Question 15 Marks
भारत में निर्धनता के प्रमुख कारणों को स्पष्ट करते हुए उन्हें दूर करने हेतु सुझाव दीजिए।
Answer
View full question & answer→निर्धनता के कारण एवं दूर करने हेतु सुझाव
भारत में निर्धनता हेतु अनेक कारण जिम्मेदार हैं। भारत में निर्धनता के प्रमुख कारणों एवं उन्हें दूर करने हेतु सुझावों को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा शोषण-भारत लम्बे समय तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा तथा उन्होंने अपनी नीतियों से भारत का शोषण किया तथा यहाँ के उद्योग-धन्धों एवं पारम्परिक हस्तशिल्प को नष्ट कर दिया जिससे बेरोजगारी बढ़ी एवं निर्धनता में भी वृद्धि हुई। सरकार को विभिन्न रियायतें एवं प्रोत्साहन देकर देश के हस्तशिल्प एवं अन्य लघु एवं उद्योगों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
(2) जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि-भारत में जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है तथा रोजगार के अवसरों में धीमी गति से वृद्धि हो रही है, जिससे बेरोजगारी एवं निर्धनता की समस्या बढ़ रही है। अतः सरकार को जनसंख्या नियन्त्रण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाना चाहिए।
(3) क्षेत्रीय असमानता-देश में रोजगार के अवसरों के सम्बन्ध में तथा आर्थिक गतिविधियों के सम्बन्ध में काफी असमानता पाई जाती है जिससे कुछ क्षेत्रों का विकास तीव्र हो गया तथा कुछ राज्य पिछड़ गए। अत: सरकार को पिछड़े हुए राज्यों में आर्थिक विकास के प्रयास तेज करने चाहिए एवं कौशल विकास कर युवाओं को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना चाहिए।
(4) बेरोजगारी-भारत में निर्धनता की समस्या का मुख्य कारण बेरोजगारी है, अधिक बेरोजगारी से निर्धनता भी बढती है। इस सम्बन्ध में सरकार को रोजगार सजन कार्यक्रमों को और अधिक बढावा देना चाहिए एवं कौशल विकास कर युवाओं को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना चाहिए।
(5) आय असमानता-देश में व्यक्तियों में आय में काफी असमानता पाई जाती है। यह आय असमानता निर्धनता को और बढ़ाती है; क्योंकि धनी लोग अधिक धनी एवं निर्धन लोग अवसरों के अभाव में और निर्धन हो जाते हैं। अतः सरकार को विभिन्न तरीकों से धनिकों से पैसा लेकर उन्हें निर्धनों के कल्याण में लगाना चाहिए।
(6) कृषि का पिछड़ापन-देश की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है तथा कृषि की स्थिति अत्यन्त पिछड़ी हुई है, अतः इससे निर्धनता को बढ़ावा मिलता है। अतः ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा सरकार द्वारा कृषकों की समस्याओं को दूर करने के प्रयास करने चाहिए।
(7) सामाजिक रीति-रिवाज-भारत में अशिक्षा, अन्धविश्वास एवं पुराने रीति-रिवाजों के फलस्वरूप लोगों को भारी व्यय करना पड़ता है जिससे वे ऋणग्रस्त हो जाते हैं तथा निर्धनता के कुचक्र में फँस जाते हैं। अतः ऐसे लोगों को जागरूक बनाना चाहिए तथा अनावश्यक व्ययों पर रोक लगाने के प्रयास करने चाहिए।
भारत में निर्धनता हेतु अनेक कारण जिम्मेदार हैं। भारत में निर्धनता के प्रमुख कारणों एवं उन्हें दूर करने हेतु सुझावों को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा शोषण-भारत लम्बे समय तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा तथा उन्होंने अपनी नीतियों से भारत का शोषण किया तथा यहाँ के उद्योग-धन्धों एवं पारम्परिक हस्तशिल्प को नष्ट कर दिया जिससे बेरोजगारी बढ़ी एवं निर्धनता में भी वृद्धि हुई। सरकार को विभिन्न रियायतें एवं प्रोत्साहन देकर देश के हस्तशिल्प एवं अन्य लघु एवं उद्योगों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
(2) जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि-भारत में जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है तथा रोजगार के अवसरों में धीमी गति से वृद्धि हो रही है, जिससे बेरोजगारी एवं निर्धनता की समस्या बढ़ रही है। अतः सरकार को जनसंख्या नियन्त्रण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाना चाहिए।
(3) क्षेत्रीय असमानता-देश में रोजगार के अवसरों के सम्बन्ध में तथा आर्थिक गतिविधियों के सम्बन्ध में काफी असमानता पाई जाती है जिससे कुछ क्षेत्रों का विकास तीव्र हो गया तथा कुछ राज्य पिछड़ गए। अत: सरकार को पिछड़े हुए राज्यों में आर्थिक विकास के प्रयास तेज करने चाहिए एवं कौशल विकास कर युवाओं को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना चाहिए।
(4) बेरोजगारी-भारत में निर्धनता की समस्या का मुख्य कारण बेरोजगारी है, अधिक बेरोजगारी से निर्धनता भी बढती है। इस सम्बन्ध में सरकार को रोजगार सजन कार्यक्रमों को और अधिक बढावा देना चाहिए एवं कौशल विकास कर युवाओं को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करना चाहिए।
(5) आय असमानता-देश में व्यक्तियों में आय में काफी असमानता पाई जाती है। यह आय असमानता निर्धनता को और बढ़ाती है; क्योंकि धनी लोग अधिक धनी एवं निर्धन लोग अवसरों के अभाव में और निर्धन हो जाते हैं। अतः सरकार को विभिन्न तरीकों से धनिकों से पैसा लेकर उन्हें निर्धनों के कल्याण में लगाना चाहिए।
(6) कृषि का पिछड़ापन-देश की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है तथा कृषि की स्थिति अत्यन्त पिछड़ी हुई है, अतः इससे निर्धनता को बढ़ावा मिलता है। अतः ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा सरकार द्वारा कृषकों की समस्याओं को दूर करने के प्रयास करने चाहिए।
(7) सामाजिक रीति-रिवाज-भारत में अशिक्षा, अन्धविश्वास एवं पुराने रीति-रिवाजों के फलस्वरूप लोगों को भारी व्यय करना पड़ता है जिससे वे ऋणग्रस्त हो जाते हैं तथा निर्धनता के कुचक्र में फँस जाते हैं। अतः ऐसे लोगों को जागरूक बनाना चाहिए तथा अनावश्यक व्ययों पर रोक लगाने के प्रयास करने चाहिए।