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निबन्धात्मक प्रश्न [4 M]]

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Question 14 Marks
चुम्बकीय क्षेत्र से आप क्या समझते हैं? चुम्बकीय बल रेखाओं की विशेषताएँ लिखिए। किसी धारावाही वृत्ताकार कुण्डली द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक चित्र बनाइये।
Answer
चुम्बकीय क्षेत्र- किसी चुम्बक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसके बल का संसूचन किया जा सकता है,
उसे चुंबक का चुंबकीय क्षेत्र कहते हैं।
चुम्बकीय बल रेखाओं की विशेषताएँ-
(i) चुम्बकीय बल रेखाएँ काल्पनिक बन्द वक्र होती हैं।
(ii) चुम्बक के बाहर बल रेखाओं की दिशा उत्तरी ध्रुव N से दक्षिणी ध्रुव S की ओर तथा चुम्बक के अन्दर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर इंगित होती है।
(iii) बन्द वक्र के किसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा इंगित करती है।
(iv) ये परस्पर एक-दूसरे को विच्छेदित नहीं करतीं।
धारावाही वृत्ताकार कुण्डली द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का चित्र-
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Question 24 Marks
धारावाही चालक छड़ को चुम्बकीय क्षेत्र में लम्बवत् रखने पर उस पर लगने वाले बल की दिशा की व्याख्या के लिए फ्लेमिंग के बायें हाथ का नियम लिखिए व आवश्यक चित्र बनाइये।
Answer
फ्लेमिंग के बायें हाथ का नियम- इस नियम के अनुसार अपने बांये हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लम्बवत् हों, देखिये नीचे चित्र में। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करती है तो अँगूठा चालक की गति की दिशा अथवा चालक पर आरोपित बल की दिशा की ओर संकेत करेगा।
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Question 34 Marks
फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम लिखिए। किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखे विद्युत धारावाही चालक पर चित्र द्वारा उत्पन्न बल को समझाइये।
Answer
फ्लेमिंग का वामहस्त नियम- इस नियम के अनुसार, यदि बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार फैलाएँ कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लम्बवत् हो तो, यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करती है तो अँगूठा चालक की गति की दिशा अथवा चालक पर आरोपित बल की दिशा की ओर संकेत करेगा।
किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखे विद्युत धारावाही चालक पर उत्पन्न बल-
जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो विद्युत धारा चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है जो चालक के निकट रखे चुम्बक पर बल आरोपित करता है। इसी प्रकार चुम्बक को भी विद्युत धारावाही चालक पर परिमाण में समान परन्तु दिशा में विपरीत बल आरोपित करना चाहिए। चित्रानुसार ऐलुमिनियम की विद्युत धारावाही छड़ को चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो छड़ पर एक बल आरोपित होता है। चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा उत्क्रमित (B से A की ओर) करने पर बल की दिशा भी उत्क्रमित हो जाती है। चुम्बक के ध्रुवों को परस्पर बदलकर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बदलने पर छड़ पर आरोपित बल की दिशा उत्क्रमित हो जाती है। इससे यह प्रदर्शित होता है कि चालक पर आरोपित बल की दिशा विद्युत धारा की दिशा और चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दोनों पर निर्भर करती है।
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Question 44 Marks
घरेलू विद्युत परिपथ में अतिभारण व लघुपथन के कारणों को समझाइए। इनसे होने वाले नुकसान को बताते हुए इनसे बचने के उपाय सुझाइए।
Answer
जब विद्युन्मय तार तथा उदासीन तार दोनों सीधे संपर्क में आते हैं तो अतिभारण हो सकता है। यह तब होता है जब तारों का विद्युतरोधन क्षतिग्रस्त हो जाता है अथवा साधित्र में कोई दोष होता है। ऐसी परिस्थितियों में किसी परिपथ में विद्युत धारा अकस्मात् बहुत अधिक हो जाती है। इसे लघुपथन कहते हैं।
आपूर्ति वोल्टता में दुर्घटनावश होने वाली वृद्धि से भी कभी-कभी अतिभारण हो सकता है। कभी-कभी एक सॉकेट से बहुत से विद्युत साधित्रों को संयोजित करने से भी अतिभारण हो जाता है।
अतिभारण व लघुपथन से हानि-
(1) प्रतिरोध कम होने के कारण तारें अधिक गर्म हो जाती हैं, जिस कारण उनके ऊपर चढ़ा विद्युतरोधी पदार्थ जल जाता है।
(2) ऊपरी आवरण के हट जाने पर तारें नंगी हो जाती हैं, जिस कारण विद्युत शॉक लग सकता है।
बचाव के उपाय-  विद्युत परिपथ में लगा फ्यूज परिपथ तथा साधित्र को अतिभारण के कारण होने वाली क्षति से बचाता है। फ्यूजों में होने वाला जूल तापन फ्यूज को पिघला देता है जिससे विद्युत परिपथ टूट जाता है।
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Question 54 Marks
निम्न को समझाइए-
(a) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम 
(b) मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम
(c) फ्लेमिंग का वामहस्त (बायाँ हाथ) नियम
Answer
A. दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम- यह किसी विद्युत धारावाही चालक से संबद्ध चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने का नियम है इसके अनुसार "यदि दाहिना हाथ विद्युत धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़े हुए है कि अंगूठा विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करता है, तो अँगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा में लिपटी होंगी।"
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B. मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम- इसके अनुसार "यदि किसी कॉर्कस्क्रू को विद्युत धारा की दिशा में आगे बढ़ाते हैं तो कॉकस्क्रू के घूर्णन की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा होती है।"
C. फ्लेमिंग का वामहस्त (बायाँ हाथ) नियम- इस नियम के अनुसार "यदि बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार फैलाएँ कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत् हों। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की ओर संकेत करती है तो अंगूठा चालक की गति की दिशा अथवा चालक पर आरोपित बल की दिशा की ओर संकेत करेगा"।
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Question 64 Marks
घरेलू विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचकर उसकी संयोजन व्यवस्था को समझाइए। विद्युत प्रयोग में रखी जाने वाली सावधानियों का वर्णन कीजिए।
Answer
घरेलू विद्युत परिपथ-  हम अपने घरों में विद्युत शक्ति की आपूर्ति मुख्य तारों, जिसे मेंस भी कहते हैं, से प्राप्त करते हैं। इन मुख्य तारों में से एक तार को जिस पर प्रायः लाल विद्युतरोधी आवरण होता है, विद्युन्मय तार (अथवा धनात्मक तार) कहते हैं। अन्य तार को जिस पर काला आवरण होता है, उदासीन तार (ऋणात्मक तार) कहते हैं। हमारे देश में इन दोनों तारों के बीच 220V का विभवांतर होता है।
घर में लगे मीटर बोर्ड में ये तार मुख्य फ्यूज से होते हुए एक विद्युत मीटर में प्रवेश करते हैं। इन्हें मुख्य स्विच से होते हुए घर के लाइन तारों से जोड़ते हैं। ये तार घर के पृथक् पृथक् परिपथों में विद्युत आपूर्ति करते हैं। प्रायः घरों में दो पृथक् परिपथ होते हैं, एक 15A विद्युत धारा अनुमतांक के लिए, जिसका उपयोग उच्च शक्ति वाले विद्युत साधित्रों जैसे-गीजर, वायु शीतित्र/कूलर आदि के लिए किया जाता है। दूसरा विद्युत परिपथ 5A विद्युत धारा अनुमतांक के लिए होता है, जिससे बल्ब, पंखे आदि चलाए जाते हैं।
नीचे चित्र में सामान्य घरेलू विद्युत परिपथों में से किसी एक परिपथ का व्यवस्था आरेख चित्र दिखाया गया है। प्रत्येक पृथक् विद्युत परिपथ में विद्युन्मय तथा उदासीन तारों के बीच विभिन्न विद्युत साधित्रों को संयोजित किया जा सकता है। प्रत्येक साधित्र का अपना पृथक् 'ऑन/ऑफ' स्विच होता है, ताकि इच्छानुसार उनमें विद्युत धारा प्रवाहित कराई जा सके। सभी साधित्रों को समान वोल्टता मिल सके, इसके लिए उन्हें परस्पर पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।
विद्युत फ्यूज सभी घरेलू परिपथों का एक महत्त्वपूर्ण अवयव होता है। विद्युत परिपथ में लगा फ्यूज परिपथ तथा साधित्र को अतिभारण के कारण होने वाली क्षति से बचाता है।
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विद्युत प्रयोग में रखी जाने वाली सावधानियाँ-
विद्युत उपयोग में रखी जाने वाली सावधानियाँ निम्नलिखित हैं-
(1) विद्युतीय या फेज (Phase) तार को हमेशा स्विच के नियंत्रण में ही होना चाहिए। नमी आदि होने पर स्विच का उपयोग नहीं करें तथा उसके सूखने का इन्तजार करें।
(2) विद्युत उपकरण के संयोजन में तीनों तार होने चाहिए। मुख्य रूप से प्रेस, गीजर, रेफ्रिजरेटर आदि को टू- पिन या दो तारों द्वारा संचालित नहीं किया जाना चाहिए।
(3) जब तक आपको विद्युत उपकरण सम्बन्धित जानकारी नहीं हो विद्युतीय युक्तियों को खोलना या तारों को हाथ नहीं लगाना चाहिए।
(4) स्विचों, प्लगों, सॉकिटों तथा जोड़ों पर सभी संबंध कसे हुए होने चाहिए, तार पर विद्युतरोधी पदार्थ अच्छा होना चाहिए। खराब स्विचों को बदल दें तथा जोड़ों पर विद्युतरोधी टेप लगानी चाहिए।
(5) फ्यूज उपयुक्त क्षमता एवं पदार्थ का होना चाहिए। सामान्य संयोजन तारों को फ्यूज के रूप में उपयोग न करें, इससे लघुपथन या अतिभारण परिपथ में हो सकता है।
(6) परिपथ में यदि कोई कार्य करना है तो मुख्य स्विच को बन्द कर दें। सुरक्षा के लिए रबर के दस्ताने तथा जूते पहनने चाहिए। टेस्टर, पेचकस आदि औजारों पर विद्युतरोधी आवरण होना चाहिए।
(7) भू-संपर्कित तार अच्छा होना चाहिए।
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Question 74 Marks
निम्न घटनाओं को आरेख चित्र द्वारा दर्शाइए-
(a) धातु के चालक से विद्युत धारा प्रवाहित कराने पर दिक्सूचक में विक्षेपण
(b) सीधे चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण चुंबकीय क्षेत्र
(c) विद्युत धारावाही पाश के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ
