पशु को आहार देते समय निम्न प्रमुख बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए-
(1) हमें पशु को स्नेह एवं उदारतापूर्वक आहार देना चाहिए।
(2) पशुओं को नियमित रूप से सन्तुलित आहार देना चाहिए।
(3) हमें पशु को दिनभर में 10 घण्टे के अन्तराल से दो बार आहार देना चाहिए ताकि उसका स्वास्थ्य सही रहे। हमें पशुओं को निश्चित समय पर आहार देना चाहिए।
(4) हमें पशुओं को पूरे वर्ष अधिक से अधिक हरा चारा उपलब्ध करवाना चाहिए।
(5) प्रत्येक श्रेणी के पशुओं को अलग-अलग आहार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
(6) पशुओं को चारा-दाना रोजाना नियमित अन्तराल पर ही दिया जाना चाहिए।
(7) पशुओं के आहार में हरा चारा, भूसा, दाना तथा खनिज आदि सभी मिला हो ताकि उन्हें सभी आवश्यक अवयव उपलब्ध हो सकें।
(8) पशुओं को आहार में पोषक तत्त्व उनकी शरीर की आवश्यकताओं के अनुसार ही दिये जाने चाहिए, आवश्यकता से कम या अधिक खिलाना दोनों ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
(9) चारा वाली नाँद या द्रोण आहार देने से पहले पूर्णतः साफ कर लेनी चाहिए ताकि उसमें बची गंदगी साफ हो जाये।
(10) पशुओं का आहार एक आदर्श आहार हो जो संतुष्टि प्रदान करने वाला उचित मात्रा में पोषक तत्त्व, पाचक, स्वास्थ्यवर्धक, दूध में उत्तम सुगन्ध पैदा करने वाला, विभिन्न खाद्य पदार्थों सहित, स्थूल, सन्तुलित तथा सस्ता होना चाहिए।
(11) चारे में परिवर्तन या आहार के प्रकार में परिवर्तन धीरे-धीरे करें। एकदम आहार में बदलाव हानिकारक होता है।
(12) प्रति गाय व भैंस को प्रतिदिन हरे चारे की मात्रा 15 से 20 कि.ग्रा. चारे की किस्म, रसीलापन, पाचकता तथा पशु की आवश्यकता के अनुसार देना चाहिए।
(13) पशुओं को कभी भी खाली पेट केवल फलीदार हरे चारे न खिलाये जायें इससे आफरा होने का भय रहता है। अतः इनके साथ सूखा चारा भी खिलाया जाना चाहिए।
(14) पशु की आवश्यकता पूर्ति के लिए चारा कम करके दाना अधिक नहीं खिलाना चाहिए क्योंकि यह आर्थिक रूप से सही नहीं। ज्यादा चारा व कम दाना एक अच्छा सस्ता उपाय है।
(15) 'हे' या पुआल या भूसा जैसे धूलमय चारे दूध निकालते समय नहीं खिलायें, इससे बाड़े में धूलमय वातावरण होने के कारण दूध के अन्दर जीवाणु की संख्या बढ़ने से दूध की किस्म खराब होने का भय रहता है।
(16) ज्यादातर पशुपालक गायों को दूध निकालते समय खाना खिलाना पसंद करते हैं। इससे दूध अयन में जल्दी उतर आता है।