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Question 12 Marks
दो वैद्युत आवेशों के बीच स्थिर वैद्युत बल के लिए कूलॉम नियम तथा दो स्थिर बिंदु द्रव्यमानों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के लिए न्यूटन का नियम दोनों में ही बल आवेशों/द्रव्यमानों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

  1. इन दोनों बलों के परिमाण ज्ञात करके इनकी प्रबलताओं की तुलना की जाए
    1. एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन के लिए, दो प्रोटॉनों के लिए।
  2. इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन में पारस्परिक आकर्षण के वैद्युत बल के कारण इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन के त्वरण आकलित कीजिए जबकि इनके बीच की दूरी A(= 10-10 m) है।

(mp = 1.67 $\times$ 10-27 K, me = 9.11 $\times$ 10-31 kg)

Answer
(a) (i) एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन के बीच लगने वाला वैद्युत बल जबकि उनके बीच की दूरी r है।
$F _{ e }=-\frac{1}{4 \pi \in_{ o }} \frac{ e ^2}{ r ^2}$
यहाँ पर ऋणात्मक चिन्ह आकर्षण बल को प्रदर्शित कर रहा है। इसके तद्नुरूपी गुरुत्वाकर्षण बल जो सदैव धनात्मक है।
$F _{ G }=-\frac{ Gm _{ p } m _{ e }}{ r ^2}$
यहाँ पर $m _{ p }$ तथा $m _{ e }$ क्रमशः प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है-
$\left|\frac{ F _{ e }}{ F _{ G }}\right|=\frac{ e ^2}{4 \pi \in_{ o } Gm _{ p } m _{ e }}$
मान रखने पर
$=\frac{\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^2 \times 9 \times 10^9}{6.66 \times 10^{-11} \times 1.67 \times 10^{-27} \times 9.11 \times 10^{-31}}$
चूँकि $\frac{1}{4 \pi \in_{ o }}=9 \times 10^9$ होता है।
$=\frac{2.56 \times 10^{-38} \times 9 \times 10^9}{6.66 \times 1.67 \times 9.11 \times 10^{-69}}$
$=2.4 \times 10^{39}$
(ii) इसी प्रकार r दूरी पर स्थित दो प्रोटॉनों के बीच वैद्युत बल तथा गुरुत्वाकर्षण बल के परिमाणों का अनुपात
$\left|\frac{ F _{ e }}{ F _{ G }}\right|=\frac{ e ^2}{4 \pi \in_{ o } Gm _{ p } m _{ p }}$
मान रखने पर $=\frac{\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^2 \times 9 \times 10^9}{6.66 \times 10^{-11} \times 1.67 \times 10^{-27} \times 1.67 \times 10^{-27}}$
चूँकि $\frac{1}{4 \pi \in_o}=9 \times 10^9$ होता है।
∴ $\left|\frac{ F _{ e }}{ F _{ G }}\right|=\frac{2.56 \times 10^{-38} \times 9 \times 10^9}{18.574 \times 10^{-65}}$
$=\frac{23.04 \times 10^{36}}{18.574}$
$=1.25 \times 10^{36}$
$\cong 1.3 \times 10^{36}$
$\quad$स्पष्टतः विद्युत बल गुरुत्वाकर्षण बलों की तुलना में अत्यधिक प्रबल होते हैं।
(b) एक प्रोटॉन द्वारा एक इलेक्ट्रॉन पर आरोपित वैद्युत बल F परिमाण में एक इलेक्ट्रॉन द्वारा एक प्रोटॉन पर आरोपित बल समान है तथापि इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन के द्रव्यमान भिन्न होते हैं। इस प्रकार बल का परिमाण है-
$|\vec{F}|=\frac{1}{4 \pi \in_0} \frac{e^2}{r^2}$
मान रखने पर $=\frac{9 \times 10^9 \times\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^2}{\left(10^{-10}\right)^2}$
$=\frac{9 \times 2.56 \times 10^9 \times 10^{-38}}{10^{-20}}$
$=9 \times 2.56 \times 10^{-38+29}$
$=23.04 \times 10^{-9}$
$=2.304 \times 10^{-8}$ न्यूटन
न्यूटन के गति के द्वितीय नियम F = ma से
इलेक्ट्रॉन का त्वरण $a _{ e }=\frac{ F }{ m _{ e }}=\frac{2.304 \times 10^{-8}}{9.11 \times 10^{-31}}$
$\cong 2.53 \times 10^{22}$ मी. $/$ सै. $^2$
प्रोटॉन का त्वरण $a _{ p }=\frac{ F }{ m _{ p }}=\frac{2.304 \times 10^{-8}}{1.67 \times 10^{-27}}$
$\cong 1.38 \times 10^{19}$ मी./सै. ${ }^2$
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Question 22 Marks
Answer
बिन्दु A पर स्थित आवेश $q _1= q$ पर बल का मान बिन्दु B पर स्थित आवेश $q _2= q$के कारण
$\overrightarrow{ F }_{12}=\frac{ kq \cdot q }{l^2} \hat{ r }_1$
