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उत्तर दो-तीन वाक्यों [2M]

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Question 12 Marks
‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखिए।
Answer
‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ : दोनों ओर मुसीबत होना। विजयपुर शहर में विक्रम सिंह नाम के एक संपन्न व्यक्ति रहते थे। वे पढ़े-लिखे थे और एक बड़ी कंपनी में अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे थे। उनका करीबन तीन लाख रूपया वेतन था। परिवार में पत्नी और दो बेटे थे। उनका छोटा व सुखी परिवार था। उनके पास आलिशान बंगला, आकर्षक गाड़ियाँ व जमीन-जायदाद आदि सब कुछ था। वे जो भी चाहते थे; उन्हें मिलता था। देखा जाए, तो उनकी जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं था; जो वे चाहते थे और उन्हें नहीं मिले। इस प्रकार वे दुनिया के सबसे भाग्यशाली व्यक्ति थे। फिर भी अधिक पाने की चाहत के कारण वे हमेशा उदास एवं दुखी दिखाई देते थे। वे अधिक धनवान बनना चाहते थे। हमेशा की तरह विक्रम सिंह आज घर आए, तो उनके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव थे।< br>वे हरदिन की अपेक्षा आज अत्यधिक खुश दिखाई दे रहे थे। उनके चेहरे पर मुस्कराहट देखकर पत्नी ने जिज्ञासावश पूछा, “क्या बात है जी? आज बहुत खुश दिखाई दे रहे हो।” उन्होंने कहा, “अरी रमा, दफ्तर में मेरी तरक्की हो गई है और मेरा वेतन भी बढ़ा दिया गया है।” “कितनी खुशी की बात है, अजय के पापा।” पत्नी ने हर्षित होकर कहा। विक्रम सिंह आगे कुछ कहने ही जा रहे थे; तब तक अचानक उनका फोन बजने लगा। उन्होंने फोन उठाया। कोई प्रतिद्वंदवी कंपनी उन्हें अधिक बेतन देकर अपनी कंपनी में काम करने के लिए बुला रही थी। वे सोचने लगे, “अगर मैं एक और कंपनी के लिए काम करूंगा, तो मेरे मालिक को अच्छा नहीं लगेगा…. पर….. क्या करूं….. इतने रुपए। मैं दोनों कंपनी के लिए काम कर सकता हूँ ………… दिन भर एक कंपनी में और रात भर दूसरी कंपनी में …….. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा और आहिस्ता-आहिस्ता मैं अधिक धनवान बन जाऊँगा।” बस यह सोचते ही उन्होंने प्रतिद्वंद्वी कंपनी को ‘हाँ’ कहा।
काम करते-करते रात के दस बज चुके थे। उसी वक्त उनकी पहली कंपनी का मालिक किसी उत्पाद के सिलसिले में बात करने के लिए दूसरी कंपनी के मालिक को मिलने वहाँ पहुंचा। उसने विक्रम सिंह को देखा। वह उससे कुछ पूछे कि उसी वक्त दूसरी कंपनी का मालिक अपने दफ्तर से बाहर आया और उसने पहली कंपनी के मालिक से हाथ मिलाया। पहली कंपनी के मालिक ने तुरंत विक्रम सिंह से प्रश्न किया कि इस वक्त तुम यहाँ? क्या तुम यहाँ काम करते हो? दोनों मालिक एक-दूसरे को देखने लगे। तब पहले कंपनी के मालिक ने फिर से पूछा कि आखिर तुम किस कंपनी के लिए काम करते हो? अब विक्रम सिंह क्या कहता? उसके लिए आगे कुआँ पीछे खाई वाली मुसीबत थी। सीख : हमें परिस्थितियाँ बिगड़ने से पहले ही नियंत्रित कर लेनी चाहिए।
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Question 22 Marks
‘भोजन का प्रभाव’ – टिप्पणी लिखिए।
Answer
मनुष्य जिस प्रकार का भोजन खाता है; उसी प्रकार उसका मन हो जाता है। मनुष्य यदि अपनी अच्छी कमाई द्वारा भोजन प्राप्त करता है, तो उसका व्यवहार भी अच्छा ही होगा। यदि दूसरों को फँसाकर भोजन प्राप्त करता है, तो उसके मन में बेईमानी होगी। अर्थात आजीविका प्राप्त करने में हमें सदैव सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए।
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