Questions

एक-एक वाक्य में दिजीए।

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34 questions · 3 auto-graded MCQ + 31 self-marked written.

Question 11 Mark
विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सीमान्यतः उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए।
Answer
विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सीमान्यतः उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपाय:
  1. फ्यूज का उपयोग।
  2. भूमि संपर्क तार का उपयोग।
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MCQ 21 Mark
ताँबे के तार की एक आयताकार कुंडली किसी चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णी गति कर रही है। इस कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा में कितने परिभ्रमण के पश्चात परिवर्तन होता है?
  • A
    दो
  • B
    चौथाई
  • C
    एक
  • आधे
Answer
Correct option: D.
आधे
ताँबे के तार की एक आयताकार कुंडली किसी चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णी गति कर रही है। इस कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा आधे परिभ्रमण के पश्चात परिवर्तन होता है। इसका पता फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के द्वारा पता लगाया जा सकता है।
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Question 31 Mark
प्रत्यावर्ती विद्युत धारा उत्पन्न करने वाले स्रोतों के नाम लिखिए।
Answer
A.C जनित्र और इनवर्टर आदि जो प्रत्यावर्ती विद्युत धारा उत्पन्र करते हैं।
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Question 41 Mark
दिष्ट धारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
Answer
सेल, बैट्री और D.C. जनित्र या डायनेमो आदि दिष्ट धारा के स्रोत हैं।
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Question 51 Mark
विद्युत जनित्र का सिद्धांत लिखिए।
Answer
विद्युत जनित्र का सिद्धांत विद्युत चुंबकीय प्रेरण (इलेक्ट्रोमैग्रेटिक इंडक्शन) पर आधारित है। जब एक आयताकार कुंडली को एक सामान चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो यह कुंडली के सिरों पर प्रेरित विद्युत उत्पन्न करता है। यही विद्युत जनित्र का सिद्धांत है।
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Question 61 Mark
किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग स्पष्ट कीजिए।
Answer
  1. कुंडली को किसी चुम्बकीय क्षेत्र में गति कराकर।
  2. कुंडली के चारों ओर के चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन कराकर।
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Question 71 Mark
विद्युत मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है?
Answer
विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक्-परिवर्तक का कार्य करता है। दिक्-परिवर्तक एक युक्ति है जो परिपथ में विद्युत-धारा के प्रभाव को उत्क्रमित कर देता है।
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Question 81 Mark
विद्युत मोटर का क्या सिद्धांत है?
Answer
विद्युत् मोटर के सिद्धांत के अनुसार यदि किसी कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में रखकर उसमें विद्युत् धारा प्रवाह की जाए तो कुंडली पर एक बल कार्य करता है जो कुंडली को उसके अक्ष पर घुमाता है।
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Question 91 Mark
पश्चिम की ओर प्रक्षेपित कोई धनावेशित कण (अल्फा-कण) किसी चुंबकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
Answer
पश्चिम की ओर प्रक्षेपित कोई धनावेशित कण (अल्फा-कण) किसी चुंबकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है तो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा अधोमुखी होगी क्योकि धनावेशित कण का उत्तर दिशा की ओर जाना विद्युत् धारा की दिशा उत्तर की ओर बताता है। अब फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम के अनुसार चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा अधोमुखी होने का पता लगता है।
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Question 101 Mark
क्रियाकलाप 13.7 में हमारे विचार से छड़ AB का विस्थापन किस प्रकार प्रभावित होगा यदि (i) छड़ AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए, (ii) अधिक प्रबल नाल चुंबक प्रयोग किया जाए; और (iii) छड़ AB की लंबाई में वृद्धि कर दी जाए?
Answer
  1. यदि छड AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए तो छड के विस्थापन में भी वृद्धि होती है।
  2. यदि अधिक प्रबल नाल चुंबक प्रयोग किया जाए तो छड AB का विस्थापन भी बढेगा।
  3. यदि छड़ AB की लंबाई में वृद्धि कर दी जाए तो इस पर लगने वाला बल भी बढेगा क्योंकि विस्थापन बढ़ता है।
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Question 111 Mark
किसी प्रोटॉन का निम्नलिखित में से कौन-सा गुण किसी चुबंकीय क्षेत्र में मुक्त गति करते समय परिवर्तित हो जाता है?
Answer
एक गति करता हुआ प्रोटॉन अपनी गति की दिशा में विद्युत् धारा प्रवाहित करवाता है। यदि कोई प्रोटॉन किसी चुबंकीय क्षेत्र में मुक्त गति करता है तो प्रोटॉन पर एक बल आरोपित होता है जो इस प्रोटॉन के वेग और संवेग को पप्रभावित करता है। फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के द्वारा हम चुम्बकीय क्षेत्र में मुक्त गति क्र रहे प्रोटॉन के ऊपर लग रहे बल की दिशा का पता लगा सकते है।
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MCQ 121 Mark
किसी विद्युत धारावाही सीधी लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र-
  • सभी बिन्दुओं पर समान होता है
  • B
    अधोमुखी
  • C
    दक्षिण की ओर
  • D
    उपरिमुखी
Answer
Correct option: A.
सभी बिन्दुओं पर समान होता है
चुम्बकीय क्षेत्र की आपेक्षित प्रबलता को क्षेत्र रेखाओं की निकटता की कोटि द्वारा दर्शाया जाता है। चुम्बक के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा उसके दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती हैं और उन सभी चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के बीच की दूरी समान होती है। विद्युत धारावाही सीधी लंबी परिनालिका एक छड़ चुम्बक की तरह होती है। अतः किसी भी विद्युत धारावाही सीधी लंबी परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र सभी बिन्दुओं पर समान होता है।