$\overrightarrow{ F }_{12}=\frac{ kq ^2}{l^2} \hat{ r }_1$
(जहाँ $\hat{ r }_1, BA$ के अनुदिश इकाई सदिश है)
बिन्दु C पर स्थित आवेश$q_3=-q$ के कारण
$\overrightarrow{ F }_{13}=\frac{ kq \cdot q }{l^2} \hat{ r }_2$
$\hat{ r }_2, AC$ के अनुदिश इकाई सदिश है।
अतः बिन्दु A पर स्थित आवेश $q _1$ पर बल का मान
$\overrightarrow{ F }_1=\overrightarrow{ F }_{12}+\overrightarrow{ F }_{13}$
$\begin{aligned}\left|\overrightarrow{ F }_1\right| & =\sqrt{ F _{12}^2+ F _{13}^2+2 F_{12} F_{13} \cos 120^{\circ}} \\ & =\sqrt{ F _{12}^2+ F _{13}^2+2 F_{12} F_{13} \times\left(-\frac{1}{2}\right)}\end{aligned}$
सममिति से $AO = BO = CO =\frac{l}{\sqrt{3}}$
A पर स्थित आवेश q के कारण Q पर बल
$\left|\overrightarrow{ F }_1\right|=\frac{1}{4 \pi \in_0} \frac{ Qq }{\left(\frac{l}{\sqrt{3}}\right)^2}, AO$ के अनुदिश
$=\frac{3}{4 \pi \in_0} \frac{ Qq }{l^2}, AO$ के अनुदिश
B पर स्थित आवेश q के कारण Q पर बल
$\left|\overrightarrow{ F }_2\right|=\frac{3}{4 \pi \in_0} \frac{ Qq }{l^2}, BO$ के अनुदिश
C पर स्थित आवेश q के कारण Q पर बल
$\left|\overrightarrow{ F _3}\right|=\frac{3}{4 \pi \in_0} \frac{ Qq }{l^2}, CO$के अनुदिश
https://pg-data.sgp1.digitaloceanspaces.com/chapter_wise/25685/V83.png" alt="Image" width="200" height="" />
समान्तर चतुर्भुज के नियम से $\overrightarrow{ F _1}$ व $\overrightarrow{ F _3}$ का परिणामी बल
$|\overrightarrow{ F }|=\sqrt{ F _2^2+ F _3^2+2 F_2 F_3 \cos 120^{\circ}}$
$=\frac{3}{4 \pi \in_0} \frac{ Qq }{l^2}\left(\cos 120^{\circ}=-\frac{1}{2}\right)$
यह बल OA दिशा में होगा तथा $\overrightarrow{ F _1}$
के बराबर परन्तु विपरीत होगा। अतः Q पर परिणामी बल
$\overrightarrow{ F }=\overrightarrow{ F }_1+\overrightarrow{ F }_2+\overrightarrow{ F }_3=0$
$\left|\overrightarrow{ F _1}\right|=\sqrt{ F _{12}^2+ F _{13}^2- F _{12} \cdot F_{13}}$
$=\sqrt{\frac{ k ^2 q ^4}{l^4}+\frac{ k ^2 q ^4}{l^4}-\frac{ kq ^2}{l^2} \times \frac{ kq ^2}{l^2}}$
$=\sqrt{\frac{ k ^2 q ^4}{l^2}}=\frac{ kq ^2}{l^2}=\frac{1}{4 \pi \in_0} \frac{ q ^2}{l^2}$
तथा$\overrightarrow{ F _1}$ की $\overrightarrow{ F }_{12}$ के साथ दिशा
$\theta=\tan ^{-1}\left(\frac{F_{13} \sin 120^{\circ}}{ F _{12}+ F _{13} \cos 120^{\circ}}\right)$
$=\tan ^{-1}\left(\frac{\frac{\sqrt{3}}{2}}{1-\frac{1}{2}}\right)=\tan ^{-1}\left(\frac{\frac{\sqrt{3}}{2}}{\frac{1}{2}}\right)$
$=\tan ^{-1}(\sqrt{3})=60^{\circ}$
अतः $\overrightarrow{ F _1}$, भुजा BC के समान्तर होगा।
इसी प्रकार हम बिन्दु B पर स्थित आवेश $q _2= q$ पर बल $\overrightarrow{ F _2}$ तथा बिन्दु C पर स्थित आवेश $q_3=-q$ $\overrightarrow{ F _3}$ की
गणना कर सकते हैं और ये परिणाम निम्नानुसार प्राप्त होते हैं-
$\overrightarrow{ F _2}=\frac{1}{4 \pi \in_0} \frac{ q ^2}{l^2}$, AC के अनुदिश
$\overrightarrow{ F _3}=\frac{\sqrt{3}}{4 \pi \in_0} \frac{ q ^2}{l^2}$(∠ACB को समद्विभाजित करने वाली रेखा के अनुदिश)
स्पष्टतः $\left|\overrightarrow{ F _1}\right|=\left|\overrightarrow{ F _2}\right| \neq\left|\overrightarrow{ F _3}\right|$ परन्तु $\overrightarrow{ F _1}+\overrightarrow{ F _2}+\overrightarrow{ F _3}=0$ क्योंकि यहाँ पर $\overrightarrow{ F _1}+\overrightarrow{ F _2}=-\overrightarrow{ F _3}$ है।
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Question 32 Marks
दो बिंदु आवेश $q_{1}$तथा q2 जिनके परिमाण क्रमश:$ +10^{-8} \mathrm{C}$ तथा -10-8 C हैं एक दूसरे से 0.1 m दूरी पर रखे हैं। चित्र में दर्शाए बिंदुओं A, B तथा C पर विद्युत क्षेत्र परिकलित कीजिए।
Image
Answer
यहाँ पर दिया गया है-
आवेश $\left( q _1\right)=+10^{-8} C$
आवेश $\left( q _2\right)=_10^{-8} C$
Image
बिन्दु A के लिए - $- q _1$ के कारण बिन्दु A पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
$E _{1 A}=\frac{ kq _1}{ r _1^2}$
मान रखने पर
