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निबन्धात्मक प्रश्न [4 M]]

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16 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 14 Marks
(i) वर्तमान समय में प्रदूषण से सम्बन्धित दो प्रमुख चिन्ताजनक घटनाएँ क्या हैं?
(ii) ओजोन परत के हास को रोकने के कोई तीन उपाय लिखिए।
Answer
(i) वर्तमान समय में प्रदूषण से सम्बन्धित दो प्रमुख चिन्ताजनक घटनाएँ निम्न हैं-
(1) ओजोन परत का अपक्षय।
(2) अपशिष्ट निपटान (कचरा प्रबंधन)।
(1) ओजोन परत का अपक्षय- ओजोन (O3) के अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनते हैं। ओजोन एक घातक गैस है परन्तु यह सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरणों (UV-विकिरण) से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। यह पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यन्त हानिकारक है। उदाहरण के लिए, यह विकिरण मानव में त्वचा कैंसर उत्पन्न करती है।
वायुमण्डल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी विकिरण के प्रभाव से ऑक्सीजन (O2) अणुओं से ओजोन बनती है, जो सुरक्षा आवरण का कार्य करती है। परन्तु 1980 से वायुमण्डल में ओजोन की मात्रा में तीव्रता से गिरावट आने लगी है। क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFCs) जैसे मानव संश्लेषित रसायनों को इसका मुख्य कारक माना गया है। इन रसायनों का उपयोग रेफ्रीजरेटर (शीतलन) एवं अग्निशमन के लिए किया जाता है। ओजोन की घटती मात्रा के कारण ही 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वानुमति बनी कि CFCs के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए।
(2) कचरा प्रबंधन- वर्तमान में किसी भी नगर एवं कस्बे में जाने पर चारों तरफ कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। हमारी जीवन शैली में हो रहे सुधार के साथ-साथ उत्पादित कचरे की मात्रा भी बहुत अधिक होती जा रही है। हमारी अभिवृत्ति में परिवर्तन भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करता है। हम प्रयोज्य (निवर्तनीय) वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने लग गये हैं। पैकेजिंग के तरीकों में बदलाव से अजैव निम्नीकरण वस्तु के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हुई है।
उदाहरण के लिए कुछ वर्षों पूर्व रेलगाड़ियों में चाय काँच के गिलासों में दी जाती थी, जो चाय वाले को वापस कर दिए जाते थे। परन्तु बाद में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डिस्पोजेबल कप एवं गिलास के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। उस समय किसी ने भी कल्पना नहीं की थी कि प्रतिदिन लाखों की संख्या में उपयोग किए जाने वाली इन कपों का प्रभाव (impact) क्या होगा। अत्यधिक उपयोग के कारण वर्तमान में इन अजैव निम्नीकरणीय वस्तुओं के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हो रही है, जिसका हमारे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस प्रकार हमारे द्वारा उत्पादित कचरे का निपटान एक गम्भीर पर्यावरणीय समस्या बनती जा रही है।
(ii) ओजोन परत के ह्रास को रोकने के उपाय निम्न हैं-
(1) ओजोन परत को नष्ट करने वाले सबसे घातक पदार्थ CFC तथा हैलोजन का उत्पादन पूर्णरूपेण बंद कर देना चाहिए।
(2) वायुमण्डल में क्लोरीन का स्तर कम किया जाना चाहिए।
(3) वृक्षों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए।
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Question 24 Marks
(i) पर्यावरण के विभिन्न घटकों के बीच ऊर्जा के प्रवाह का विस्तृत अध्ययन करने पर कौनसी प्रमुख बातें ज्ञात होती है?
