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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सविस्तर लिखिए : [5 गुण ]

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Question 15 Marks
किशोरावस्था में किस प्रकार का आहार आवश्यक है? समझाइए।
Answer
किशोरावस्था तीत्र वृद्धि एवं विकास की अवस्था है। अतः किसी भी किशोर को आहार नियोजन अत्यन्त सावधानीपूर्वक करना चाहिए। हमें इस अवस्था में संतुलित आहार लेना चाहिए जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन एवं खनिज का पर्याप्त मात्रा में समावेश होता हैं। हमारा भारतीय भोजन जिसमें रोटी, चावल, दाल एवं सब्जियाँ होती हैं, एक संतुलित आहार है। दूध अपने आप में संतुलित भोजन है। फल भी हमें पोषण देते हैं। लौह (आयरन) तत्व रूधिर का निर्माण करता है तथा लौह प्रतुर खाद्य जैसे कि पत्तीदार सब्जियाँ, गुड़, मांस, संतरा, आँवला इत्यादि किशोर के लिए अच्छे खाद्य हैं।
अपने दोपहर एवं रात्रि के भोजन में ऊर्जा प्रदान करने वाले खाधान्न लेने चाहिए। इसमें दूध, मांस, नट एवं दालें सम्मिलित कर सकते हैं। साथ ही वसा एवं शक्कर भी इसमें शामिल करना आवश्यक है, जो ऊर्जा के स्रोत हैं। रक्षी भोजन के रूप में फल एवं सक्जियों का उपयोग अवश्य करना चाहिए। डिब्याबंद खाद्य पदार्थों को यदि उपयोग में नहीं लें तो अच्छा है क्योंकि ये पोषक नहीं होते हैं।
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Question 25 Marks
हमारे शरीर में पायी जाने वाली विभिन्न अन्तःस्तावी ग्रन्थियों की स्थिति का चित्र बनाइए। इन ग्रन्थियों द्वारा स्वावित हार्मोन के कार्य लिखिए।
Answer
अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ।

RBSE Class 8 Science Important Questions Chapter 10 किशोरावस्था की ओर 3


1. पीयूष ग्रन्थि:
यह हमारे मस्तिष्क के निचले भाग में स्थित होती है। इसका आकार मटर के दाने के आकार का होता है। इससे निकलने वाले हार्मोन अन्य अन्तःस्रावी ग्रंथियों की क्रियाविधि पर नियंत्रण रखते हैं।
2. थायराइड ग्रन्थि:
यह ग्रन्थि श्वास नली के दोनों ओर अधरतल पर स्थित होती है। इससे स्रावित हार्मोन थायर्रोक्सन है जो आयोडीन द्वारा बनता है। इसकी कमी से गलग्रन्थि रोग (गॉयटर) हो जाता है, जिसमें गला फूला हुआ रहता है।
3. एड्डिनल ग्रन्थि:
यह ग्रन्थि वृक्क के ऊपरी भाग पर स्थित होती है। इससे रुवित हार्मोन एड़िनलीन हार्मोन है। यह रुधिर में नमक की मात्रा को संतुलित करता है; साथ ही यह क्रोध, चिन्ता एवं उतेजना की अवस्था में तनाव के संयोजन का कार्य करता है।
4. अग्याशय ग्रन्थि:
यह आमाशय के नीचे स्थित होती है। इससे स्रावित हार्मोन इन्सुलिन है। यह रूधिर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मूत्र के साथ ग्लूकोज बाहर आता है जिसे हम मधुमेङ रोग कहते हैं।
5. जनन ग्रन्थियाँ:
इनसे जनन हार्मोन्स निकलते हैं जो जननांगों की परिपक्वता तथा गौण लैंगिक लक्षणों के लिए उत्तरदायी होते हैं। ये दो प्रकार की होती हैं।
मादा जनन ग्रन्थि
नर जनन ग्रन्थि।
(i) मादा जनन ग्रद्थि: अण्डाशय - इससे एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन्स उत्पन्न होते हैं जो मादा के गौण लैंगिक लक्षण के लिए उत्तरदायी हैं।
(ii) नर जनन ग्रन्थि वृषण: इससे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन सावित होता है जो नर के गौण लेंगिक लक्षणों के लिए उत्तरदायी है।
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Question 35 Marks
संतति के लिंग निधारण की प्रक्रिया किस प्रकार होती है? चित्र सहित समझाइए।
Answer
निषेचित अण्डाप्यु अथवा युग्मनज में जन्म लेने वाले शिशु के लिंग निर्धारण का संदेश होता है। इस क्रिया में लिंग गुणसूत्र सहयोग करते हैं। हम जानते हैं कि मनुष्यों की कोशिका के केन्द्रक में 23 जोड़े गुणसूत्र पाये जाते हैं। इनमें से 2 गुणसूत्र ( 1 जोड़ी) लिंग गुणसूत्र होते हैं जिन्हें X तथा Y कहते हैं। स्त्री में दो X गुणसूत्र होते हैं जबकि पुरुष में एक X तथा एक Y गुणसूत्र होता है। युग्मक (अण्डाणु तथा शुक्राणु) में एक जोड़ा गुणसूत्रों का होता है जबकि अनिषेचित अण्डाणु में सदुव X गुणसूत्र होता है किन्तु शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं जिनमें एक प्रकार में X गुणसूत्र एवं दूसरे प्रकार में Y गुणसूत्र होता है। जब X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अण्डाणु को निषेचित करता है तो युग्मनज में दो X गुणसूत्र होंगे तथा वह मादा शिशु में विकसित होगा । यदि अण्डापु को निषेचित करने वाले शुक्रापु में Y गुणसूत्र है तो युग्मनज नर शिशु में विकसित होगा।

RBSE Class 8 Science Important Questions Chapter 10 किशोरावस्था की ओर 2

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