$E _{1 A}=\frac{9 \times 10^9 \times 10^{-8}}{(0.05)^2}$$\left( q _1\right.$ से A की ओर)
चूँकि $q _1$ से A की दूरी $r _1=0.05 m$ है।
या $E _{1 A}=\frac{90}{25 \times 10^{-4}}$
$=3.6 \times 10^4 N / C$ ($q _1$ से A की ओर)
$q _2$ के कारण बिन्दु A पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
$E _{21}=\frac{ kq _2}{ r _2^2}$
मान रखने पर-
$E _{2 A}=\frac{9 \times 10^9 \times 10^{-8}}{(0.05)^2}$ (A से $q_2$ की ओर)
चूँकि $q _2$ से A की दूरी $r _2=0.05 m$ है।
अतः $E _{2 A}=3.6 \times 10^4 N / C$  (A से $q_2$ की ओर)
दोनों विद्युत क्षेत्र एक ही दिशा में हैं अतः बिन्दु A पर कुल विद्युत क्षेत्र का मान होगा-
$E _{ A }= E _{1 A}+ E _{2 A}$
$=3.6 \times 10^4+3.6 \times 10^4=2 \times 3.6 \times 10^4$
$=7.2 \times 10^4 N / C$
$E _{ A }$ की दिशा बिन्दु A से आवेश $q _2$ की ओर होगी।
बिन्दु B के लिए-बिन्दु B पर, आवेश $q _1$ के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
$E _{1 B}=\frac{ kq _1}{ r _1^2}$ $\left( q _1\right.$से B की ओर)
मान रखने पर $E _{1 B}=\frac{9 \times 10^9 \times 10^{-8}}{(0.05)^2}$
यहाँ पर बिन्दु B की, आवेश $q_1$ से दूरी $r _1=0.05 m$ है|
$\therefore \quad E _{1 B}=\frac{90}{25 \times 10^{-4}}=3.6 \times 10^4 N / C$
$E _{1 B}=3.6 \times 10^4 N / C$ $\left( q _1\right.$ से B की ओर)
बिन्दु B पर आवेश $q _2$ के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
$E _{2 B}=\frac{ kq _2}{ r _2^2}$ B से $q _2$ की ओर)
या $E _{2 B}=\frac{9 \times 10^9 \times 10^{-8}}{(0.15)^2}$
चूँकि बिन्दु B से आवेश $q _2$ की दूरी = 0.15 m है।
या $E _{2 B}=\frac{90}{15 \times 15 \times 10^{-4}}=\frac{900 \times 10^3}{225}$
$=4 \times 10^3 N / C$ (B से $q _2$ की ओर)
यहाँ पर दोनों विद्युत क्षेत्र परस्पर विपरीत दिशा में हैं।
अतः बिन्दु B पर कुल विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
$E_B=E_{1 B}-E_{2 B}$
$=3.6 \times 10^4-4 \times 10^3$
$=36 \times 10^3-4 \times 10^3=32 \times 10^3 N / C$
$=3.2 \times 10^4 N / C$($q_1$ से B की ओर)
बिन्दु C के लिए-बिन्दु C की आवेश $q _1$ व आवेश $q _2$ से सीधी दूरी $r _1= r _2=0 m$ है।
अतः प्रत्येक आवेश के कारण बिन्दु C पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
$\left|\overrightarrow{ E }_{1 C }\right|=\left|\overrightarrow{ E }_{2 C }\right|=\frac{ kq }{ r ^2}$
$=\frac{9 \times 10^9 \times 10^{-8}}{(0.1)^2}=\frac{90}{0.01}$
$=9000=9 \times 10^3 N / C$
इन दोनों सदिशों की दिशायें चित्र में दर्शाई गई हैं। इन दो सदिशों के परिणामी सदिश का परिमाण
$E _{ C }= E _{1 C } \cos 60^{\circ}+ E _{2 C } \cos 60^{\circ}$
$=9 \times 10^3 \times \frac{1}{2}+9 \times 10^3 \times \frac{1}{2}=9 \times 10^3 N / C$
$E _{ C }$दाईं ओर निर्दिष्ट है।

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Question 42 Marks
धातु का आवेशित गोला A नाइलॉन के धागे से निलंबित है। विद्युतरोधी हत्थी द्वारा किसी अन्य धातु के आवेशित गोले B को A के इतने निकट लाया जाता है कि चित्र (a) में दर्शाए अनुसार इनके केंद्रों के बीच की दूरी 10 cm है। गोले A के परिणामी प्रतिकर्षण को नोट किया जाता है (उदाहरणार्थ- गोले पर चमकीला प्रकाश पुंज डालकर तथा अंशांकित पर्दे पर बनी इसकी छाया का विक्षेपण मापकर)। A तथा B गोलों को चित्र (b) में दर्शाए अनुसार, क्रमश: अनावेशित गोलों C तथा D से स्पर्श कराया जाता है। तत्पश्चात चित्र (c) में दर्शाए अनुसार C तथा D को हटाकर B को A के इतना निकट लाया जाता है कि इनके केंद्रों के बीच की दूरी 5.0 cm हो जाती है। कूलॉम नियम के अनुसार A का कितना अपेक्षित प्रतिकर्षण है? गोले A तथा C एवं गोले B तथा D के साइज़ सर्वसम हैं। A तथा B के केंद्रों के पृथकन की तुलना में इनके साइज्ञों की उपेक्षा कीजिए।
Image
Answer
माना प्रारम्भिक स्थिति में गोले A पर आवेश $q _1$ तथा गोले B पर आवेश $q _2$ है तथा इनके बीच की दूरी r = 10 सेमी. है, तब दोनों के मध्य प्रतिकर्षण बल
