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3 अंक प्रश्न

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Question 13 Marks
निम्नलिखित की संरचनाएँ लिखिए-
  1. 2-क्लोरोहेक्सेन,
  2. पेंट-4-ईन-2-ऑल
  3. 3 -नाइट्रोसाइक्लोहेक्सीन,
  4. साइक्लोहेक्स -2- ईन - 1- ऑल
  5. 6-हाइड्रॉक्सीहेप्टेनैल
Answer
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Question 23 Marks
सल्फर आकलन में 0.157g कार्बनिक यौगिक से 0.4813g बेरियम सल्फेट प्राप्त हुआ। यौगिक में सल्फर का प्रतिशत क्या है?
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Question 33 Marks
नाइट्रोजन आकलन की कैल्डॉल विधि में 0.5g यौगिक में मुक्त अमोनिया 10mL 1M H2SO4 को उदासीन करती है। यौगिक में नाइट्रोजन की प्रतिशतता ज्ञात करें।
Answer
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Question 43 Marks
नाइट्रोजन अणुमापन की ड्यूमा विधि में 0.3g कार्बनिक यौगिक 300K ताप तथा 715nm दाब पर 50mL नाइट्रोजन देता है। यौगिक में नाइट्रोजन के प्रतिशत की गणना कीजिए (300K ताप पर जलीय तनाव = 15nm)।
Answer
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Question 53 Marks
0.50g कार्बनिक यौगिक को कैल्डॉल विधि के अनुसार उपचारित करने पर प्राप्त अमोनिया को 0.5M H2SOके 50mL में अवशोषित किया गया। अवशिष्ट अम्ल के उदासीनीकरण के लिए 0.5M NaOH के 50mL की आवश्यकता हुई। यौगिक में नाइट्रोजन की प्रतिशतता की गणना कीजिए।
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Question 63 Marks
लैसें-परीक्षण का रसायन-सिद्धांत समझाइए।
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Question 73 Marks
आसवन, निम्न दाब पर आसवन तथा भाप आसवन में क्या अंतर है? विवेचना कीजिए।
Answer

आसवन का तात्पर्य द्रव का वाष्प में परिवर्तन तथा वाष्प का संघनित होकर शुद्ध द्रव देना है। इस विधि का प्रयोग उन द्रवों के शोधन में किया जाता है जो बिना अपघटित हुए उबलते हैं तथा जिनमें अवाष्पशील अशुद्धियाँ होती हैं। निम्न दाब पर आसवन में भी गर्म करने पर द्रव वाष्प में परिवर्तित होता है तथा संघनित होकर शुद्ध द्रव देता है परन्तु यहाँ निकाये पर कार्यरत् दाब वायुमण्डलीय दाब नहीं होता है; उसे निर्वात् पम्प की सहायता से घटा दिया जाता है। दाब घटाने पर द्रव का क्वथनांक घट जाता है। अतः इस विधि का प्रयोग उन द्रवों के शोधन में किया जाता है जिनके क्वथनांक उच्च होते हैं या वे अपने क्वथनांक से नीचे अपघटित हो जाते हैं। भाप आसवन कम दाब पर आसवन के समान होता है लेकिन इसमें कुल दाब में कोई कमी नहीं आती है। इसमें कार्बनिक द्रव तथा जल उस ताप पर उबलते हैं जब कार्बनिक द्रव का वाष्प दाब (p₁) तथा जल का वाष्प दाब (p2) वायुमण्डलीय दाब (p) के बराबर हो जाते हैं।
p= p1 + p-कक्षकों
इस स्थिति में कार्बनिक द्रव अपने सामान्य क्वथनांक से कम ताप पर उबलता है जिससे उसका अपघटन नहीं होता है।

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Question 83 Marks
प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रक्रमों के सिद्धांतों का संक्षिप्त विवरण दीजिए
  1. क्रिस्टलन
  2. आसवन
  3. वर्णलेखन
Answer