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MCQ 131 Mark
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं?
  • A
    सभी बिंदुओं पर समान होता है।
  • B
    इसके सिरे की ओर जाने पर बढ़ता है।
  • शून्य होता है।
  • D
    इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।
Answer
Correct option: C.
शून्य होता है।
दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करती है क्योंकि प्रतिच्छेद बिन्दु पर दिक् सूची रखने पर दो दिशाओं की ओर संकेत करेगा जो संभव नहीं हैं।
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Question 141 Mark
चुंबक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित क्यों हो जाती है?
Answer
चुम्बक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित इसलिए हो जाती है क्योंकि दिक्सूचक की सुई की नोक चुम्बक के ध्रुव की भांति कार्य करता है। जब सुई को दंड चुंबक के पास लाया जाता है जो ये सुई को आकर्षित अथवा प्रतिकर्षित करता है जिससे विक्षेपित होता है।
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Question 151 Mark
किसी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है?
Answer
जब धारावाही चालक चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् होगा तब उस पर आरोपित बल अधिकतम होगा।
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Question 161 Mark
परिनालिका चुंबक की भाँति कैसे व्यवहार करती है? क्या आप किसी छड़ चुंबक की सहायता से किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं?
Answer
जब किसी परिनालिका में विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है तो यह परिनालिका एक चुम्बक की तरह व्यवहार करती है अर्थात् स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाने पर इसका एक सिरा उत्तर की ओर तथा दूसरा सिरा दक्षिण की ओर स्थिर हो जाता है ठीक स्वतन्त्रतापूर्वक लटके छड़ चुम्बक की तरह।
इस प्रकार परिनालिका एक चुम्बक की तरह व्यवहार करती है। जब हम एक छड़ चुम्बक को स्वतन्त्रतापूर्वक लटकी धारावाही परिनालिका के समीप लाते हैं तो परिनालिका का जो सिरा छड़ चुम्बक के दक्षिण ध्रुव की ओर आकर्षित होगा वह उत्तरी ध्रुव तथा दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा।
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Question 171 Mark
चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने के दो तरीकों की सूची बनाइए।
Answer
चुम्बकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने के तरीके:
  1. छड़ चुम्बक द्वारा।
  2. धारावाही चालक (सीधा, वृत्ताकार पाथ या परिनालिका) द्वारा।
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Question 181 Mark
हरे विद्युतरोधन वाला तार प्रायः विद्युन्मय तार होता है।
Answer
हरे विद्युतरोधन वाला तार प्रायः भूसम्पर्क में होता है और विद्युत् धरा के लिए अल्प प्रतिरोध का चलन पथ प्रस्तुत करता है।
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Question 191 Mark
किसी लंबी वृत्ताकर विद्युत धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र समांतर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होता है।
Answer
किसी लंबी वृत्ताकर विद्युत धारावाही कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र समांतर सीधी क्षेत्र रेखाओं के रूप में होता है।
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Question 201 Mark
विद्युत जनित्र वैद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
Answer
विद्युत जनित्र वैद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है और यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
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Question 211 Mark
विद्युत मोटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करता है।
Answer
विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरित करता है।
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Question 221 Mark
लघुपथन के समय परिपथ में विद्युत धारा का मान-
Answer
जब विद्युमन तार तथा उदासीन तार दोनों सीधे संपर्क में आते हैं तो अतिभारण हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसी परिपथ में विद्युत् धारा अकस्मात बहुत अधिक हो जाती है। इसे लघुपथन कहते हैं।
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Question 231 Mark
किसी ac जनित्रा तथा dc जनित्र में एक मूलभूत अंतर यह है कि-
Answer
ac जनित्र में सर्पी वलय का उपयोग होता हैं और प्रत्यावर्ती धरा उत्पन्न होती है जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक का उपयोग किया जाता है और दिशिक विद्युत् धरा उत्पन्न होती है।
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Question 241 Mark
विद्युत धारा उत्पन्न करने की युक्ति को कहते हैं-
Answer
विद्युत् जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा का प्रयोग चुम्बकीय क्षेत्र में रखे किसी चालक को घूर्णी गति प्रदान करने के लिए किया जाता है जिसके फलस्वरूप विद्युत् धारा उत्पन्न होती है।
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Question 251 Mark
वैद्युतचुंबकीय प्रेरण की परिघटना-
Answer
वैद्युतचुंबकीय प्रेरण की परिघटना कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है।
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Question 261 Mark
किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता है?
Answer
खराब तथा क्षतिग्रस्त तारों के कारण जब कभी विद्युन्मय एवं उदासीन तार आपस में मिल जाते हैं तो परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है तथा उसमें धारा की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। इस प्रकार लघु पाथन हो जाता है।
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Question 271 Mark
नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत जनित्र का मूल सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इसमें ब्रुशों का क्या कार्य है?
Answer

