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उपयोजित लेखन question types

78 questions across 6 question groups — pick any mix to generate a हिन्दी लोकभारती paper with step-by-step answer keys.

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उपयोजित लेखन questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

शुभम / शुभांगी, 45, गणेश नगर, जलगाँव से व्यवस्थापक, मीरा पुस्तक भंडार, नेताजी मार्ग, नासिक को हिंदी पुस्तकों की माँग करते हुए पत्र लिखता / लिखती है।
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उमा / उमेश, 205, नेहरू मार्ग, पुणे से 'नंदनवन कालोनी', सातारा में रहने वाले अपने छोटे भाई मंगेश को राज्यस्तरीय निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने के उपलक्ष्य में बधाई देते हुए पत्र लिखता / लिखती है।
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माननीय व्यवस्थापक, बजाज ऑटो लिमिटेड, औरंगाबाद को सुजय / सुजया लहाने, गजानन नगर, औरंगाबाद से लिपिक पद के लिए आवेदन पत्र लिखता / लिखती है।
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विजय / विजया चौधरी, विजय चौक, नागपुर से अपने मित्र / सहेली राम / राधा सिरढोण, सरदार नगर, लातूर को कोरोना (कोविड 19 ) की सावधानी लेने की सलाह देते हुए पत्र लिखता / लिखती है।
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अर्चित / अचिंता भोसले, 54, शांति नगर, नाशिक से अपने परिसर के उद्यान की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए आयुक्त महानगर परिषद, नाशिक को पत्र लिखता / लिखती है।
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आज़ादी के बाद भी हमारी शिक्षा नीति या शिक्षा के ढंग में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। पढ़ाई-लिखाई का एकमात्र उद्देश्य यही रहा कि विद्यालयों से जब बाहर निकलो, तो नौकरी के लिए इस दफ्तर से उस दफ्तर तक 'भटकते रहो। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को मानव बनाने का है, स्वावलंबन के रास्ते पर चलाने का है। जिस शिक्षा द्वारा मनुष्य आत्मनिर्भर नहीं हो पाता, वह उसके लिए निकम्मी होती है। हमारी आज की शिक्षा- प्रणाली से रोटी का सवाल हल नहीं होता, बल्कि शिक्षित युवक अपने को सामाजिक जीवन से पृथक समझता है। सिर्फ किताबें पढ़ने के अलावा हमारी शिक्षा ने और कुछ नहीं सिखाया। प्रयोग के रूप में हमारी शिक्षा एकदम निकम्मी साबित हुई है। इसलिए यह जरूरी हो गया है कि देश और काल के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हों। हमारी शिक्षा का उद्देश्य राष्ट्र प्रेम, अपनी भारतीय संस्कृति से प्रेम, युवकों को अनुशासित बनाना तथा पवित्र आचरण का निर्माण करना हो। साथ ही साथ हमारी यह शिक्षा रोटी की समस्या को भी हल करने में पूर्ण रूप से समर्थ होनी चाहिए।
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उन्नति के पथ पर चलने वाला छात्र प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व ही उठ बैठता है। नित्य कर्म से निवृत्त होकर वह स्नान करता है। तत्पश्चात् भगवान से प्रार्थना करता है कि वह सदा उसका पथ प्रदर्शक रहे। पूजन के बाद व्यायाम करना उत्तम छात्र के लिए आवश्यक है। इसके बिना शरीर सबल, सुंदर और सुगठित नहीं हो सकता। जिस मंदिर में सुंदरता न हो, उसमें बैठने वाली मूर्ति सुंदर नहीं हो सकती । व्यायाम के बाद थोड़ा जलपान करना अत्यंत हितकर होता है। उसके बाद दैनिक समाचार पत्र भी देखना चाहिए, ताकि संसार, देश, नगर तथा पड़ोस की गतिविधि का परिचय हो जाए। इसका ज्ञान न होने से कभी-कभी बड़ी हानि होती है। समाचार पठन के पश्चात विद्यार्थी अपनेपाठ्य विषयों का अध्ययन करता है, उस पर विचार तथा नवीन अभ्यास का प्रयत्न करता है।
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गीता जीवन की कला सिखाती है। जब मैं देखता हूँ कि हमारा समाज आज हमारी संस्कृति के मौलिक सिद्धांतों की अवहेलना करता है, तब मेरा हृदय फटता है। आप चाहे जहाँ जाएँ, परंतु संस्कृति के मौलिक सिद्धांतों को सदैव साथ रखें। संसार के सारे सुख क्षणभंगुर एवं अस्थायी होते हैं। वास्तविक सुख हमारी आत्मा में ही है। चरित्र नष्ट होने से मनुष्य का सब कुछ नष्ट हो जाता है। संसार के राज्य पर विजयी होने पर भी आत्मा की हार सबसे बड़ी हार है। यही है हमारी संस्कृति का सार, जो अभ्यास द्वारा सुगम बनाकर कार्यरूप में परिणत किया जा सकता है।
