Questions

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सविस्तर लिखिए : [5 गुण ]

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Question 15 Marks
चित्र में दिए गए विद्युत परिपथ में निम्नलिखित के मान ज्ञात कीजिए:
  1. संयोजन में 8 $\Omega$ के दो प्रतिरोधकों का प्रभावी प्रतिरोध
  2. 4 $\Omega$ प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा
  3. 4 $\Omega$ प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर
  4. 4 $\Omega$ प्रतिरोधक में शक्ति-क्षय
  5. $A_1$ तथा $A_2$ के पाठ्यांकों में अंतर (यदि कोई है)।
Answer
  1. क्योंकि 8 $\Omega$ के दो प्रतिरोधक समान्तर क्रम में संयोजित हैं, तब उनका प्रभावी प्रतिरोध $R_p$ होगा-
    $\frac{1}{R_{P}}=\frac{1}{R_{1}}+\frac{1}{R_{2}}$
    = $\frac{1}{8}+\frac{1}{8}$
    = $\frac{1+1}{8}=\frac{2}{8}$
    $\therefore R_p$= $\frac{8}{2}$ = 4$\Omega$
  2. परिपथ में कुल प्रतिरोध
    R = 4$\Omega$ + $R_p$
    = 4$\Omega$ + 4$\Omega$ = 8$\Omega$
    परिपथ में विद्युत धारा,
    I = $\frac{V}{R}=\frac{8}{8}$ = 1A
    अतः 4$\Omega$ के प्रतिरोधक में धारा 1 A है क्योंकि 4$\Omega$ तथा $R_p$ श्रेणी क्रम में हैं और उनमें समान धारा प्रवाहित होती है।
  3. 4$\Omega$ के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर 4$\Omega$ के प्रतिरोधक में विभव में कमी है, अर्थात्
    V = IR
    = 1 $\times$ 4 = 4 V
  4. 4 W के प्रतिरोधक में शक्ति क्षय,
    $P = I{^2}R$
    $= (1)^2$ $\times$ 4 = 4 W
  5. $A_1$ और $A_2$ ऐमीटरों के पाठ्यांकों में कोई अन्तर नहीं है क्योंकि श्रेणी क्रम वाले परिपथ में सभी अवयवों में समान धारा प्रवाहित होती है।
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Question 25 Marks
जूल का तापीय प्रभाव क्या है? इसका प्रायोगिक निदर्शन किस प्रकार किया जा सकता है? दैनिक जीवन में इसके चार अनुप्रयोग लिखिए।
Answer
उत्तर: जूल के तापन नियम के अनुसार, किसी चालक तार में उत्पन्न ऊष्मा समानुपाती होती है-
  1. धारा के वर्ग $(I^2)$ के
  2. तार के प्रतिरोध (R) के
    1. समय ($\underline{t}$) जब तक धारा प्रवाहित हुई
      अर्थात् उत्पन्न ऊष्मा $H = I^2$ Rt जूल
दैनिक जीवन में अनुप्रयोग-
  1. विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का उपयोग तापन पर आधारित कुछ उपकरणों जैसे विद्युत इस्तरी, विद्युत टोस्टर, विद्युत तंदूर, विद्युत केतली तथा विद्युत हीटर आदि में किया जाता है।
  2. विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का उपयोग विद्युत बल्ब में किया जाता है।
  3. विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का उपयोग घरेलू विद्युत परिपथ तथा उपयोग किए जाने वाली युक्ति फ्यूज़ में किया जाता है।
  4. विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का प्रयोग कपड़े इस्तरी करने वाली विद्युत इस्तरी में किया जाता है।
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Question 35 Marks
आप यह निष्कर्ष किस प्रकार निकालेंगे कि किसी बैटरी से पार्श्व क्रम में संयोजित तीन प्रतिरोधकों में प्रत्येक के सिरों पर समान विभवांतर (वोल्टता) होता है?
Answer
तीन प्रतिरोधकों जिनके प्रतिरोध क्रमशः $R_1, R_2$ तथा $R_3$ है, का समान्तर क्रम संयोजन XY बनाइए। चित्रानुसार इस संयोजन को एक बैटरी, एक प्लग-कुंजी तथा एक ऐमीटर से संयोजित कीजिए।
प्लग में कुंजी लगाइए तथा ऐमीटर का पाठ्यांक नोट कीजिए।

मान लीजिए विद्युत धारा का मान I है। वोल्टमीटर का पाठ्यांक भी नोट कीजिए। इससे समान्तर क्रम संयोजन के सिरों के बीच विभवान्तर V प्राप्त होता है। प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर भी V है। इसकी जाँच प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर पृथक-पृथक वोल्टमीटर संयोजित करके की जा सकती है।

