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Question 13 Marks
वैश्विक नागरिकता से क्या आशय है?
Answer
वैश्विक नागरिकता- वैश्वीकरण की अवधारणा के विकास के साथ-साथ वैश्विक नागरिकता की अवधारणा का विकास हो रहा है। वैश्विक नागरिकता की अवधारणा में राज्य की सीमाओं तथा पासपोर्ट की आवश्यकता की बाधायें नहीं रहेंगी। विश्व के सभी भागों के लोग संचार के इंटरनेट, टेलीविजन और सेलफोन के साधनों के कारण परस्पर अन्तर्सम्बन्धित महसूस करते हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति अपने आपको न केवल एक विशेष समाज का सदस्य महसूस करता है, बल्कि वह सम्पूर्ण विश्व का सदस्य भी महसूस करता है। इस प्रकार किसी विशेष राज्य की नागरिकता विश्व की नागरिकता में बदल दी जानी चाहिए। वैश्विक नागकिरता पूरे विश्व की सदस्यता के रूप में मिलनी चाहिए।
लेकिन यह अवधारणा अव्यावहारिक है क्योंकि कोई भी राज्य अपनी संप्रभुता को त्यागना नहीं चाहता। वैश्विक नागरिकता की अवधारण को व्यावहारिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि राष्ट्रीय नागरिकता को वैश्विक नागरिकता के साथ इस समझ के साथ जोड़ा जाये कि हम आज अन्तर्सम्बद्ध विश्व में रहते हैं। साथ ही हमें विश्व के विभिन्न हिस्सों के लोगों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करना चाहिए तथा राष्ट्रीय सीमाओं के पार के लोगों और सरकारों के साथ काम करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
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Question 23 Marks
भारत में नागिरकता किस प्रकार मिलती है? स्पष्ट कीजिये।
Answer
भारत में जन्म, वंश-परम्परा, पंजीकरण, देशीयकरण या किसी भू-क्षेत्र के राजक्षेत्र में शामिल होने से नागरिकता प्राप्त की जा सकती है। यथा-
(1) संविधान लागू होने के पश्चात् भारत में पैदा होने वाला प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक होगा।
(2) संविधान लागू होने के पश्चात् भारत के बाहर पैदा हुआ वह व्यक्ति भारत का नागरिक होगा, यदि जन्म के समय उसका पिता वंशक्रम से भारत का नागरिक रहा हो।
(3) पंजीकरण के द्वारा निम्नलिखित व्यक्ति भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं-
(i) भारतीय मूल का व्यक्ति जो पंजीकरण के लिए आवेदन-पत्र देने के सात वर्ष पहले से भारत में आमतौर पर निवास कर रहा हो।
(ii) भारत में पैदा हुए व्यक्ति जो भारत के बाहर किसी अन्य देश में आमतौर पर निवास कर रहे हों।
(iii) भारतीय नागरिकों के जीवनसाथी, जो आवेदन पत्र के 7 वर्ष पूर्व से भारत में रह रहे हों।
(iv) भारतीय नागरिकों के नाबालिग बच्चे।
(4) कोई भी विदेशी व्यक्ति भारतीय सरकार को कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करके आवेदन करके भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकता है। इसे देशीयकरण द्वारा नागरिकता की प्राप्ति कहा जाता है।
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Question 33 Marks
आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य अपने नागरिकों को कौन-कौन से राजनैतिक अधिकार प्रदान करते हैं?
Answer
आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य अपने नागरिकों को निम्नलिखित राजनैतिक अधिकार प्रदान करते हैं-
(1) मतदान का अधिकार-लोकतांत्रिक राज्यों में प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार प्रदान किया जाता है। इसके द्वारा वे समय-समय पर होने वाले चुनावों के द्वारा अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं। ये प्रतिनिधि ही सरकार का निर्माण करते हैं तथा शासन को चलाते हैं।
(2) चुनाव लड़ने का अधिकार-लोकतांत्रिक राज्यों में प्रत्येक नागरिक को निर्वाचन में खड़ा होने का भी अधिकार है। निर्वाचित होने के बाद व्यक्ति नागरिकों के प्रतिनिधि के रूप में सरकार का निर्माण करते हैं।
(3) सरकारी नौकरी प्राप्त करने का अधिकार-आधुनिक लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियाँ पाने का अधिकार है।
(4) कानून के समक्ष समानता का अधिकार-आधुनिक लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान किया जाता है।
(5) अभिव्यक्ति या धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता-आधुनिक लोकतांत्रिक राज्यों में नागरिकों को अभिव्यक्ति तथा धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता का अधिकार भी प्रदान किया जाता है।
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Question 43 Marks
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपाय लिखिये।
Answer
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपाय
आदर्श नागरिकता के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अग्रलिखित उपाय किये जा सकते हैं-
(1) उचित शिक्षा-आदर्श नागरिकता के मार्ग की प्रमुख बाधा अज्ञानता है। इस बाधा को दूर करने के लिए नागरिकों को मानवीय मूल्य पर आधारित उचित शिक्षा दिलाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। उचित शिक्षा से उनके विचारों में परिपक्वता आयेगी तथा अधिकारों एवं कर्त्तव्यों का ज्ञान होगा।