(ii) ओजोन परत के ह्वास से होने वाले दो दुष्प्रभाव लिखिए।
Answer
(1) पर्यावरण के विभिन्न घटकों के बीच ऊर्जा के प्रवाह का विस्तृत अध्ययन करने पर निम्न बातें ज्ञात होती हैं-
(i) एक स्थलीय पारितंत्र में हरे पौधे की पत्तियों द्वारा प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा का लगभग 1% भाग खाद्य ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
(ii) जब हरे पौधे प्राथमिक उपभोक्ता द्वारा खाए जाते हैं, ऊर्जा की बड़ी मात्रा का पर्यावरण में ऊष्मा के रूप में ह्रास होता है। कुछ मात्रा का उपयोग पाचन, विभिन्न जैव कार्यों में, वृद्धि एवं जनन में होता है। खाए हुए भोजन की मात्रा का लगभग 10% ही जैव मात्रा में बदल पाता है तथा अगले स्तर के उपभोक्ता को उपलब्ध हो पाता है।
(iii) अतः प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध कार्बनिक पदार्थों की मात्रा का औसतन 10% ही उपभोक्ता के अगले स्तर तक पहुँचता है।
(iv) क्योंकि उपभोक्ता के अगले स्तर के लिए ऊर्जा की बहुत कम मात्रा उपलब्ध हो पाती है, अतः आहार श्रृंखला सामान्यतः तीन अथवा चार चरण की होती है। प्रत्येक चरण पर ऊर्जा का हास इतना अधिक होता है कि चौथे पोषी स्तर के बाद उपयोगी ऊर्जा की मात्रा बहुत कम हो जाती है।
(v) सामान्यतः निचले पोषी स्तर पर जीवों की संख्या अधिक होती है। अतः उत्पादक स्तर पर यह संख्या सर्वाधिक होती है।
(vi) विभिन्न आहार श्रृंखलाओं की लंबाई एवं जटिलता में काफी अंतर होता है। आमतौर पर प्रत्येक जीव दो या अधिक प्रकार के जीवों द्वारा खाया जाता है, जो स्वयं अनेक प्रकार के जीवों का आहार बनता है। अतः एक सीधी खाद्य श्रृंखला के बजाय जीवों के मध्य खाद्य संबंध शाखान्वित होते हैं तथा ये सब मिलकर खाद्य श्रृंखलाओं का एक जाल बनाते हैं जिसे 'खाद्य जाल' कहते हैं।
(2) ओजोन परत के ह्रास से होने वाले दुष्प्रभाव निम्न हैं-
(i) मनुष्य के शरीर की त्वचा की उपरी कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
(ii) त्वचा के कैंसर की सम्भावना बढ़ जायेगी।
(iii) पराबैंगनी किरणें आँखों में सूजन, घाव, मोतियाबिंद का कारण होती हैं।
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Question 34 Marks
खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
Answer
(i) खाद्य श्रृंखला (Food Chain)- पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न जैविक स्तरों पर भाग लेने वाले जीवों की श्रृंखला खाद्य या आहार श्रृंखला कहलाती है।

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इसका प्रत्येक चरण या कड़ी एक पोषी स्तर बनाते हैं। प्रथम पोषी स्तर स्वपोषी अथवा उत्पादकों का होता है, जो सौर ऊर्जा का स्थिरीकरण करके उसे विषमपोषियों अथवा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराते हैं। शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) द्वितीय पोषी स्तर, छोटे मांसाहारी जीव (द्वितीय उपभोक्ता) तीसरे पोषी स्तर तथा बड़े मांसाहारी जीव (तृतीयक उपभोक्ता) चौथे पोषी स्तर का निर्माण करते हैं।
