Question 13 Marks
पुष्पी पादपों के तीन मूलभूत ऊतक तन्त्र बताओ। प्रत्येक तन्त्र के ऊतक बताओ।
Answer
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| एकबीजपत्री मूल (Monocot Root) | द्विबीजपत्री मूल (Dicot Root) |
| 1. जाइलम पूल संख्या में 6 से अधिक (बहु-आदिदारुक) होते हैं। | संख्या में 2 से 6 तक (द्वि-आदिदारुक से षट-आदिदारुक) होते हैं। |
| 2. मज्जा सुविकसित होती है। | मज्जा अल्पविकसित या अनुपस्थित होती है। |
| 3. परिरम्भ से पार्श्व मूलों की उत्पत्ति होती है। | पार्श्वमूलों, एधा तथा कॉर्क एधा की उत्पत्ति होती है। |
| 4. एधा अनुपस्थित । | एधा उपस्थित । |
| क्र.सं. | बाह्य आदिदारुक (Exarch) | अन्तः आदिदारुक (Endarch) |
| 1. | यह स्थिति जड़ के संवहन पूल में पाई जाती है। | स्तम्भ में पाई जाती है। |
| 2. | इसमें आदिदारु (Protoxylem) बाहर की ओर तथा अनुदारु (Metaxylem) अन्दर की ओर स्थित होते हैं। | आदिदारु अन्दर की ओर तथा अनुदारु बाहर की ओर स्थित होते हैं। |
| 3. | दारु का विकास बाहर से अन्दर की ओर अग्रसर होता है। | विकास अन्दर से बाहर की ओर अग्रसर होता है। |
| क्र.सं. | एकबीजपत्री पर्णों की अधिचर्म | द्विबीजपत्री पर्णों की अधिचर्म |
| 1. | दोनों (ऊपर व नीचे) अधिचर्म समान होते हैं। | दोनों अधिचर्म भिन्न-भिन्न होते हैं। |
| 2. | रन्ध्र दोनों अधिचर्म पर होते हैं। | रन्ध्र केवल निचली अधिचर्म पर उपस्थित होते हैं। |
| क्र.सं. | एकबीजपत्री स्तम्भ | द्विबीजपत्री स्तम्भ |
| 1. | इनमें दृढ़ोतक की अधस्त्वचा होती है। | प्रायः स्थूलकोणोतक की होती है। |
| 2. | वल्कुट अनुपस्थित होता है, इसके स्थान पर मृदूतकी भरण ऊतक होता है। | वल्कुट उपस्थित होता है, भरण ऊतक नहीं होता है। |
| 3. | अन्तस्त्वचा, परिरंभ, मज्जा किरणें व मज्जा अनुपस्थित होती है। | उपस्थित होती है। |
| 4. | संवहनपूल भरण ऊतक में बिखरे होते हैं। | संवहन पूल परिरंभ के अन्दर वलय में व्यवस्थित होते हैं। |