विद्युत् जनित्र का नामांकित आरेख-

जनित्र विद्युत् जनित्र का मूल सिद्धान्त:
विद्युत् जनित्र का सिद्धान्त विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण की परिघटना पर आधारित है जिसके आधार पर जब किसी कुण्डली के तल पर चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो उस कुण्डली में प्रेरित विद्युत् धारा प्रवाहित होती है और इस प्रकार यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करने का कार्य विद्युत् जनित्र करता है।
कार्यविधि:
जब आर्मेचर (कुण्डली) ABCD को दक्षिणावर्त दिशा में घुमाया जाता है तो कुण्डली में विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण के कारण विद्युत् धारा प्रेरित हो जाती है। धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है। कुण्डली के आधा चक्कर पूरा करने तक धारा की दिशा वही रहती है अतः पहले आधे चक्कर में धारा B2 से B1 की दिशा में बहती है। अगले आधे चक्कर में विद्युत् धारा की दिशा बदल जाती है। अतः धारा B2 से B1 की ओर बहती है। इस प्रकार परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है।
ब्रुशों का कार्य:
दोनों ब्रुश घूर्णन करती कुण्डली के वलयों के सम्पर्क में रहते हैं जिससे उसके घूर्णन में कोई बाधा नहीं आती तथा उससे प्राप्त विद्युत् धारा को बाह्य परिपथ में प्रवाहित करने में सहायक है।