पर्यावरण के विभिन्न घटकों की परस्पर अन्योन्य क्रिया में निकाय के एक घटक से दूसरे घटक में ऊर्जा का प्रवाह होता है। इस प्रकार खाद्य श्रृंखला पारिस्थितिक तंत्र में भोजन तथा ऊर्जा के प्रवाह को प्रदर्शित करती है।
आहार श्रृंखला सामान्यतः तीन अथवा चार चरण की होती है। प्रत्येक चरण पर ऊर्जा का हास इतना अधिक होता है कि चौथे पोषी स्तर के बाद उपयोगी ऊर्जा की मात्रा बहुत कम हो जाती है।
कुछ आहार श्रृंखलाएँ निम्न प्रकार से हैं-
(i) पेड़ → हिरण → शेर
(ii) घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज
(iii) शैवाल → कीट/कीड़ा → मछली → सारस
(ii) खाद्य जाल (Food Web)-विभिन्न आहार श्रृंखलाओं की लम्बाई एवं जटिलता में काफी अन्तर होता है। सामान्यतः प्रत्येक जीव दो अथवा अधिक प्रकार के जीवों द्वारा खाया जाता है, जो स्वयं अनेक प्रकार के जीवों का आहार बनते हैं। अतः एक सीधी आहार श्रृंखला के बजाय जीवों के मध्य आहार सम्बन्ध शाखान्वित होते हैं तथा शाखान्वित श्रृंखलाओं का जाल बनाते हैं, जिसे खाद्य या आहार जाल कहते हैं।
इस प्रकार खाद्य जाल बहुत जटिल एवं बड़ा होता है, जिसमें ऊर्जा का प्रवाह बहुमुखी होता है। इसमें पोषण स्तर पारितंत्र में प्राकृतिक संतुलन को प्रदर्शित करते हैं।
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Question 44 Marks
पारितंत्र किसे कहते हैं? एक कृत्रिम पारितंत्र का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।###एक्वेरियम एक संतुलित पारितंत्र होता है। समझाइए।
Answer
पारितंत्र (Ecosystem)- वातावरण के सभी जीवित और निर्जीव घटकों के सम्पूर्ण संतुलन के फलस्वरूप बनी इकाई पारितंत्र कहलाती है अर्थात् जीवधारी तथा वातावरण के पारस्परिक सम्बन्धों को पारितंत्र कहते हैं।
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एक कृत्रिम पारितंत्र जलजीवशाला (एक्वेरियम)
जलजीवशाला (एक्वेरियम) जल से भरा काँच का एक पात्र होता है। इसमें मिट्टी होती है जिसके भीतर कुछ जलीय पौधे लगा दिए जाते हैं, जिससे यह स्व-निर्वाह तंत्र बन जाता है। इसके भीतर कुछ मछलियाँ तैरती रहती हैं। इसके भीतर खाद्य- श्रृंखलाएँ स्थापित हो जाती हैं। मछलियों द्वारा छोड़ी गई CO2 पौधों द्वारा भोजन बनाने में इस्तेमाल हो जाती है एवं पौधों द्वारा छोड़ी गई ऑक्सीजन को मछलियों श्वसन के लिए उपयोग में ले लेती हैं। मछलियों का मल-मूत्र पौधों के लिए पोषक बन जाता है। कुछ अपघटक (बैक्टीरिया) मिट्टी में मौजूद हो सकते हैं जो मृत जैविक पदार्थ (उदाहरण के लिए टूटी अथवा मृत पत्तियों) को विघटित करते हैं। इस प्रकार एक्वेरियम एक संतुलित पारितंत्र होता है।
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Question 54 Marks
पारितंत्र को परिभाषित कीजिए। इसके विभिन्न घटकों का वर्णन कीजिए ।
Answer
पारितंत्र-वातावरण के सभी जीवित और निर्जीव घटकों के सम्पूर्ण संतुलन के फलस्वरूप बनी इकाई पारितंत्र कहलाती है अर्थात् जीवधारी तथा वातावरण के पारस्परिक सम्बन्धों को पारितंत्र कहते हैं। पारितंत्र में इसके घटक पारस्परिक गतिज संतुलन में बने रहते हैं।
पारितंत्र के घटक- पारितंत्र के मुख्यतः दो घटक होते हैं- (क) अजैविक घटक (ख) जैविक घटक ।