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प्रेम एक ऐसी अलौकिक शक्ति है, जिससे मनुष्य को अनंत लाभ होते हैं, प्रेम से मानसिक विकार दूर होते हैं, विचारों में कोमलता आती है, सद्गुणों की सृष्टि होती है, दुखों का नाश और सुखों की वृद्धि होती है और यहाँ तक कि मनुष्य की आयु भी बढ़ती है। प्रेम ही मनुष्य को साहसी, धीर और सहनशील बनाता है। माता अपने बच्चों के लिए अनंत कष्ट सहती है और स्वयं सब प्रकार के दुख भोगकर उसे सुख देती है। माताओं को बहुधा ऐसी अवस्था में रहना पड़ता है, जिसमें यदि प्रेम का सहारा न हो, | तो वे बहुत शीघ्र बीमार हो जाएँ, पर यह प्रेम उन्हें रोगी होने से बचाता है। उलटे शुद्ध प्रेम उन्हें बलिष्ठ और सुंदर बनाता है। बिना प्रेम के अच्छी सुख सामग्री हमें तनिक भी प्रसन्न नहीं कर सकती, पर प्रेम की सहायता से हम बिना किसी सुख -सामग्री के भौ परमसुखी हो सकते हैं। अतः प्रत्येक मनुष्य को अपना स्वभाव मिलनसार और प्रेमपूर्ण बनाना चाहिए।
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धन्य है वह ईंट, जो जमीन के सात हाथ नीचे जाकर गड़ गई और इमारत की पहली ईंट बनी। क्योंकि इसी पहली ईंट पर उसकी मजबूती और पुखतेपन पर सारी इमारत की अस्ति नास्ति निर्भर करती है। उस ईंट को हिला दीजिए, कंगूरा बेतहाशा जमीन पर आ - रहेगा। कंगूरे के गीत गाने वाले हम आइए, अब नींव के गीत गाएँ।
वह ईंट, जो सब ईंटों से ज्यादा पक्की थीं, यदि ऊपर लगी होती तो कंगूरे की शोभा सौ गुनी कर देती। किंतु इमारत की पायदारी उसकी नींव पर मुनहसिर होती है, इसलिए उसने अपने को नींव में अर्पित कर दिया। सुंदर सृष्टि हमेशा ही बलिदान खोजती है। बलिदान ईंट का हो या व्यक्ति का सुंदर इमारत बने, इसलिए कुछ पक्की पक्की लाल ईंटों को चुपचाप नींव में जाना है। सुंदर समाज बने, इसलिए कुछ तपे तपाए लोगों को मौन मूक शहादत का लाल सेहरा पहनना है।
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न्यू हाईस्कूल, भूम, जिला उस्मानाबाद में संपन्न 'हिंदी दिवस समारोह का 60 से 80 शब्दों में वृत्तांत लेखन कीजिए। ( वृत्तांत में स्थल, काल, घटना का उल्लेख होना अनिवार्य है।)
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आदर्श पाठशाला, अमरावती में संपन्न वाचन प्रेरणा दिन समारोह का लगभग 70 से 80 शब्दों में वृत्तांत लेखन कीजिए।
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जयप्रकाश नारायण हाईस्कूल, औरंगाबाद में दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के विदाई समारोह का 70 से 80 शब्दों में वृत्तांत लेखन कीजिए।
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मोहन और माता-पिता - सुखी परिवार - मोहन हमेशा मोबाइल पर - कान में इयरफोन - माता-पिता का मना करना - मोहन का ध्यान न देना - सड़क पार करना - कान में इयरफोन - दुर्घटना - सीख |
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एक लड़की - अपना जन्मदिन अलग तरीके से मनाना - अपने लिए कुछ न लेना-दूसरों को बाँटना-खुशी का अनुभव करना - सीख|
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भिखारी - भीख माँगना - एक व्यक्ति का उसे रोज देखना - फूलों  का गुच्छा देना - भिखारी का फूल बेचना - मंदिर में सामने दुकान खोलना - सीख|
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लोमड़ी और सारस में मित्रता - लोमड़ी का सारस को मूर्ख बनाने का विचार - दावत का न्योता थाली - में खीर परोसना-  लंबी  चोंच - सारस का भूखा रहना -  सारस का बदला लेना - लोमड़ी को निमंत्रण -  सुराही में खीर परोसना - लोमड़ी का भूखा रहना -  सीख|
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एक बूढ़ा किसान - चार बेटे -बेटों का आपस में लड़ना झगड़ना - किसान मृत्यु शय्या पर - बेटों की चिंता - बेटों को बुलाना -  लकड़ियों  का गटर तोड़ने के लिए कहना - तोड़ न पाना -  गट्टर की लकड़ियाँ - प्रत्येक बेटे एक- एक लकड़ी देना - तोड़ने के लिए कहना - आसानी से तोड़ना - सोख ।
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अनंत इंग्लिश स्कूल, जलगाँव के माध्यमिक विद्यालय के लिए खुले प्रवर्ग के लिए हिंदी विषय के प्रशिक्षित उपाधिधारी शिक्षक सेवक का पद भरना है। इसके लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।
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