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Question 281 Mark
निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए-
  1. किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र,
  2. किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत स्थित, विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल, तथा
  3. किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा।
Answer
  1. दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम:
    “यदि आप दाहिने हाथ में धारावाही सीधे चालक को इस प्रकार पकड़ें कि आपका अंगूठा विद्युत् धारा की दिशा की ओर संकेत करें तो आपकी अंगुलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय बल रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करेंगी।”
  2. फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम:
    “यदि बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा एवं अंगूठे को परस्पर लम्बवत् फैलाएँ और यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा, मध्यमा विद्युत् धारा की दिशा को प्रदर्शित करे तो अंगूठा लगने वाले बल की दिशा प्रदर्शित करेगा।”
  3. फ्लेमिंग का दायें हाथ का नियम:
    “यदि दाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा एवं अंगूठे को परस्पर लम्बवत् दिशा में फैलाएँ और यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा एवं अंगूठा चालक की दिशा को प्रदर्शित करे तो मध्यमा प्रेरित विद्युत् धारा की दिशा को प्रदर्शित करेगी।”
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Question 291 Mark
दो वृत्ताकार कुंडली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत धारा में कोई परिवर्तन करें तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत धारा प्रेरित होगी? कारण लिखिए।
Answer
हाँ, कुण्डली B में विद्युत् धारा प्रेरित होगी क्योंकि कुण्डली A में धारा परिवर्तन के फलस्वरूप उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन होगा जो कुण्डली B के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन करेगा, फलस्वरूप कुण्डली B में प्रेरित वि. बा. बल उत्पन्न होगा।
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Question 301 Mark
कोई विद्युतरोधी ताँबे के तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुंबक-
  1. कुंडली में धकेला जाता है।
  2. कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है।
  3. कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है।
Answer
  1. गैल्वेनोमीटर की सुई एक दिशा में क्षणिक गति करेगी।
  2. गैल्वेनोमीटर की सुई एक के विपरीत दिशा में क्षणिक गति करेगी।
  3. गैल्वेनोमीटर की सुई में कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देगा।
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Question 311 Mark
ऐसी कुछ युक्तियों के नाम लिखिए जिनमें विद्युत मोटर उपयोग किए जाते हैं।
Answer
विद्युत् मोटर को प्रयुक्त करने वाली युक्तियाँ:
  1. विद्युत् पंखे
  2. विद्युत् मिक्सर
  3. रेफ्रिजरेटर
  4. कम्प्यूटर
  5. MP-3 प्लेयर आदि
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Question 321 Mark
विद्युत मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्त्व है?
Answer

विद्युत् मोटर का नामांकित चित्र-

विद्युत् मोटर का सिद्धान्त एवं कार्यविधि:
सिद्धान्त:
विद्युत् मोटर विद्युत् धारा के चुम्बकीय प्रभाव के सिद्धान्त पर फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम के अनुसार विद्युत् ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में बदलने का कार्य करता है।
कार्यविधि:
जब चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् रखी धारावाही कुण्डली ABCD में वामावर्त दिशा में विद्युत् धारा अर्थात् भुजा AB में A से B की ओर तथा CD में C से D की ओर बहती है तो फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम के अनुसार AB एवं CD पर विपरीत दिशा में बल लगेंगे जो AB को अधोमुखी तथा CD को उपरमुखी विस्थापित करेगा। आधे घूर्णन के बाद AB एवं CD में धारा की दिशा में परिवर्तन हो जायेगा। इससे CD अधोमुखी एवं AB उपरमुखी विस्थापन करेगा। इस प्रकार कुण्डली एक दिशा में लगातार घूमती रहेगी।
विभक्त वलय का महत्व:
विभक्त वलय कुण्डली में प्रवाहित धारा की दिशा उसकी भुजाओं AB तथा CD में क्रमश: B से A तथा D से C की बदलकर दिक् परिवर्तक का कार्य करते हैं जिससे कुण्डली लगातार एक ही दिशा में घूमती रहती है।

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Question 331 Mark
मान लीजिए आप किसी चैंबर में अपनी पीठ को किसी एक दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार से सामने वाली दीवार की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुंबकीय क्षेत्र द्वारा आपके दाई ओर विक्षेपित हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
Answer
चुम्बकीय क्षेत्र की अभीष्ट दिशा ऊर्ध्वाधर अधोमुखी होगी।
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Question 341 Mark
निम्नलिखित में से कौन किसी लंबे विद्युत धारावाही तार के निकट चुंबकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है?
Answer
चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तार होता है। इसका पता दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम द्वारा लगाया जा सकता है।
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