(क) अजैविक/निर्जीव घटक- इसके अन्तर्गत निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है-
(i) अकार्बनिक पदार्थ-नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, सल्फर आदि की मात्रा पुनः चक्रण द्वारा वातावरण में निश्चित बनी रहती है।
(ii) कार्बनिक पदार्थ-कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा आदि का जैविक तथा अजैविक वातावरण में चक्रण होता रहता है। हरे पौधे तथा अपघटक इनके चक्रण को बनाए रखते हैं।
(iii) जलवायवीय कारक- इसमें ताप, वर्षा, वायु, मृदा, जल आदि भौतिक कारकों को सम्मिलित किया जाता है।
(ख) जैविक घटक-इसके अन्तर्गत निम्नलिखित घटक आते हैं-
(i) उत्पादक- यह स्वपोषी अर्थात् हरे पौधे एवं नील हरित शैवाल होते हैं, जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बनिक भोज्य पदार्थों का निर्माण करते हैं। यह प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलकर कार्बनिक पदार्थों में संचित कर देते हैं।
(ii) उपभोक्ता- यह अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं। इनको मुख्यतः शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी तथा परजीवी में बाँटा गया है। सामान्यतः इन्हें निम्न वर्गों में बाँटते हैं-
(अ) प्राथमिक उपभोक्ता- यह अपना भोजन सीधे उत्पादकों से प्राप्त करते हैं। यह शाकाहारी जन्तु होते हैं, जैसे-गाय, खरगोश, चूहा आदि।
(ब) द्वितीयक उपभोक्ता- यह मांसाहारी होते हैं और अपना भोजन शाकाहारी जन्तुओं को बनाते हैं, जैसे-सर्प मेंढक आदि।
(स) तृतीयक उपभोक्ता- यह भी मांसाहारी होते हैं और अपने भोजन के लिए द्वितीयक उपभोक्ताओं पर निर्भर रहते हैं।
इसी प्रकार इनसे उच्च श्रेणी के उपभोक्ता भी हो सकते हैं। अन्त में सर्वाहारी आते हैं, जो अपना भोजन मांसाहारी एवं शाकाहारी, दोनों प्रकार से प्राप्त करते हैं, जैसे-मानव।
(iii) अपघटक (Decomposers)- कवक और कुछ बैक्टीरिया मृत तथा सड़ते गलते पादप अथवा प्राणी शरीरों पर मृतजीवी (saprophytic) तौर पर रहते हैं और उनका सरलतर पदार्थों में विघटन करते हैं। ये पदार्थ फिर से वापस पर्यावरण में पहुँच जाते हैं और एक बार पुनः हरे पौधों को उपलब्ध हो जाते हैं। इन जीवों को अपघटक कहते हैं।
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Question 64 Marks
पोषी स्तर' से आप क्या समझते हैं? पारितंत्र में पोषी स्तरों को एक अनुपात चित्र द्वारा दर्शाइए।
Answer
पारितंत्र में विभिन्न जैविक स्तरों पर भाग लेने वाले जीव आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं। आहार श्रृंखला का प्रत्येक चरण अथवा कड़ी एक पोषी स्तर बनाते हैं। स्वपोषी अथवा उत्पादक प्रथम पोषी स्तर हैं तथा सौर ऊर्जा का स्थिरीकरण करके उसे विषमपोषियों अथवा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराते हैं। शाकाहारी, अथवा प्राथमिक उपभोक्ता द्वितीय पोषी स्तर, छोटे मांसाहारी अथवा द्वितीय उपभोक्ता तीसरे पोषी स्तर तथा बड़े मांसाहारी अथवा तृतीय उपभोक्ता चौथे पोषी स्तर का निर्माण करते हैं।
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Question 74 Marks
(क) आहार श्रृंखला से क्या अभिप्राय है?
