Question 15 Marks
अकशेरुकियों में पाये जाने वाले उत्सर्जन अंगों के नाम, कार्य एवं उदाहरण देते हुए संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
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| नेफ्रॉन में होने वाली घटनाओं का सारांश | ||||
| क्र.सं. | परिवहित पदार्थ | नेफ्रॉन का भाग | संबंधित प्रक्रिया | क्रियाविधि |
| 1. | ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, एल्ब्यूमिन प्रोटीन, विटामिन्स, हॉर्मोन्स, Na+, K+, Mg2+, Ca+2, H2O. HCO3- यूरिया, क्रिएटिनिन, यूरिक अम्ल, कीटोन बॉडीज | बोमैन्स कैप्सूल | ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन | अल्ट्राफिल्ट्रेशन |
| 2. | ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, हॉर्मोन्स, विटामिन्स, Na+, K+, Mg2+, Ca+2 | समीपस्थ कुण्डलित नलिका (P.C.T.) | पुनः अवशोषण | सक्रिय परिवहन |
| 3. | СI- | समीपस्थ कुण्डलित नलिका | पुनः अवशोषण | निष्क्रिय परिवहन |
| 4. | जल | समीपस्थ कुण्डलित नलिका | पुनः अवशोषण | परासरण |
| 5. | यूरिया | समीपस्थ कुण्डलित नलिका | पुनः अवशोषण | विसरण |
| 6. | H2O | हेनले लूप की अवरोही भुजा का संकरा भाग | पुनः अवशोषण | परासरण |
| 7. | Na+, K+, Mg+2, Ca+2, CI- | हेनले लूप की आरोही भुजा का संकरा भाग | पुनः अवशोषण | विसरण |
| 8. | उपर्युक्तानुसार अकार्बनिक आय | हेनले लूप की आरोही भुजा का चौड़ा भाग | पुनः अवशोषण | सक्रिय परिवहन |
| 9. | H2O | D.C.T.. संग्रह नलिकाएँ | ADH की सहायता से पुनः अवशोषण | परासरण |
| 10. | Na+ | D.C.T., संग्रह नलिकाएँ | एल्डोस्टेरॉन की सहायता से पुनः अवशोषण, स्त्रावण | सक्रिय परिवहन |
| 11. | यूरिया | संग्रह नलिकाओं का अन्तिम भाग | एल्डोस्टेरॉन की सहायता से पुनः अवशोषण, स्त्रावण | विसरण |
| 12. | क्रिएटिनिन, हिप्यूरिक अम्ल, विजातीय पदार्थ | समीपस्थ कुण्डलित नलिका | एल्डोस्टेरॉन की सहायता से पुनः अवशोषण, स्त्रावण | सक्रिय परिवहन |
| 13. | K+. H+ | दूरस्थ कुण्डलित नलिका | एल्डोस्टेरॉन की सहायता से पुनः अवशोषण, स्त्रावण | सक्रिय परिवहन |
| 14. | NH3 | दूरस्थ कुण्डलित नलिका | एल्डोस्टेरॉन की सहायता से पुनः अवशोषण, स्त्रावण | विसरण |
| 15. | यूरिया | हेनले लूप की आरोही भुजा (पतले भाग) | एल्डोस्टेरॉन की सहायता से पुनः अवशोषण, स्रावण | विसरण |
| अमोनिया तथा यूरिको उत्सर्जीकरण में अन्तर- | ||
| क्र.सं. | अमोनिया उत्सर्जीकरण | यूरिको उत्सर्जीकरण |
| 1. | नाइट्रोजन अपशिष्ट पदार्थ अमोनिया के रूप में निष्कासित किया जाता है। | जबकि इसमें यूरिक अम्ल के रूप में निष्कासित किया जाता है। |
| 2. | उत्सर्जी पदार्थ (NH3) अत्यधिक विषैला होता है। | जबकि यूरिक अम्ल कम विषैला होता है। |
| 3. | शरीर के जल का बड़ा भाग खत्म होता है। | बहुत कम जल खर्च होता है। |
| 4. | अमोनिया के निर्माण में बहुत कम ऊर्जा का उपयोग होता है। | यूरिक अम्ल के निर्माण में बहुत ऊर्जा का उपयोग होता है। |
| 5. | उदाहरण : अमीबा, हाइड्रा एवं पैरामिशियम । | उदाहरण : पक्षी, कीट, सरीसृप। |
| रेन्निन व रेनिन में अन्तर | ||
| क्र.सं. | रेन्निन (Rennin) | रेनिन (Renin) |
| 1. | यह आमाशय की जठर ग्रन्थियों की जाइमोगन (Zymogen) कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है। | यह वृक्क के कॉर्टेक्स की अभिवाही धमनिकाओं की विशिष्ट कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है। |
| 2. | इनका स्रावण भोजन द्वारा प्रेरित होता है। | इनका स्रावण द्रव में Na+ का स्तर घटने से प्रेरित होता है। |
| 3. | यह एक प्रोटियोलाइटिक एंजाइम है। | यह एक हार्मोन है। यह एंजाइम की तरह कार्य करता है। |
| 4. | यह दुग्ध प्रोटीन 'केसीन' के पाचन में सहायता करता है। | यह एंजियोटेसिनोजन प्रोटीन को एंजियोटेसिन में परिवर्तित करता है। |
| 5. | यह निष्क्रिय रूप (प्रोरेन्निन) में स्स्रावित होता है जो HCI द्वारा सक्रिय (रेन्निन) रूप में बदलता है। | यह रेनिन के रूप में ही स्रावित होता है। |
| क्र.सं. | कार्टिकल नेफ्रॉन्स | जक्सटामेडुलरी नेफ्रॉन्स |
| 1. | इन नेफ्रॉन्स का आकार छोटा होता है। | इनका आकार बड़ा होता है। |
| 2. | इनके हेनले लूप बहुत छोटे होते हैं और मेड्यूला में थोड़ी सी गहराई तक ही धंसे होते हैं। | इनके हेनले लूप बहुत लम्बे होते हैं और मेड्यूला में काफी गहराई तक धंसे होते हैं। |
| 3. | ये मुख्यतः रीनल कॉर्टेक्स में स्थित होते हैं। | इनको बोमन सम्पुट, रीनल कार्टेक्स में (कॉर्टेक्स व मेड्यूला की संधि के समीप) स्थित होता है। |
| 4. | ये जल आपूर्ति सामान्य होने पर प्लाज्मा के आयतन का नियंत्रण करते हैं। | जल आपूर्ति कम होने पर प्लाज्मा के आयतन का नियंत्रण करते हैं। |
| 5. | 80 से 85 प्रतिशत नेफ्रॉन्स इसी प्रकार के होते हैं। | इस प्रकार के नेफ्रॉन्स 15 से 20 प्रतिशत होते हैं। |