$F _1=\frac{1}{4 \pi \in_{ o }} \frac{ q _1 q _2}{ r ^2}=\frac{ kq _1 q _2}{ r ^2}$
मान रखने पर $F_1=\frac{ kq _1 q _2}{\left(10 \times 10^{-2}\right)^2} \because r =10$ सेमी. है।
$=\frac{ kq _1 q _2}{100 \times 10^{-4}}$   ...(1)
अब गोले A को समान गोले C से और B को समान गोले D से स्पर्श कराने पर इनके आवेशों का पुनः वितरण होगा और सममिति द्वारा प्रत्येक गोले पर आवेश की मात्रा पूर्व मात्राओं की ठीक आधी होगी अर्थात्
अब गोले A पर नया आवेश = $\frac{q_1}{2}$
गोले B पर नया आवेश = $\frac{q_2}{2}$
अतः दोनों गोलों के परस्पर 5 सेमी = $5 \times 10^{-2}$ मीटर दूरी पर रखने पर प्रतिकर्षण बल
$F_2=\frac{ k \cdot \frac{ q _1}{2} \cdot \frac{ q _2}{2}}{\left(5 \times 10^{-2}\right)^2}=\frac{ kq _1 q _2}{4 \times 25 \times 10^{-4}}$
$F _2=\frac{ kq _1 q _2}{100 \times 10^{-4}}$  ...(2)
अतः समीकरण (1) तथा (2) से स्पष्ट है कि दोनों स्थितियों में बल समान रहेगा।

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Question 52 Marks
कोई इलेक्ट्रॉन $2.0 \times 10^{4}$ $\mathrm{~N} \mathrm{C}^{-1}$परिमाण के एकसमान विद्युत क्षेत्र में 1.5 cm दूरी तक गिरता है। क्षेत्र का परिमाण समान रखते हुए इसकी दिशा उत्क्रमित कर दी जाती है तथा अब कोई प्रोटॉन इस क्षेत्र में उतनी ही दूरी तक गिरता है [चित्र (b)]। दोनों प्रकरणों में गिरने में लगे समय की गणना कीजिए। इस परिस्थिति की 'गुरुत्व के अधीन मुक्त पतन' से तुलना कीजिए।
Image
Answer
प्रथम स्थिति-चित्र (a) में क्षेत्र ऊपर की ओर क्रियाशील है तथा इसमें इलेक्ट्रॉन (ऋणावेशित) नीचे की ओर बल F = eE का अनुभव करता है, यहाँ पर E विद्युत क्षेत्र का परिमाण है अतः इलेक्ट्रॉन का त्वरण
$a_e=\frac{F}{m_e}=\frac{e E}{m_e}$
यहाँ $m_{e}$ इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है।
मान रखने पर $a_e=\frac{1.6 \times 10^{-19} \times 2.0 \times 10^4}{9.11 \times 10^{-31}}$
$\because \ E =2.0 \times 10^4 NC ^{-1}$दिया गया है।
$=\frac{3.2}{9.11} \times 10^{16}=\frac{32}{9.11} \times 10^{15} m / s ^2$
$=3.51 \times 10^{15} m / s ^2$
इलेक्ट्रॉन को नीचे h = 1.5cm = $1.5 \times 10^{-2} m$ दूरी गिरने में लगा समय
$t _{ e }=\sqrt{\frac{2 h}{ a _{ e }}}=\sqrt{\frac{2 \times 1.5 \times 10^{-2}}{3.51 \times 10^{15}}}$
$=\sqrt{\frac{3 \times 10^{-17}}{3.51}}$
$=\sqrt{\frac{30 \times 10^{-18}}{3.51}}=\sqrt{8.547 \times 10^{-18}}$
या $t _{ e }=2.92 \times 10^{-9}$ second
$t _{ i } \cong 2.9 \times$ nano second उत्तर
द्वितीय स्थिति-चित्र (b) में क्षेत्र नीचे की ओर क्रियाशील है तथा उसमें प्रोटॉन (धनावेशित) नीचे का बल F = eE का अनुभव करता है।
अतः प्रोटॉन का नीचे की ओर त्वरण का मान
$a_p=\frac{F}{m_p}=\frac{e E}{m_p}$
मान रखने पर
$a_p=\frac{1.6 \times 10^{-19} \times 2.0 \times 10^4}{1.67 \times 10^{-27}}$
$a_p=\frac{3.2}{1.67} \times 10^{12}=1.91 \times 10^{12} m / s ^2$
तथा प्रोटॉन को $h =1.5 cm=1.5 \times 10^{-2} m$ गिरने में लगा समय
$t _{ p }=\sqrt{\frac{2 h}{ a _{ p }}}=\sqrt{\frac{2 \times 1.5 \times 10^{-2}}{1.91 \times 10^{12}}}$
$=1.25 \times 10^{-7}$ second
$\cong 1.3 \times 10^{-7}$ second
यहाँ पर गणनाओं से स्पष्ट है कि भारी कण प्रोटॉन का प्राप्त त्वरण का मान हल्के कण इलेक्ट्रॉन की अपेक्षा कम है तथा यह समान दूरी तय करने में इलेक्ट्रॉन से अधिक समय लेता है। अर्थात् विद्युत क्षेत्र में आवेशित कण का पतन उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। गुरुत्वीय क्षेत्र में किसी वस्तु का मुक्तपतन उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है। इसके अतिरिक्त गुरुत्वीय जनित त्वरण g = $9.8 m / s ^2$ का मान निकाले गये त्वरण की तुलना $\left(a_e=3.51 \times\right.$$10^{15} m / s ^2$ तथा $\left.a_p=1.91 \times 10^{12} m / s ^2\right)$में नगण्य है |
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Question 62 Marks
एक कप जल में कितने धन तथा ऋण आवेश होते हैं?