(ख) घास के मैदान में आहार श्रृंखला को उदाहरण सहित समझाइए।
(ग) एक पारितन्त्र में ऊर्जा प्रवाह को आरेख द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer
(क) खाद्य श्रृंखला-पारिस्थितिक तंत्र में प्रत्येक जीव भोजन प्राप्ति हेतु अन्य जीवों पर निर्भर रहता है। इनका क्रम निम्न है
उत्पादक → प्राथमिक उपभोक्ता → द्वितीयक उपभोक्ता → तृतीयक उपभोक्ता → सर्वोच्च उपभोक्ता
इस प्रकार खाने व खाये जाने वाले जीवों की शृंखला को खाद्य शृंखला कहते हैं।
(ख) घास के मैदान में आहार श्रृंखला- घास के मैदान में आहार श्रृंखला को निम्न उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है-
घास उत्पादक → कीट प्राथमिक उपभोक्ता → मेंढ़क द्वितीयक उपभोक्ता → साँप तृतीयक उपभोक्ता → बाज चतुर्थ उपभोक्ता
घास के मैदान में घास उत्पादक के रूप में कार्य करती है जिसे प्राथमिक उपभोक्ता अर्थात् शाकाहारियों द्वारा भोजन के रूप में खाया जाता है। कीट जैसे शाकाहारियों को द्वितीयक उपभोक्ता अथवा प्राथमिक मांसाहारियों जैसे मॅढ़क द्वारा खाया जाता है। मेंढ़क को तृतीयक उपभोक्ता अथवा द्वितीयक मांसाहारियों जैसे साँप द्वारा भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है। साँप को चतुर्थ या सर्वोच्च उपभोक्ता जैसे बाज द्वारा अपना भोजन बनाया जाता है। एक प्रकार घास के मैदान में खाने एवं खाये जाने के क्रम से आहार श्रृंखला का निर्माण होता है।
(ग) पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह-पर्यावरण के विभिन्न घटकों की परस्पर अन्योन्यक्रिया में निकाय के एक घटक से दूसरे में ऊर्जा का प्रवाह होता है। स्वपोषी सौर प्रकाश में निहित ऊर्जा को ग्रहण करके रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं। यह ऊर्जा संसार के सम्पूर्ण जैव समुदाय की सभी क्रियाओं के संपादन में सहायक है। स्वपोषी से ऊर्जा विषमपोषी एवं अपघटक तक जाती है। ऊर्जा संरक्षण के नियम के आधार पर ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन होता है तो पर्यावरण में ऊर्जा की कुछ मात्रा का अनुपयोगी ऊर्जा के रूप में हास हो जाता है। यह हम अग्रलिखित प्रकार से समझ सकते हैं-
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Question 84 Marks
(i) पारिस्थितिक पिरामिड किसे कहते हैं? पोषी स्तर का नामांकित चित्र बनाइए। (ii) पारितंत्र के कोई तीन महत्व लिखिए।
Answer
(i) पारिस्थितिक पिरामिड-उत्पादक स्तर से उपभोक्ता स्तर, जीवों की संख्या, जैव भार और ऊर्जा धीरे-धीरे कम हो जाती है। इसे पिरैमिड (स्तूप) के रूप में भी प्रदर्शित किया जा सकता है। इसे पारिस्थितिक पिरामिड कहते हैं।
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(ii) पारितंत्र का महत्व-
(1) प्रत्येक पारितंत्र चाहे वह प्राकृतिक हो या मानव जनित हो, उसे प्रदूषकों और पीडकों से सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
(2) पारितंत्र का अध्ययन विभिन्न प्रकार के जीवों और उनके अजैविक वातावरण के बीच के संबंधों के बारे में सूचनाएं प्रदान करता है।
(3) पारितंत्र की वाहक क्षमता को ज्ञात करके उत्पादकता और उपभोक्ता की संख्या ज्ञात की जा सकती है, जिसे कि उस पारितंत्र के द्वारा संभाला जा सकता है।
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Question 94 Marks
(i) खाद्य जाल क्या है? समझाइए एवं इसका उदाहरण दीजिए। (ii) खाद्य जाल का महत्व लिखिए।
Answer