(i) क्रिस्टलन (Crystallisation) - यह ठोस कार्बनिक पदार्थों के शोधन की प्रायः प्रयुक्त विधि है। यह विधि कार्बनिक यौगिक तथा अशुद्धि की किसी उपयुक्त विलायक में इनकी विलेयताओं में निहित अन्तर पर आधारित होती है। अशुद्ध यौगिक को किसी ऐसे विलायक में घोलते हैं जिसमें यौगिक सामान्य ताप पर अल्प-विलेय (sparingly soluble) होता है, परन्तु उच्चतर ताप परे यथेष्ट मात्रा में वह घुल जाता है। तत्पश्चात् विलयन को इतना सान्द्रित करते हैं कि वह लगभग संतृप्त (saturate) हो जाए। विलयन को ठण्डा करने पर शुद्ध पदार्थ क्रिस्टलित हो जाता है जिसे निस्यन्दन द्वारा पृथक् कर लेते हैं। निस्यन्द (मातृ द्रव) में मुख्य रूप से अशुद्धियाँ तथा यौगिक की अल्प मात्रा रह जाती है। यदि यौगिक किसी एक विलायक में अत्यधिक विलेय तथा किसी अन्य विलायक में अल्प विलेय होता है, तब क्रिस्टलन उचित मात्रा में इन विलायकों को मिश्रित करके किया जाता है। सक्रियिंत काष्ठ कोयले' (activated charcoal) की सहायता से रंगीन अशुद्धियाँ निकाली जाती हैं। यौगिक तथा अशुद्धियों की विलेयताओं में कम अन्तर होने की दशा में बार-बार क्रिस्टलन द्वारा शुद्ध यौगिक प्राप्त किया जाता है।
(ii) आसवन (Distillation) - इस महत्त्वपूर्ण विधि की सहायता से (i) वाष्पशील (volatile) द्रवों को अवाष्पशील अशुद्धियों से एवं (ii) ऐसे द्रवों को, जिनके क्वथनांकों में पर्याप्त अन्तर हो, पृथक् कर सकते हैं। भिन्न क्वथनांकों वाले द्रव भिन्न ताप पर वाष्पित होते हैं। वाष्पों को ठण्डा करने से प्राप्त द्रवों को अलग-अलग एकत्र कर लेते हैं। क्लोरोफॉर्म (क्वथनांक 334K) और ऐनिलीन (क्वथनांक 457 K) को आसवन विधि द्वारा आसानी से पृथक् कर सकते हैं। द्रव-मिश्रण को गोल पेंदे वाले फ्लास्क में लेकर हम सावधानीपूर्वक गर्म करते हैं। उबालने पर कम क्वथनांक वाले द्रव की वाष्प पहले बनती है। वाष्प को संघनित्र की सहायता से संघनित करके प्राप्त द्रव को ग्राही में एकत्र कर लेते हैं। उच्च क्वथनांक वाले घटक के वाष्प बाद में बनते हैं। इनमें संघनन से प्राप्त द्रव को दूसरे ग्राही में एकत्र कर लेते हैं।
(iii) वर्णलेखन (Chromatography) - 'वर्णलेखन (क्रोमैटोग्रफी) शोधन की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तकनीक है जिसका उपयोग यौगिकों का शोधन करने में, किसी मिश्रण के अवयवों को पृथक् करने तथा यौगिकों की शुद्धता की जाँच करने के लिए विस्तृत रूप से किया जाता है। क्रोमैटोग्रफी विधि का उपयोग सर्वप्रथम पादपों में पाए जाने वाले रंगीन पदार्थों को पृथक् करने के लिए किया गया था। 'क्रोमैटोग्रेफी' शब्द ग्रीक शब्द क्रोमा' (chroma) से बना है जिसका अर्थ है 'रंग'। इस तकनीक में सर्वप्रथम यौगिकों के मिश्रण को स्थिर प्रावस्था (stationary phase) पर अधिशोषित कर दिया जाता है। स्थिर प्रावस्था ठोस अथवा द्रव हो सकती है। इसके पश्चात् स्थिर प्रावस्था में से उपयुक्त विलायक, विलायकों के मिश्रणं अथवा गैस को धीरे-धीरे प्रवाहित किया जाता है। इस प्रकार मिश्रण के अवयव क्रमशः एक-दूसरे से पृथक् हो जाते हैं। गति करने वाली प्रावस्था को 'गतिशील प्रावस्था (mobile phase) कहते हैं। अन्तर्ग्रस्त सिद्धान्तों के आधार पर वर्णलेखन को विभिन्न वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें से दो हैं-
1. अधिशोषण (वर्णलेखन) (Adsorption chromatography) - यह इस सिद्धान्त पर आधारित है कि किसी विशिष्ट अधिशोषक' (adsorbent) पर विभिन्न यौगिक भिन्न अंशों में अधिशोषित होते हैं। साधारणतः ऐलुमिना तथा सिलिका जेल अधिशोषक के रूप में प्रयुक्त किए जाते हैं। स्थिर प्रावस्था (अधिशोषक) पर गतिशील प्रावस्था प्रवाहित करने के उपरान्त मिश्रण के अवयव स्थिर प्रावस्था पर अलग-अलग दूरी तय करते हैं। निम्नलिखित दो प्रकार की वर्णलेखन-तकनीकें हैं, जो विभेदी अधिशोषण सिद्धान्त पर आधारित हैं-
• कॉलम-वर्णलेखन अर्थात् स्तम्भ-वर्णलेखन (Column Chromatography)
• पतली पर्त वर्णलेखन (Thin Layer Chromatography)
2. वितरण क्रोमैटोग्रैफी (Partition chromatography)-वितरण क्रोमैटोग्रॅफी स्थिर तथा गतिशील प्रावस्थाओं के मध्य मिश्रण के अवयवों के सतत् विभेदी वितरण पर आधारित है। कागज वर्णलेखन (paper chromatography) इसका एक उदाहरण है। इसमें एक विशिष्ट प्रकार के क्रोमैटोग्रॅफी कागज का इस्तेमाल किया जाता है। इस कागज के छिद्रों में जल-अणु पाशित रहते हैं, जो स्थिर प्रावस्था का कार्य करते हैं।