(2) आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति-आदर्श नागरिकता के मार्ग की एक अन्य बाधा व्यक्ति की अनिवार्य
आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाना है। इसलिए देश में ऐसी आर्थिक व्यवस्था होनी चाहिए जिससे नागरिकों की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति सुचारु रूप से हो सके।
(3) राष्ट्रीय चरित्र का विकास- किसी भी राष्ट्र के व्यक्ति आदर्श नागरिक तभी बन सकते हैं जबकि उस राष्ट्र का राष्ट्रीय चरित्र उच्च कोटि का हो। अर्थात् लोग राष्ट्र को अपने स्वार्थों से ऊँचा स्थान दें तथा सभी प्रकार की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर सोचें।
(4) विश्व बंधुत्व की भावना- आदर्श नागरिकता के मार्ग की एक अन्य बाधा उग्र राष्ट्रीयता की भावना है। यह नागरिकों की मनोवृत्ति संकीर्ण बनाती है। इस बाधा को दूर करने के लिए आवश्यक है कि वसुधैव कुटुम्बकम् एवं विश्व बंधुत्व की भावना को स्वीकार कर लिया जाये।
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Question 53 Marks
"नागरिक आज जिन अधिकारों का प्रयोग करते हैं, उन सभी को संघर्ष के बाद हासिल किया गया है।" ऐसे कुछ संघर्षों का उदाहरण दीजिए।
Answer
नागरिक आज जिन अधिकारों का प्रयोग करते हैं, उन सभी को संघर्ष के बाद हासिल किया गया है। यथा-
(1) यूरोप में राजतंत्रों के विरुद्ध संघर्ष-अनेक यूरोपीय देशों में जनता ने अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए कुछ प्रारंभिक संघर्ष शक्तिशाली राजतंत्रों के खिलाफ छेड़े थे। उनमें कुछ हिंसक संघर्ष भी थे, जैसे - 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ।
(2) एशिया व अफ्रीका में संघर्ष- एशिया और अफ्रीका के अनेक उपनिवेशों में समान नागरिकता की माँग औपनिवेशिक शासकों से स्वतंत्रता हासिल करने के संघर्ष का भाग रही। दक्षिण अफ्रीका में समान नागरिकता पाने के लिए अफ्रीका की अश्वेत आबादी को सत्तारूढ़ गोरे अल्पसंख्यकों के खिलाफ लम्बा संघर्ष करना पड़ा जो 1990 के दशक के आरंभ तक जारी रहा।
(3) महिला व दलित आंदोलन- वर्तमान में विश्व के अनेक हिस्सों में महिला और दलित आंदोलन भी इस संघर्ष का एक भाग हैं।
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Question 63 Marks
"लोकतंत्र के सफल संचालन के लिये नागरिकों का जागरूक होना जरूरी है।" संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
Answer
लोकतंत्र के सफल संचालन के लिए नागरिकों का जागरूक होना जरूरी है। उदाहरण के लिए प्रतिवाद करने का अधिकार हमारे संविधान में नागरिकों के लिए सुनिश्चित की गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक पक्ष है, बशर्ते कि वह प्रतिवाद दूसरे लोगों या राज्य के जीवन या सम्पत्ति को हानि न पहुँचाये। यदि नागरिक इस सम्बन्ध में जागरूक होंगे तो वे समूह बनाकर, प्रदर्शन कर, मीडिया का उपयोग कर, राजनीतिक दलों से अपील कर या अदालत में जाकर जनमत और सरकारी नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। अदालतें उस पर निर्णय दे सकती हैं या समाधान के लिए सरकार से आग्रह कर सकती हैं। इससे समाज में समय-समय पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं का सर्वमान्य समाधान निकल सकता है।
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Question 73 Marks
"नागरिकता राज्यसत्ता और उसके सदस्यों के बीच विधिक सम्बन्धों के निरूपण के साथ-साथ नागरिकों के आपसी सम्बन्धों का भी निरूपण है।" स्पष्ट कीजिए।
Answer
नागरिकता एक तरफ जहाँ राज्य सत्ता और उसके सदस्यों के बीच विधिक सम्बन्धों, जैसे- कानूनों का पालन करने, करों का भुगतान करने, राज्य के प्रति वफादारी, सैनिक सेवा में भाग लेना, राजनीतिक अधिकारों के प्रयोग तथा संविधान के आदर, आदि का निरूपण है। लेकिन इसके साथ ही साथ यह नागरिकों के आपसी सम्बन्धों के बारे में भी है। यथा-
(1) इसमें नागरिकों के एक-दूसरे के प्रति और समाज के प्रति निश्चित दायित्व शामिल हैं।
(2) इसमें समुदाय के सहजीवन में भागीदार होने और योगदान करने का नैतिक दायित्व भी शामिल होता है।
(3) नागरिकों को देश के सांस्कृतिक और प्राकृतिक संसाधनों का उत्तराधिकारी और न्यासी भी माना जाता है।
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Question 83 Marks
सार्वभौमिक नागरिकता से क्या आशय है?
Answer
सार्वभौमिक नागरिकता- सार्वभौमिक नागरिकता की धारणा का आशय यह है कि सभी व्यक्ति, जो किसी राज्य में रहते हैं, राज्य द्वारा स्वीकार किये जाने चाहिए और उन्हें उस राज्य का नागरिक घोषित किया जाना चाहिए तथा सभी व्यक्ति समाज के पूर्ण तथा समान सदस्य के रूप में होने चाहिए तथा उन्हें समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए।
दूसरे शब्दों में, प्रत्येक व्यक्ति जो राज्य में रह रहा है, चाहे वह वहाँ जन्म से रह रहा हो या दूसरे राज्य का आप्रवासी हो, चाहे वह यहाँ विधिक और आधिकारिक तौर पर आया आप्रवासी हो, चाहे गैर-कानूनी रूप से आया घुसपैठिया हो, वह नागरिकता के अधिकार और स्तर का अधिकारी होना चाहिए। तब विश्व में कहीं भी कोई भी व्यक्ति शरणार्थी या राज्यविहीन नहीं होगा। लेकिन यह व्यावहारिक नहीं है।
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