Question 14 Marks
(i) वर्तमान समय में प्रदूषण से सम्बन्धित दो प्रमुख चिन्ताजनक घटनाएँ क्या हैं?
(ii) ओजोन परत के हास को रोकने के कोई तीन उपाय लिखिए।
(ii) ओजोन परत के हास को रोकने के कोई तीन उपाय लिखिए।
Answer
View full question & answer→(i) वर्तमान समय में प्रदूषण से सम्बन्धित दो प्रमुख चिन्ताजनक घटनाएँ निम्न हैं-
(1) ओजोन परत का अपक्षय।
(2) अपशिष्ट निपटान (कचरा प्रबंधन)।
(1) ओजोन परत का अपक्षय- ओजोन (O3) के अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनते हैं। ओजोन एक घातक गैस है परन्तु यह सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरणों (UV-विकिरण) से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। यह पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यन्त हानिकारक है। उदाहरण के लिए, यह विकिरण मानव में त्वचा कैंसर उत्पन्न करती है।
वायुमण्डल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी विकिरण के प्रभाव से ऑक्सीजन (O2) अणुओं से ओजोन बनती है, जो सुरक्षा आवरण का कार्य करती है। परन्तु 1980 से वायुमण्डल में ओजोन की मात्रा में तीव्रता से गिरावट आने लगी है। क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFCs) जैसे मानव संश्लेषित रसायनों को इसका मुख्य कारक माना गया है। इन रसायनों का उपयोग रेफ्रीजरेटर (शीतलन) एवं अग्निशमन के लिए किया जाता है। ओजोन की घटती मात्रा के कारण ही 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वानुमति बनी कि CFCs के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए।
(2) कचरा प्रबंधन- वर्तमान में किसी भी नगर एवं कस्बे में जाने पर चारों तरफ कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। हमारी जीवन शैली में हो रहे सुधार के साथ-साथ उत्पादित कचरे की मात्रा भी बहुत अधिक होती जा रही है। हमारी अभिवृत्ति में परिवर्तन भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करता है। हम प्रयोज्य (निवर्तनीय) वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने लग गये हैं। पैकेजिंग के तरीकों में बदलाव से अजैव निम्नीकरण वस्तु के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हुई है।
उदाहरण के लिए कुछ वर्षों पूर्व रेलगाड़ियों में चाय काँच के गिलासों में दी जाती थी, जो चाय वाले को वापस कर दिए जाते थे। परन्तु बाद में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डिस्पोजेबल कप एवं गिलास के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। उस समय किसी ने भी कल्पना नहीं की थी कि प्रतिदिन लाखों की संख्या में उपयोग किए जाने वाली इन कपों का प्रभाव (impact) क्या होगा। अत्यधिक उपयोग के कारण वर्तमान में इन अजैव निम्नीकरणीय वस्तुओं के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हो रही है, जिसका हमारे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस प्रकार हमारे द्वारा उत्पादित कचरे का निपटान एक गम्भीर पर्यावरणीय समस्या बनती जा रही है।
(ii) ओजोन परत के ह्रास को रोकने के उपाय निम्न हैं-
(1) ओजोन परत को नष्ट करने वाले सबसे घातक पदार्थ CFC तथा हैलोजन का उत्पादन पूर्णरूपेण बंद कर देना चाहिए।
(2) वायुमण्डल में क्लोरीन का स्तर कम किया जाना चाहिए।
(3) वृक्षों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए।
(1) ओजोन परत का अपक्षय।
(2) अपशिष्ट निपटान (कचरा प्रबंधन)।
(1) ओजोन परत का अपक्षय- ओजोन (O3) के अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनते हैं। ओजोन एक घातक गैस है परन्तु यह सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरणों (UV-विकिरण) से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। यह पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यन्त हानिकारक है। उदाहरण के लिए, यह विकिरण मानव में त्वचा कैंसर उत्पन्न करती है।
वायुमण्डल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी विकिरण के प्रभाव से ऑक्सीजन (O2) अणुओं से ओजोन बनती है, जो सुरक्षा आवरण का कार्य करती है। परन्तु 1980 से वायुमण्डल में ओजोन की मात्रा में तीव्रता से गिरावट आने लगी है। क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFCs) जैसे मानव संश्लेषित रसायनों को इसका मुख्य कारक माना गया है। इन रसायनों का उपयोग रेफ्रीजरेटर (शीतलन) एवं अग्निशमन के लिए किया जाता है। ओजोन की घटती मात्रा के कारण ही 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वानुमति बनी कि CFCs के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए।
(2) कचरा प्रबंधन- वर्तमान में किसी भी नगर एवं कस्बे में जाने पर चारों तरफ कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। हमारी जीवन शैली में हो रहे सुधार के साथ-साथ उत्पादित कचरे की मात्रा भी बहुत अधिक होती जा रही है। हमारी अभिवृत्ति में परिवर्तन भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करता है। हम प्रयोज्य (निवर्तनीय) वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने लग गये हैं। पैकेजिंग के तरीकों में बदलाव से अजैव निम्नीकरण वस्तु के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हुई है।
उदाहरण के लिए कुछ वर्षों पूर्व रेलगाड़ियों में चाय काँच के गिलासों में दी जाती थी, जो चाय वाले को वापस कर दिए जाते थे। परन्तु बाद में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डिस्पोजेबल कप एवं गिलास के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। उस समय किसी ने भी कल्पना नहीं की थी कि प्रतिदिन लाखों की संख्या में उपयोग किए जाने वाली इन कपों का प्रभाव (impact) क्या होगा। अत्यधिक उपयोग के कारण वर्तमान में इन अजैव निम्नीकरणीय वस्तुओं के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हो रही है, जिसका हमारे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस प्रकार हमारे द्वारा उत्पादित कचरे का निपटान एक गम्भीर पर्यावरणीय समस्या बनती जा रही है।
(ii) ओजोन परत के ह्रास को रोकने के उपाय निम्न हैं-
(1) ओजोन परत को नष्ट करने वाले सबसे घातक पदार्थ CFC तथा हैलोजन का उत्पादन पूर्णरूपेण बंद कर देना चाहिए।
(2) वायुमण्डल में क्लोरीन का स्तर कम किया जाना चाहिए।
(3) वृक्षों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए।