कुंजी से प्लग बाहर निकालिए। परिपथ से ऐमीटर तथा वोल्टमीटर निकाल लीजिए। चित्रानुसार ऐमीटर को प्रतिरोध $R_1$ से श्रेणीक्रम में संयोजित कीजिए। ऐमीटर का पाठ्यांक। 1 नोट कीजिए।
इसी प्रकार, $R_1$ एवं $R_2$ में प्रवाहित होने वाली धारा भी मापिए। यह पाया जाता है कि कुल धारा।, संयोजन की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित होने वाली पृथक धाराओं के योग के बराबर है।
$I=I_1+I_2+I_3 \ldots \text { (i) }$
माना प्रतिरोधकों के समान्तर क्रम संयोजन का तुल्य प्रतिरोध $R_p$ है। प्रतिरोधकों के समान्तर क्रम पर ओम का नियम लागू करने पर हमें प्राप्त होता है।
I = $\frac {V}{R_P}$ ...(ii)
प्रत्येक प्रतिरोधक पर ओम का नियम करने पर हमें प्राप्त होता है,
$I_1$= $\frac {V}{R_1}:I_2$ = $\frac {V}{R_2}$ और $I_3$ = $\frac {V}{R_3}$ ...(iii)
समी. (i) तथा (iii) से,
$\frac {V}{R_P} = \frac {V}{R_1} + \frac {V}{R_2} + \frac {V}{R_3}$
अथवा $\frac {I}{R_P} = \frac {I}{R_1} + \frac {I}{R_2} + \frac {I}{R_3}$ ...(iv)
इस प्रकार हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि समान्तर क्रम से संयोजित प्रतिरोधों के समूह के तुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम पृथक प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है।
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Question 45 Marks
किसी प्रयोग की सहायता से आप यह निष्कर्ष किस प्रकार निकालेंगे कि बैटरी से श्रेणीक्रम में संयोजित तीन प्रतिरोधकों के परिपथ के प्रत्येक भाग से समान धारा प्रवाहित होती है?
Answer
क्रियाकलाप-
  1. विभिन्न मानों के तीन प्रतिरोधों को श्रेणी क्रम में संयोजित कीजिए।
  2. इन्हें एक बैटरी, एक ऐमीटर तथा एक प्लग कुंजी से संयोजित कीजिए।
  3. कुंजी को प्लग से लगाइए तथा ऐमीटर का पाठ्यांक नोट कीजिए। ऐमीटर की स्थिति को दो प्रतिरोधकों के बीच कहीं भी परिवर्तित कर सकते हैं। हर बार ऐमीटर का पाठ्यांक नोट कीजिए।
    हम देखते हैं कि ऐमीटर में विद्युत धारा के मान में कोई परिवर्तन नहीं होता है। अतः प्रतिरोधकों के श्रेणीक्रम संयोजन में परिपथ के हर भाग में विद्युत धारा समान होती है अर्थात् प्रत्येक प्रतिरोध से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
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Question 55 Marks
किसी पदार्थ की वैद्युत प्रतिरोधकता से क्या तात्पर्य है? इसका क्या मात्रक है? किसी चालक तार के प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करने के लिए किसी प्रयोग का वर्णन कीजिए।
Answer
1 मीटर भुजा वाले घन के विपरीत फलकों में से धारा गुजरने पर उत्पन्न प्रतिरोध, प्रतिरोधकता कहलाती है। इसका मात्रक ओम-मीटर है।
R = $\rho \frac{l}{A}$
$\rho=\frac{\mathrm{RA}}{l}$
[जहाँ, $A = 2 m^2 l = 1 m]$
माना कि किसी विद्युत परिपथ में एक सेल, एक अमीटर L  लम्बाई का नाइक्रोम का एक तार, एक प्लग-कुंजी चित्रानसार सम्मिलित है।

