख आए ही क्यों? (कबीर कहना चाहते हैं कि चाहे दुःख हो या सुख, भगवान का हमेशा स्मरण करना चाहिए।)
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Question 23 Marks
काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई चुनाय।
ता चढि मुल्ला बाँग दै, क्या बहिरा हुआ खुदाय ॥
Answer
कंकड़-पत्थर जोड़कर मस्जिद बनाई और उस पर चढ़कर मुल्ला बौग देने लगा (जोर से खुदा को पुकारने लगा)। कबीर पूछते हैं कि खुदा क्या बहरा हो गया है जो उसे इस तरह जोर से पुकारने की जरूरत पड़ती है। (कबीर के अनुसार भगवान हृदय में है। उसका स्मरण मन में करना चाहिए। आडंबर से दूर रहना चाहिए।)
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Question 33 Marks
सोना सज्जन साधु जन, टूटि जुरै सौ बार ।
दुर्जन कुंभ कुम्हार के, एकै धका दरार ॥
Answer
सोना, सज्जन और साधु लोग रुठने पर भी बार-बार जुड़ते रहते हैं। सज्जन अच्छे लोगों से संबंध बनाकर उसे कायम रखते हैं। जबकि दुर्जन लोगों का व्यवहार इससे उलटा है। जैसे जरा-सी दरारवाले मटके को थोड़ा धक्का मारने पर फूट जाता है, ठीक उसी तरह दुर्जन व्यक्ति टूटते हुए संबंध को पूरी तरह तोड़ देने में संकोच नहीं करते। (यहाँ कबीर ने सजन और दुर्जन के स्वभाव का अंतर बताया है। सज्जन जोड़ने और दुर्जन तोड़ने की बुद्धि रखता है।)
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Question 43 Marks
संत मिले सुख उपजे, दुष्ट मिले दुःख होय।
सेवा किजे संत की, तो जनम् कृतार्थ सोय ॥
Answer
संत के मिलने पर सुख का अनुभव होता है और दुष्ट के मिलने पर मन दुःखी हो जाता है। इसलिए संत की सेवा कीजिए। उससे तुम्हारा जन्म सफल होगा। (वहाँ कबीर ने संत और दुष्ट का अंतर बताते हुए संत-सेवा की महिमा बताई है।)
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आशय स्पष्ट कीजिए : - Hindi STD 9 Questions - Vidyadip