Answer
माना एक कप जल का द्रव्यमान m = 250g
तथा जल का अणु द्रव्यमान M = 18
अतः एक कप जल में अणुओं की संख्या
$N =\frac{ m }{ M } \times N _{ A }$
$=\frac{250}{18} \times 6.02 \times 10^{23}$
जल के प्रत्येक अणु में दो हाइड्रोजन परमाणु तथा एक ऑक्सीजन परमाणु होता है। अर्थात् 10 इलेक्ट्रॉन तथा 10 प्रोटॉन होते हैं। अतः कुल धन तथा कुल ऋण आवेश परिमाण में समान होते हैं अतः कप में धनावेश (या ऋणावेश) की मात्रा
$Q=10 \times \frac{250}{18} \times 6.02 \times 10^{23} \times 1.6 \times 10^{-19}$
$=1.34 \times 10^7 C$
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Question 72 Marks
कोई विद्युत क्षेत्र धनात्मक x के लिए, धनात्मक x दिशा में एकसमान है तथा उसी परिमाण के साथ परंतु ऋणात्मक x के लिए, ऋणात्मक x दिशा में एकसमान है। यह दिया गया है कि $\mathbf{E}=200 \hat{\mathbf{i}} \mathrm{N} / \mathrm{C}$ जबकि x > 0 तथा $ \mathbf{E}=-200 \overline{\mathbf{i}} \mathrm{N} / \mathrm{C}$ जबकि x < 0 है। $ 20 \mathrm{~cm}$ लंबे $ 5 \mathrm{~cm}$ त्रिज्या के किसी लंबवृत्तीय सिलिंडर का केंद्र मूल बिंदु पर तथा इस अक्ष x के इस प्रकार अनुदिश है कि इसका एक फलक चित्र 1.28 में दर्शाए अनुसार $x=+10 \mathrm{~cm}$तथा दूसरा फलक x = -10 cm पर है।
  1. प्रत्येक चपटे फलक से गुजरने वाला नेट बहिर्मुखी फ्लक्स कितना है?
  2. सिलिंडर के पाश्र्व से गुजरने वाला फ्लक्स कितना है?
  3. सिलिंडर से गुजरने वाला नेट बहिर्मुखी फ्लक्स कितना है?
  4. सिलिंडर के भीतर नेट आवेश कितना है?
Answer
(a) चित्रानुसार समतल फलकों पर विद्युत क्षेत्र $\overrightarrow{ E }$
तथा क्षेत्रफल सदिश $\overrightarrow{\Delta S }$ समान दिशा में हैं जिससे
$\overrightarrow{ E } \cdot \overrightarrow{\Delta S }= E \Delta S \cos \theta$
$= E \Delta S \cos 0$ $\because \theta=0^{\circ}$है
$= E \Delta S$ समान दिशा है।
फलक A के लिए
$\phi_L=\vec{E} \cdot \overrightarrow{\Delta S}$
$=-200 \hat{ i } \cdot\left[\pi \times(0.05)^2\right](-\hat{ i })$
$=200 \times \pi \times 25 \times 10^{-4}$
$=5000 \times \pi \times 10^{-4}=5000 \times 3.14 \times 10^{-4}$
$=1.57 Nm ^2 C ^{-1}$
इसी प्रकार फलक B के लिए
$\phi_{ R }=\overrightarrow{ E } \cdot \overrightarrow{\Delta S }=+1.57 Nm ^2 C ^{-1}$
चूँकि दायें फलक पर $\overrightarrow{ E }$ तथा $\overrightarrow{\Delta S }$ समान्तर है।
(b)सिलिन्डर के पार्श्व फलक पर $\overrightarrow{ E }$ व $\overrightarrow{\Delta S}$ के मध्य कोण $\theta=90^{\circ}$ अतः $\overrightarrow{ E } \cdot \overrightarrow{\Delta S }=0$
चूँकि $\cos 90^{\circ}=0$
(c) सिलिन्डर से गुजरने वाला नेट बहिर्मुखी फ्लक्स
$\phi=1.57+1.57+0=3.14 Nm ^2 C ^{-1}$
(d) सिलिन्डर के भीतर नेट आवेश
$\Sigma q=\in_0 \phi$
$=8.86 \times 10^{-12} \times 3.14$
$=27.82 \times 10^{-12}=2.78 \times 10^{-11} C$
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Question 82 Marks
चित्र में विद्युत क्षेत्र अवयव $E_{x}$ =$\alpha x^{1 / 2}, E_{y}$=$E_{z}$=0 है, जिसमें $\alpha$=800 N/C m1/2 है।
Image
  1. घन से गुजरने वाला फ्लक्स, तथा
  2. घन के भीतर आवेश परिकलित कीजिए। a =0.1 m मानिए।
Answer
(a) दिया है-
$E _{ x }=\alpha x ^{1 / 2}, E _{ y }= E _{ z }=0$,
$\alpha=800 N / C m ^{1 / 2}$
घन की भुजा a = 0.1m
चूँकि यहाँ पर विद्युत क्षेत्र केवल x घटक ही विद्यमान है।
$\left( E _{ y }\right.$ व $E _{ z }=0$ है) अतः x अक्ष के समानान्तर फलकों (जिनके क्षेत्रफल की दिशायें y या z दिशा में हों) के लिए $\overrightarrow{ E } \cdot \overrightarrow{\Delta S }=0$ होगा।