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Question 93 Marks
सल्फर का कैरिअस विधि द्वारा आकलन करने पर एक पदार्थ के 0.2175 ग्राम से 0.5825 ग्राम $BaSO _4$ बनता है। इस पदार्थ में सल्फर की प्रतिशत मात्रा ज्ञात कीजिए।
Answer
कार्बनिक पदार्थ का भार $=0.2175$ ग्राम तथा प्राप्त $BaSO _4$ का भार $=0.5825$ ग्राम अतः
$BaSO _4$ का अणुभार $=(137+32+64)=233$ 233 ग्राम $BaSO _4=32$ ग्राम गंधक
अतः 0.5825 ग्राम $BaSO _4$ में सल्फर की मात्रा $=32 / 233 \times 0.5825$ ग्राम
अत: 0.2175 ग्राम पदार्थ में सल्फर की \% मात्रा \[ \begin{array}{l} =\frac{32 \times 0.5825}{233} \times \frac{100}{0.2175} \\ =36.78 \end{array} \]
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Question 103 Marks
ड्यूमा की विधि में एक कार्बनिक यौगिक का विश्लेषण करने पर 0.30 ग्राम कार्बनिक यौगिक से 300 K ताप एवं 756 मिमी. दाब पर 32.4 मिमी. नाइट्रोजन प्राप्त होती है। इस यौगिक में नाइट्रोजन की प्रतिशत मात्रा ज्ञात कीजिए।
Answer
$\frac{P_1 V_1}{T_1}=\frac{P_2 V_2}{T_2}$
अतः S.T.P. पर नाइट्रोजन का आयतन (V)

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= 29.3 मिमी
अतः इस यौगिक में नाइट्रोजन की % मात्रा

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