(i) खाद्य जाल (Food Web)-किसी भी पारिस्थितिक तंत्र में अनेक खाद्य शृखंलायें आपस में जुड़कर एक जाल का निर्माण करती हैं, जिसे खाद्य जाल कहते हैं। कई खाद्य शृंखलाओं का आपस में गुंथना जिसे खाद्य जाल कहते हैं। सरल खाद्य शृंखला प्रकृति में यदाकदा ही मिलती है ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि प्रत्येक जीव, एक से अधिक ऊर्जा स्तरों से भोजन को ग्रहण करता है। दूसरे शब्दों में एक जीव द्वारा उच्च ऊर्जा स्तर के एक से अधिक जीवों के लिए भोजन का निर्माण किया जाता है। खाद्य जाल पारितंत्र की साम्यावस्था को बनाये रखता है।
उदाहरण : घास स्थल पारितंत्र में
घास $\longrightarrow$ टिड्डा $\longrightarrow$ बाज
घास $\longrightarrow$ टिड्डा $\longrightarrow$ छिपकली $\longrightarrow$ बाज
घास $\longrightarrow$ खरगोश $\longrightarrow$ बाज
घास $\longrightarrow$ चूहा $\longrightarrow$ बाज
घास $\longrightarrow$ चूहा $\longrightarrow$ सर्प $\longrightarrow$ बाज
(ii) खाद्य जाल का महत्व-खाद्य जाल, पारितंत्र के स्थायित्व को बनाये रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
उदाहरण-घासों की घातक वृद्धि को शाकाहारियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जब एक प्रकार के शाकाहारियों की संख्या बढ़ती है तो वे वनस्पतियों को नियंत्रित करते हैं।
समान प्रकार से जब एक प्रकार के शाकाहारी जन्तु लुप्त हो जाते हैं तो मांसाहारी परभक्षी द्वारा किसी दूसरे प्रकार के शाकाहारी को खाया जाता है।
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Question 104 Marks
(i) जीवाणु एवं कवक अपघटक क्यों कहलाते है? पर्यावरण के लिए अपघटकों का महत्व लिखिए। (ii) उत्पादक तथा उपभोक्ता में दो अन्तर लिखिए।
Answer
(i) जीवाणु तथा कवक अपघटक कहलाते हैं क्योंकि ये मृत पेड़-पौधों एवं जीव जन्तुओं के शरीर में उपस्थित जटिल कार्बनिक यौगिकों को सरल पदार्थों में अपघटित कर देते हैं।
अपघटकों का महत्व-
1. अपघटक पर्यावरण की स्वच्छता के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान अदा करते हैं।
2. अपघटक पदार्थों के चक्रण की क्रिया में योगदान करते हैं।
(ii) उत्पादक तथा उपभोक्ता में अन्तर-
क्र.सं.उत्पादकउपभोक्ता
1.उत्पादक एक ही प्रकार के होते हैं।जबकि उपभोक्ता प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक प्रकार के हो सकते हैं।
2.उत्पादक प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण करते हैं।उपभोक्ता स्वयं अपने भोजन के निर्माण में असमर्थ होते हैं अर्थात् भोजन नहीं बना सकते हैं।
3.उत्पादक सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।जबकि ये पादपों से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
 
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Question 114 Marks
पारितंत्र किसे कहते है? किसी जलीय प्राकृतिक पारितंत्र का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
Answer
पारितंत्र (Ecosystem) किसी विशिष्ट स्थान पर पाये जाने वाले सभी जीव तथा पर्यावरण के पारस्परिक संबंधों द्वारा बने तंत्र को पारितंत्र (Ecosystem) कहते है।
तालाब पारितंत्र, पारितंत्र का उचित उदाहरण है। यह एक स्थिर जलीय पारितंत्र है। तालाब पारितंत्र जैवीय एवं अजैवीय घटकों का बना होता है-
(1) अजैविक कारक-तालाब पारितंत्र के अजैविक कारक जल, $CO _2, O _2$ अकार्बंनिक यौगिक होते है और कार्बनिक यौगिक, प्रकाश, तापमान, दाब pH आदि होते हैं।
(2) जैविक कारक- तालाब पारितंत्र के जैविक कारक उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक होते हैं।
(i) उत्पादक-उत्पादक अजैविक पदार्थों से ऊर्जा का संश्लेषण करते हैं। तालाब के उत्पादों से नील हरित शैवाल, हरित शैवाल, जलमग्न पादप और तैरने वाले पादप सम्मिलित हैं।
