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सूचना अनुसार कीजिए| [2M]

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Question 12 Marks
निम्नलिखित पद्यांशों का भावार्थ लिखिए।
जिससे सपूत उपजें ……………………. शीश पे चढ़ाऊँ।।
Answer
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ लिखित ‘हे मातृभूमि!’ कविता से ली गई है। कवि बिस्मिल जी कहते हैं, “हे मातृभूमि!, तुम्हारी गोद में श्री राम-कृष्ण जैसे सपूतों ने जन्म लिया था। वे तुम्हारी मिट्टी में खेले थे। उस मिट्टी को मैं अपने माथे पर लगाना चाहता हूँ।”
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Question 22 Marks
निम्नलिखित पद्यांशों का भावार्थ लिखिए।
माथे पे तू ……………………. नाम गाऊँ।।
Answer
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ लिखित ‘हे मातृभूमि!’ कविता से ली गई है। कवि ‘बिस्मिल’ जी कहते हैं, “हे मातृभूमि!, तू ही मेरे माथे पर चंदन के रूप में शोभायमान है। मेरे छाती पर तू ही माला बनकर निवास कर रही है और तू ही मेरी वाणी पर गीत बनकर जयगान कर रही है। मैं सदा तुम्हारा ही नाम गाना चाहता हूँ।”
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Question 32 Marks
निम्नलिखित पद्यांशों का भावार्थ लिखिए।
हे मातृभूमि! ………………..शरण में लाऊँ।।
Answer
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ लिखित ‘हे मातृभूमि!’ इस कविता से ली गई हैं। कवि रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ जी के हृदय में मातृभूमि के प्रति अपार भक्तिभाव है। इसी भाव से प्रेरित होकर वे कहते हैं, “हे मातृभूमि!, मैं अपना सिर तेरे चरणों पर झुकाता हूँ। मैं भक्तिरूपी भेंट लेकर तुम्हारी शरण में आया हूँ।”
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Question 42 Marks
निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़कर तात्पर्य लिखिए।
उस धूल को मैं तेरी निज शीश पे चढ़ाऊँ।।
Answer
मातृभूमि की धूल पवित्र व महान है। उस धूल में श्री राम व कृष्ण जैसे सपूतों ने जन्म लिया है। इसलिए कवि उनकी चरण-धूलि को अपनाकर उस धूल को श्रद्धा से अपने सिर पर लगाना चाहता है।
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Question 52 Marks
निम्नलिखित शब्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए तथा उचित शीर्षक देकर मिलने वाली सीख भी लिखिए।
(ग्रंथालय, स्वप्न, पहेली, काँच)
Answer
विजू नाम का गरीब लड़का था। वह अनाथ था। वह पढ़ना चाहता था पर पैसे न होने के कारण वह पढ़ नहीं सकता था। वह काँच की दुकान में सफाई का काम करता था। काँच की उस दुकान में काँच से बनी हुई रंग-बिरंगी वस्तुएँ थीं। एक दिन सफाई करते समय एक काँच का गिलास उसके हाथ से नीचे गिर गया। इस कारण दुकान का मालिक उस पर गुस्सा हो गया और उसने उसे नौकरी से निकाल दिया। विजू रोता-रोता घर चला आया। बिना कुछ खाए वह सो गया। नींद में उसने एक परी को देखा। परी ने उससे कहा कि यदि वह उसकी पहेली का जवाब देगा, तो वह टूटे हुए काँच के गिलास को फिर से जोड़ देगी। खुशी के मारे वह सपने में उछलने लगा। उसी वक्त उसकी आँखें खुली और तब उसे पता चला कि वह सपना देख रहा था। विजू बहुत ही निराश हो गया।
 दूसरे दिन घूमते-घूमते वह एक ग्रंथालय में गया। उसने ग्रंथालय में बैठकर किताबें पढ़नी चाही, लेकिन ग्रंथपाल ने उसे मना कर दिया। उसी वक्त वहाँ पर एक सज्जन व्यक्ति आए। उन्होंने जब यह जाना कि वह गरीब बच्चा किताबें पढ़ना चाहता है; लेकिन रूपए न होने के कारण वह पढ़ नहीं सकता। तब उन्होंने स्वयं ठान लिया कि उस गरीब बच्चे की पढ़ाई का सारा खर्च वे स्वयं करेंगे। सचमुच, विजू की तकदीर बदल गई। आगे चलकर वह पढ-लिखकर डॉक्टर बन गया। सीख: कठिन परिश्रम का फल सदैव हितकारी होता है। मेहनत के बल पर हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
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Question 72 Marks
कविता की पंक्तियाँ पूर्ण कीजिए|
सेवा में तेरी _________;
_________________||
_________________|
_____बलिदान में जाऊँ।।
Answer
सेवा में तेरी माता! मै भेदभाव तजकर
वह पुण्य नाम तेरा, प्रतिदिन सुनें-सुनाऊँ।।
तेरे ही काम आऊँ, तेरा ही मंत्र गाऊँ।
मन और देह तुम पर
 बलिदान में जाऊँ।।
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Question 82 Marks
कृति पूर्ण कीजिए। : मातृभूमि की विशेषताएँ
Answer
(i) श्री राम व कृष्ण जैसे सपूतों को जन्म देने वाली जननी
(ii) मातृभूमि पर पाई जाने वाली धूल पवित्र है।
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