अतः विद्युत फ्लक्स केवल छायांकित फलकों से सम्बद्ध होगा।
बायें फलक (x = a) पर विद्युत क्षेत्र का परिमाण
$E_L=\alpha x^{1 / 2}=\alpha(a)^{1 / 2}$
दायें फलक (x = 2a) पर विद्युत क्षेत्र का परिमाण
$E_R=\alpha x^{1 / 2}=\alpha(2 a)^{1 / 2}$
अतः इनके विद्युत फ्लक्स का मान होगा-
$\phi_{ L }=\overrightarrow{ E _{ L }} \cdot \overrightarrow{\Delta S }= E _{ L } \Delta S \cos \theta=- E _{ L } \Delta S$
$\because \theta=180^{\circ}$
$=- E _{ L } a ^2$
$\phi_{ R }=\overrightarrow{ E _{ R }} \cdot \overrightarrow{\Delta S }= E _{ R } \Delta S \cos \theta= E _{ R } \Delta S \because \theta=0^{\circ}$
$\therefore \quad \phi_{ R }= E _{ R }( a )^2= E _{ R } a ^2$
घन से गुजरने वाले नेट फ्लक्स का मान
$\begin{array}{l}=\phi_{ L }+\phi_{ R } \\ =- E _{ L } a ^2+ E _{ R } a ^2\end{array}$
$\begin{array}{l}=a^2\left[-E_L+E_R\right] \\ =a^2\left[-\alpha(a)^{1 / 2}+\alpha(2 a)^{1 / 2}\right]\end{array}$
$=\alpha \cdot a ^2 \cdot( a )^{1 / 2}[-1+\sqrt{2}]$
$\begin{array}{l}=\alpha \cdot( a )^{5 / 2}(-1+1.414) \\ =800 \times(0.1)^{5 / 2} \times 0.414\end{array}$
$\begin{array}{l}=800 \times(0.1)^2 \times(0.1)^{1 / 2} \times 0.414 \\ =800 \times 0.01 \times(0.1)^{1 / 2} \times 0.414\end{array}$
$\begin{array}{l}=8 \times 0.316 \times 0.414 \\ =1.047 \cong 1.05 Nm ^2 C ^{-1}\end{array}$
(b) गाउस के नियम से $\phi=\frac{\Sigma q}{\in_0}$
इसलिए घन के अन्दर आवेश की मात्रा
$\Sigma q=\in_0 \phi$
$=8.86 \times 10^{-12} \times 1.05=9.27 \times 10^{-12} C$
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Question 92 Marks
23$\pm 10 \mu \mathrm{C}$ के दो आवेश एक-दूसरे से 5.0 mm दूरी पर स्थित हैं। (a) इस द्विध्रुव के अक्ष पर द्विध्रुव के केंद्र O से चित्र (a) में दर्शाए अनुसार, धनावेश की ओर 15 cm दूरी पर स्थित किसी बिंदु P पर तथा (b) द्विध्रुव के अक्ष के अभिलंबवत O से, चित्र (b) में दर्शाए अनुसार गुजरने वाली रेखा से 15 cm दूरी पर स्थित किसी बिंदु Q पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
Image
Answer
द्विध्रुव के आवेश $\pm q= \pm 10 \mu C= \pm 10 \times 10^{-6}$ कूलॉम आवेशों के मध्य की दूरी 2a = 5 मिमी. $=5 \times 10^{-3}$ मीटर अक्षीय बिन्दु P की O से दूरी $r_1=15$सेमी.
$=15 \times 10^{-2}$ मीटर
तथा निरक्षीय (विषुवतीय) बिन्दु Q की O से दूरी $r_2=15$ सेमी.$=15 \times 10^{-2}$ मीटर
चूँकि यहाँ पर r >> a है।
अतः द्विध्रुव के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के लिए सूत्र का सीधा प्रयोग कर सकते हैं।
(a) अक्षीय बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान
$E=\frac{2 p}{4 \pi \in_0 r^3}, r \gg a$
$E =\frac{2.2 aq }{4 \pi \in_0 r ^3} \quad \because p =2 aq$
$\therefore \quad E=\frac{2 k \cdot(2 a) \cdot q}{r^3} \because \frac{1}{4 \pi \in_0}=k$
मान रखने पर
$E =\frac{2 \times 9 \times 10^9 \times 5 \times 10^{-3} \times 10 \times 10^{-6}}{\left(15 \times 10^{-2}\right)^3}$
$=\frac{2 \times 9 \times 5 \times 10}{15 \times 15 \times 15 \times 10^{-6}}$
$=2.66 \times 10^5$ न्यूटन/कूलॉम
(b) निरक्षीय बिन्दु Q पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान
$E =\frac{ p }{4 \pi \in_0 r ^3}=\frac{ kp }{ r ^3}$  $\because \frac{1}{4 \pi \in_0}= k$.