(ii) उपभोक्ता- उपभोक्ता दूसरे जीवों को खाते हैं, वे जीव जो उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं उन्हें प्राथमिक उपभोक्ता या शाकाहारी कहते हैं। उदाहरण-प्लवक जन्तु, साइक्लोपस, कीट आदि।
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मांसाहारी या द्वितीयक उपभोक्ताओं द्वारा प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाया जाता है। इन मांसाहारियों को प्राथमिक उपभोक्ता कहते हैं क्योकि खाद्य शृखंला में ये पहले मांसाहारी होते हैं। उदाहरण-छोटी मछलियां, मेढ़क आदि। द्वितीयक उपभोक्ताओं को तृतीयक उपभोक्ताओं या द्वितीयक मांसाहारियों द्वारा खाया जाता है। उदाहरण-बड़ी मछलियाँ।
(iii) अपघटक-जीवाणु, कवक तथा एक्टिनोयाइसिटीज इस समूह को प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण-एस्परजिलस।
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Question 124 Marks
(i) किसी पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह की दो विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
(ii) खाद्य श्रृंखला व खाद्य जाल में अन्तर लिखिए।
Answer
(i) किसी भी पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह की दो मुख्य विशेषताएं होती हैं। जो निम्न हैं-
(1) ऊर्जा का प्रवाह एक ही दिशा में होता है। स्वपोषी जीवों द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा पुनः सौर ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होती तथा शाकाहारियों को स्थानान्तरित की गई ऊर्जा पुनः स्वपोषी जीवों को उपलब्ध नहीं होती है। जैसे यह विभिन्न पोषी स्तरों पर क्रमकिक स्थानान्तरित होती है। अपने से पहले स्तर के लिए उपलब्ध नहीं होती।
(2) प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा की हानि के कारण प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा में उत्तरोत्तर ह्रास होता है।
(ii) खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल में अन्तर-
क्र.सं.खाद्य श्रृंखला (Food Chain)खाद्य जाल (Food Web)
1.खाद्य श्रृंखला जीवों का वह क्रम है जिसमें समुदाय के एक जीव से दूसरे जीव में ऊर्जा भोज्य पदार्थ के रूप में स्थानान्तरित होती है।अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं इसमें जीवधारियों को भोजन प्राप्त करने के लिए अनेक वैकल्पिक रास्ते होते हैं।
2.इसमें जीवों की संख्या सीमित होती है।अपेक्षाकृत जीवों की संख्या अधिक या असीमित होती है।
3.एक खाद्य स्तर का जीव दूसरे खाद्य स्तर के जीव से जुड़ता है।एक जीव का उपयोग खाद्य पदार्थ के रूप में एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाओं के जीवों द्वारा किया जा सकता है।
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Question 134 Marks
(i) वायुमण्डल में ओजोन का निर्माण किस प्रकार होता है? समझाइए।
(ii) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में कोई तीन अन्तर लिखिए।
Answer
(i) वायुमण्डल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी (UV) विकिरण के प्रभाव से ऑक्सीजन $\left( O _2\right)$ अणुओं से ओजोन बनती है, उच्च ऊर्जा वाले पराबैंगनी विकिरण ऑक्सीजन अणुओं $\left( O _2\right)$ को विघटित कर स्वतंत्र ऑक्सीजन ( O ) परमाणु बनाते हैं। ऑक्सीजन के ये स्वतंत्र परमाणु संयुक्त होकर ओजोन बनाते हैं जैसा कि समीकरण में दर्शाया गया है-