Answer

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चित्र-धातु के चालक से विद्युत धारा प्रवाहित कराने पर दिक्सूचक सुई विक्षेपित होती है।
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चित्र-(a) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक तार के चारों ओर के चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाओं को निरूपित करता संकेंद्री वृत्तों का पैटर्न। वृत्तों पर अंकित तीर क्षेत्र रेखाओं की दिशाओं को दर्शाते हैं
(b) प्राप्त पैटर्न का समीप दृश्य
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चित्र-विद्युत धारावाही पाश के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ
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Question 84 Marks
विद्युत चुम्बक द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की शक्ति किन-किन बातों पर निर्भर करती है?
Answer
विद्युत चुम्बक द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की शक्ति उसमें से प्रवाहित विद्युत धारा के मान, तार के घेरों की संख्या तथा क्रोड की धातु पर निर्भर करती है। जितनी अधिक शक्ति की विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, उतना ही प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यदि प्रवाहित धारा का मान समान रहे, तो चुम्बकीय क्षेत्र की शक्ति क्रोड पर तार के घेरों की संख्या पर निर्भर करती है। घेरों की संख्या जितनी अधिक होगी, चुम्बकीय क्षेत्र उतना ही अधिक प्रबल होगा।
यदि उपर्युक्त दोनों ही स्थितियाँ समान रहें, तब चुम्बकीय क्षेत्र की शक्ति क्रोड को बदलकर भी बढ़ाई जा सकती है। नर्म लोहे के क्रोड की शक्ति स्टील क्रोड की अपेक्षा अधिक होती है।
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Question 94 Marks
विद्युत चुंबक किसे कहते हैं? इसके निर्माण को चित्र द्वारा दर्शाइए। विद्युत चुम्बक में उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र किन-किन राशियों पर निर्भर करता है?
Answer
परिनालिका के भीतर उत्पन्न प्रबल चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग किसी चुंबकीय पदार्थ (जैसे-नर्म लोहा) को
परिनालिका के भीतर रखकर चुंबक बनाने में किया जाता है। इस प्रकार बने चुंबक को विद्युत चुंबक कहते हैं।
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विद्युत चुम्बक की निर्भरता- विद्युत चुम्बक की शक्ति धारा के मान तार के घेरों की संख्या एवं धातु जिस पर कुण्डली लपेटी गई है, पर निर्भर करती है।
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Question 104 Marks
"चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक बंद वक्र होती हैं।" समझाइए।
Answer
किसी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा वह मानी जाती है जिसके अनुदिश दिक्सूची का उत्तर ध्रुव उस क्षेत्र के भीतर गमन करता है। इसलिए परिपाटी के अनुसार चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के उत्तर ध्रुव से प्रकट होती हैं तथा दक्षिण ध्रुव पर विलीन हो जाती हैं। लेकिन चुंबक के भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा उसके दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती है। इसलिए चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक बंद वक्र होती हैं।
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Question 114 Marks
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ क्या होती हैं? किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा कैसे निर्धारित की जाती है?
Answer
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ- किसी चुम्बक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसके बल का संसूचन किया जा सकता है, उस चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है। वह रेखाएँ जिनके अनुदिश लोह-चूर्ण स्वयं संरेखित होता है, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं का निरूपण करती है। चुम्बकीय क्षेत्र में परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं। किसी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा वह मानी जाती है, जिसके अनुदिश दिक्सूची का उत्तर ध्रुव उस क्षेत्र के भीतर गमन करता है। इसलिए चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ चुम्बक के उत्तर ध्रुव से प्रकट होती हैं तथा दक्षिण ध्रुव पर विलीन हो जाती हैं।
चुम्बक के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा उसके दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती है। अतः चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक बंद वक्र होती हैं।
किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा चुम्बकीय सुई की सहायता से निर्धारित की जाती है। जिस दिशा में उत्तरी ध्रुव का निर्देश प्राप्त होता है, वही चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा होती है।
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