$=\frac{ k \cdot 2 aq }{ r ^3} \quad \because p =2 aq$
मान रखने पर
$E =\frac{9 \times 10^9 \times 5 \times 10^{-3} \times 10 \times 10^{-6}}{\left(15 \times 10^{-2}\right)^3}$
$=\frac{9 \times 5 \times 10 \times 10^9 \times 10^{-9}}{15 \times 15 \times 15 \times 10^{-6}}=\frac{2}{15} \times 10^6$
$=\frac{4}{3} \times 10^5=1.33 \times 10^5$ न्यूटन / कूलॉम 
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Question 102 Marks
यदि किसी पिंड से एक सेकंड में 109 इलेक्ट्रॉन किसी अन्य पिंड में स्थानांतरित होते हैं तो 1C आवेश के स्थानांतरण में कितना समय लगेगा?
Answer
हम जानते हैं कि आवेश क्वान्टित होता है और इसका क्वान्टम इलेक्ट्रॉन पर आवेश का मान $e =1.6 \times 10^{-19} C$के बराबर होता है।
अतः 1C आवेश के स्थानान्तरण के लिए स्थानान्तरित इलेक्ट्रॉन की संख्या होगी-
$n =\frac{ q }{ e }$
$n =\frac{1}{1.6 \times 10^{-19}}$
$n =6.25 \times 10^{18}$
अतः 1 कूलॉम आवेश (या $6.25 \times 10^{18}$ इलेक्ट्रॉन) स्थानान्तरित होने में लगा समय-
$(T)=\frac{6.25 \times 10^{18}}{10^9}$ सेकण्ड
$T =6.25 \times 10^9$ सेकण्ड
वर्ष में बदलने पर $T=\frac{6.25 \times 10^9}{60 \times 60 \times 24 \times 365}$वर्ष
$=198.18 \approx 200$ वर्ष
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Question 112 Marks
जब काँच की छड़ को रेशम के टुकड़े से रगड़ते हैं तो दोनों पर आवेश आ जाता है। इसी प्रकार की परिघटना का वस्तुओं के अन्य युग्मों में भी प्रेक्षण किया जाता है। स्पष्ट कीजिए कि यह प्रेक्षण आवेश संरक्षण के नियम से किस प्रकार सामंजस्य रखता है।
Answer
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Question 122 Marks
  1. किसी वस्तु का वैद्युत आवेश क्वांटीकृत है, इस प्रकथन से क्या तात्पर्य है?
  2. स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर वैद्युत आवेशों से व्यवहार करते समय हम वैद्युत आवेश के क्वांटीकरण की उपेक्षा कैसे कर सकते हैं?
Answer
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Question 132 Marks
अभ्यास 1.33 वर्णित कण की इलेक्ट्रान के रूप में कल्पना कीजिए जिसको $v_{x}=2.0 \times 10^{6}$ मी. /से. के साथ प्रक्षेपित किया गया है। यदि 0.5 सेमी. की दूरी पर रखी प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र E का मान 9.1$ \times 10^{2}$ न्यूटन/कूलॉम हो तो ऊपरी प्लेट पर इलेक्ट्रॉन कहाँ टकराएगा?
Answer
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Question 142 Marks
प्रारम्भ में x-अक्ष के अनुदिश vx चाल से गति करती हुई दो आवेशित प्लेटों के मध्य क्षेत्र में m द्रव्यमान तथा -q आवेश का एक कण प्रवेश करता है। प्लेटों की लम्बाई L है। इन दोनों प्लेटों के बीच एकसमान वैद्युत क्षेत्र E बनाये रखा है। दर्शाइये कि प्लेट के अन्तिम किनारे पर व्यय का ऊधर्वाधर विक्षेप $\left(\frac{q E L^{2}}{2 m v_{x}^{2}}\right)$ हैं।
Answer
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Question 152 Marks
  1. किसी यादृच्छिक स्थिर वैद्युत क्षेत्र विन्यास पर विचार कीजिए। इस विन्यास की किसी शून्य विक्षेप स्तिथि (E = 0) पर कोई छोटा परीक्षण आवेश रखा गया है। यह दर्शाइये कि परीक्षण आवेश का सन्तुलन आवश्यक रूप से अस्थायी है।
  2. इस परिणाम का समान परिमाण तथा चिह्नों के दो आवेशों (जो एकदूसरे से किसी दूरी पर रखे हैं) के सरल विन्यास के लिए सत्यापन कीजिए।
Answer
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Question 162 Marks
अब ऐसा विश्वास किया जाता है, कि स्वयं प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन (जो सामान्य द्रव्य के नाभिकों का निर्माण करते हैं) और अधिक भूल इकाइयों जिन्हें क्वार्क कहते हैं के बने हैं। प्रत्येक प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन तीन क्वार्कों से मिलकर बनता है। दो प्रकार के क्वार्क होते हैं। अप क्वार्क (u) जिन पर $+\frac{2}{3} e$ आवेश तथा एक डाउन क्वार्क (d) जिस पर $-\frac{1}{3} e$ आवेश होता है। इलेक्ट्रॉन से मिलकर सामान्य द्रव्य बनाते हैं। (कुछ अन्य प्रकार के भी क्वार्क पाये जाते हैं। जो भिन्न असामान्य प्रकार के द्रव्य बनाते हैं) प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन के सम्भावित क्वार्क संघटन समझाइये।
Answer
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Question 172 Marks
जाँच द्वारा सुनिश्चित कीजिए कि $\frac{k e^{2}}{G m_{e} m_{p}}$ विमाहीन है। भौतिक नियतांकों की सारणी देखकर इस अनुपात का मान ज्ञात कीजिए। यह अनुपात क्या बताता है?