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( ii) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ और अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थ में अन्तर-
क्र.सं.जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ
 
1.वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।ऐसे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित नहीं होते हैं, अजैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।
2.इनकी उत्पत्ति जैविक होती है।ये सामान्यतः मानव द्वारा निर्मित होते हैं।
3.ये पदार्थ प्रकृति में इकट्ठे नहीं होते हैं।
उदाहरण: मलमूत्र, कागज, शाक फल कपड़ा आदि।
इनका ढेर लग जाता है
उदाहरण-प्लास्टिक, डी.डी.टी. आदि।
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Question 144 Marks
प्राकृतिक पारितंत्रों के उदाहरण देते हुए संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
Answer
प्राकृतिक पारितंत्रों के कुछ उदाहरण-
जलीय (Aquatic) पारितंत्र-
(i) तालाब एक पारितंत्र है, जिसके भीतर हरे पौधे (बड़े, छोटे और सूक्ष्मदर्शीय भी) उत्पादक होते हैं एवं शाकभक्षी मछलियाँ एवं कीट आदि प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं जो पौधों को भोजन बनाते हैं। बड़े आकार की मांसभक्षी मछलियाँ, मेंढक, टोड आदि द्वितीयक उपभोक्ता होते हैं।
(ii) समुद्र भी एक पारितंत्र है, जिसके भीतर हरे शैवाल ऊपरी परतों में पाए जाते हैं जो प्रथम स्तर पर आहार का उत्पादन करते हैं। शाकभक्षी मछलियाँ, घोंघे एवं अन्य विविध प्राणी प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं, बड़ी मछलियाँ द्वितीयक उपभोक्ता होते हैं और इस प्रकार क्रम आगे चलता जाता है।
स्थलीय (Terrestrial) पारितंत्र-
वन एक स्थलीय पारितंत्र होता है जिसके भीतर हरे वृक्ष, हरी झाड़ियाँ तथा हरी घास उत्पादक है। हिरण, खरगोश, चूहे और गिलहरियाँ प्राथमिक उपभोक्ता हैं एवं बाघ, भेडिया, लोमड़ी, उल्लू आदि द्वितीयक उपभोक्ता हैं।
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Question 154 Marks
जैव निम्नीकरणीय पदार्थों एवं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer
जैव निम्नीकरणीय पदार्थों एव अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में अन्तर
(Differences between Biodegradable and Non-biodegradable Wastages)
क्र.सं.जैव निम्नीकरणीय पदार्थ(Biodegradable Wastage)अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ
 (Non-biodegradable Wastage)
1.वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।ऐसे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित नहीं होते हैं, अजैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।
2.इनकी उत्पत्ति जैविक होती है।ये सामान्यतः मानव द्वारा निर्मित होते हैं।
3.ये पदार्थ प्रकृति में इकट्ठे नहीं होते हैं।इनका ढेर लग जाता है एवं प्रकृति में इकट्ठे हो जाते हैं।
4.जैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैव आवर्धन (Biomagn- ification) प्रदर्शित नहीं करते हैं।घुलनशील अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं अर्थात् जैव आवर्धन प्रदर्शित करते हैं।
5.प्रकृति में इनका पुनः चक्रण सम्भव है।प्रकृति में इन पदार्थों का पुनः चक्रण सम्भव नहीं है।
6.उदाहरण-मलमूत्र, कागज, शाक, फल, कपड़ा आदि।उदाहरण-प्लास्टिक, डी.डी.टी.. ऐलुमिनियम के डिब्बे आदि।
 
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Question 164 Marks
उत्पादक एवं अपमार्जक में कोई चार अन्तर लिखिए।
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