अब प्लग में कुंजी लगाइए। ऐमीटर में विद्युत धारा नोट कीजिए। इस नाइक्रोम के तार को अन्य नाइक्रोम तार से प्रतिस्थापित कीजिए, जिसकी मोटाई समान परन्तु लम्बाई दोगुनी हो, अर्थात् 2l लम्बाई का तार लीजिए जिसे चित्र में (2) से चिन्हित किया गया है। ऐमीटर का पाठ्यांक नोट कीजिए। अब इस तार को समान लम्बाई l के नाइक्रोम के मोटे तार [(3) से चिन्हित] से प्रतिस्थपित कीजिए। मोटे तार की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल अधिक होता है। परिपथ में प्रवाहित धारा पुनः नोट कीजिए। नाइक्रोम तार के स्थान पर तांबे का तार [चित्र में चिन्हित (4)] को परिपथ में जोड़िए। मान लीजिए कि यह तार नाइक्रोम के तार जिस पर (1) चिन्हित है, के बराबर लम्बा तथा समान अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल का है। विद्युत धारा का मान नोट कीजिए। प्रत्येक प्रकरण में विद्युत धारा के मानों में अन्तर को ध्यान से देखिए।
जब तार की लम्बाई दोगुनी कर देते हैं तो ऐमीटर का पाठ्यांक आधा हो जाता है अर्थात् तार में धारा आधी हो जाती है। परिपथ में समान पदार्थ तथा समान लम्बाई का मोटा तार जोड़ने पर ऐमीटर का पाठ्यांक बढ़ जाता है। ऐमीटर के पाठ्यांक में तब भी अन्तर आता है जब परिपथ में भिन्न पदार्थ परन्तु समान लम्बाई तथा समान अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के तार को जोड़ते हैं। ओम के नियम को अनुप्रयोग करने पर हम यह पाते हैं कि किसी चालक का प्रतिरोध (अ) चालक की लम्बाई, (ब) उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल तथा (स) उसके पदार्थ के प्रकृति पर निर्भर करता है। परिशुद्ध माप दर्शाते हैं कि किसी धातु के एकसमान चालक का प्रतिरोध उसकी लम्बाई $(l)$ के अनुक्रमानुपाती तथा इसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होती है। अर्थात्
R $\propto$ 1 ...(i)
तथा $\mathrm{R} \propto \frac{l}{\mathrm{~A}}$ ...(ii)
समी. (i) तथा (ii) को संयोजित करने पर
$\mathrm{R} \propto \frac{l}{\mathrm{~A}}$
अथवा R = $\rho \frac{l}{\mathrm{~A}}$
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Question 65 Marks
ओम-नियम लिखिए। इसका प्रायोगिक सत्यापन किस प्रकार किया जा सकता है? क्या यह सभी अवस्थाओं में लागू होता है? अपनी टिप्पणी लिखिए।
Answer
ओम का नियम- समान तापमान पर, किसी चालक में प्रवाहित धारा उसके सिरों के बीच उत्पन्न विभवान्तर के समानुपाती होती है।

ओम के नियम के सत्यापन के लिए क्रियाकलाप-

  1. कुंजी को बन्द कीजिए जिससे परिपथ में धारा प्रवाहित हो सके।
  2. R प्रतिरोध के चालक PQ के सिरों के बीच विभवान्तर वोल्टमीटर के पाठ्यांक द्वारा नोट कीजिए तथा धारा (I) का मान अमीटर से ज्ञात कीजिए।
  3. अब धारा नियंत्रक द्वारा धारा का मान बढ़ाइए।
  4. पुन: R प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर (V) वोल्टमीटर द्वारा नोट कीजिए तथा धारा (I) का मान अमीटर ज्ञात कीजिए।
  5. इस प्रयोग को धारा नियन्त्रक द्वारा धारा का मान बढ़ाकर 5 बार दोहराइए।
    V तथा I के मान क्रमशः X-अक्ष तथा Y-अक्ष पर लेकर V तथा I के मध्य ग्राफ बनाइए। इस ग्राफ पर मूल बिन्दु से गुजरती हुए एक सीधी (सरल) रेखा प्राप्त होती है।

निष्कर्ष- V तथा I के मध्य ग्राफ द्वारा हम निष्कर्ष निकालते हैं कि V = I जो ओम का नियम है। अतः ओम का नियम प्रयोग द्वारा सत्यापित हो जाता है। ओम का नियम सभी दशाओं में लागू नहीं होता है। यह 1½-ओमी पदार्थों जैसे विद्युत अपघट्यों के लिए लागू नहीं होता है।

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Question 75 Marks
तीन तापदीप्त लैंप, जिनमें प्रत्येक 100 W; 220 V का है, किसी 220 V आपूर्ति के विद्युत परिपथ में श्रेणीक्रम में संयोजित हैं। किसी अन्य परिपथ में समान विद्युत स्रोत से यही तीनों लैंप पार्श्वक्रम में संयोजित हैं।
  1. क्या दोनों परिपथों में बल्ब समान तीव्रता से चमकेंगे? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
  2. अब, मान लीजिए दोनों परिपथों का एक-एक बल्ब फ्यूज़ हो जाता है, तो क्या प्रत्येक परिपथ में बाकी बचे बल्ब लगातार चमकते रहेंगे। कारण लिखिए।
Answer
  1. नहीं, श्रेणी क्रम में संयोजित बल्बों का प्रतिरोध एक बल्ब के प्रतिरोध से तीन गुना अधिक होगा। अतः श्रेणी क्रम में धारा का मान समान्तर क्रम में संयोजित प्रत्येक बल्ब की अपेक्षा $\frac {1}{3}$ होगा। समान्तर क्रम में संयोजित बल्ब अधिक तीव्रता से चमकेंगे।
  2. श्रेणी क्रम में संयोजित बल्बों का चमकना बन्द हो जाएगा क्योंकि परिपथ टूट जाता है और धारा शून्य हो जाती है। यद्यपि समान्तर क्रम में संयोजित बल्ब समान तीव्रता से चमकते रहेंगे।
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