Answer
$e ^2$ की विमा =$C ^2$ है
k की विमा = $Nm ^2 C ^{-2}$
$= MLT ^{-2} \times L ^2 \times C ^{-2}$
$= ML ^3 T^{-2} C ^{-2}$
G की विमा $= M ^{-1} L^3 T^{-2}$ है तथा
$m _{ e }$ की विमा = M है
$\therefore \frac{ ke ^2}{ Gm _{ e } m _{ p }}$ की विमा
$=\frac{\left[ ML ^3 T^{-2} C ^{-2}\right]\left[ C ^2\right]}{\left[ M ^{-1} L^3 T^{-2}\right][ M ][ M ]}$
$= M ^{2-2} L^{3-3} T^{-2+2} C ^{-2+2}$
$= M ^0 L^0 T^0 C ^0$
$\therefore \frac{ ke ^2}{ Gm _{ e } m _{ p }}$ एक विमाहीन राशि है।
अब  $e =1.6 \times 10^{-19} C , K =9 \times 10^9 Nm ^2 C ^{-2}$
$G =6.67 \times 10^{-11} Nm ^2 kg^{-2}$
$m _{ e }=9.1 \times 10^{-31} kg$ तथा
$m _{ p }=1.66 \times 10^{-27} kg$ का उपयोग करने पर
अतः $\frac{ ke ^2}{ Gm _{ e } m _{ p }}=\frac{\left(9 \times 10^9\right) \times\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^2}{6.67 \times 10^{-11} \times 9.1 \times 10^{-31} \times 1.66 \times 10^{-27}}$
$=\frac{9 \times 2.56 \times 10^{-38+9}}{6.67 \times 9.1 \times 1.66 \times 10^{-11-31-27}}$
$=\frac{9 \times 2.56 \times 10^{-29}}{6.67 \times 9.1 \times 1.66 \times 10^{-69}}$
$=\frac{9 \times 2.56 \times 10^{-29+69}}{6.67 \times 9.1 \times 1.66}$
$=\frac{9 \times 2.56 \times 10^{40}}{6.67 \times 9.1 \times 1.66}=\frac{90 \times 2.56 \times 10^{39}}{6.67 \times 9.1 \times 1.66}$
$=2.29 \times 10^{39}$
यह अनुपात प्रदर्शित करता है कि प्रोटॉन एवं इलेक्ट्रॉन के मध्य विद्युत बल, उसी दूरी पर स्थित होने पर इनके मध्य के गुरुत्वाकर्षण बल से $10^{39}$ गुना अधिक प्रबल होता है।
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Question 182 Marks
किसी खोखले आवेशित चालक में उसके पृष्ठ पर कोई छिद्र बनाया गया है। यह दर्शाइये कि छिद्र में वैद्युत क्षेत्र $\left(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\right) \hat{n}$ है, जहाँ $\hat{n}$ अभिलम्बवत् दिशा में बहिर्मुखी एकांक सदिश है तथा $\sigma$ छिद्र के निकट पृष्ठीय आवेश घनत्व है।
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Question 192 Marks
(a) किसी चालिक A, जिसमें चित्र (a) में दर्शाये अनुसार कोई कोटर/गुहा (cavity) है, को Q आवेश दिया गया है। यह दर्शाइये कि सम आवेश चालक के बाह्य पृष्ठ पर प्रतीत होना चाहिए।
(b) कोई अन्य चालक B जिस पर आवेश q है, को कोटर/गुहा (cavity) इस प्रकार धँसा दिया जाता है कि चालक B चालक A से वैद्युतरो रहे। यह दर्शाइये कि चालक A के बाह्य पृष्ठ पर कुल आवेश Q + q चित्र (b)
(c) किसी सुग्राही उपकरण को उसके पर्यावरण के प्रबल स्थिर-वैद्युत क्षेत्रों से परिरक्षित किया जाना है। सम्भावित उपाय लिखिए।
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Question 202 Marks
चित्र में दर्शाये अनुसार 10 सेमी. भुजा के किसी वर्ग के केन्द्र से ठीक 5 सेमी. ऊँचाई पर कोई +10 $\mu$C आवेश रखा है। इस वर्ग से गुजरने वाले वैद्युत फ्लक्स का परिमाण क्या है?
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Question 212 Marks
अभ्यास 1.15 के एकसमान वैद्युत क्षेत्र का 20 सेमी. भुजा के किसी पन से (जो इस प्रकार अभिविन्यासित है कि उसके फलक निर्देशांक तलों के समान्तर हैं) कितना नेट फ्लक्स गुजरेगा?
Answer
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