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3 अंक प्रश्न

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Question 13 Marks
हाइड्रोजन आबंध की परिभाषा दीजिए। यह वान्हरवाल्स बलों की अपेक्षा पबल होते हैं या दर्बल?
Answer
हाइड्रोजन आबन्ध (H-bond) - अधिक ध्रुवीय अणुओं जिनमें हाइड्रोजन उपस्थित होता है, आंशिक धनावेशित हाइड्रोजन परमाणु किसी दूसरे आंशिक ऋणावेशित विद्युत ऋणी परमाणु को अपनी ओर आकर्षित करता है तो इस आकर्षण बल को हाइड्रोजन आबन्ध कहते हैं। उदाहरण-HF तथा H₂O
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अतः हाइड्रोजन आबन्ध उस आकर्षण बल को कहते हैं जो एक अणु के H-परमाणु को दूसरे अणु के विद्युत ऋणी परमाणु (F. O या N) से बांधे रखता है। हाइड्रोजन आबन्ध, वान्डरवाल बल से प्रबल होता है क्योंकि यह प्रबल द्विध्रुव द्विध्रुव आकर्षण है जबकि वान्डरवाल बल दुर्बल प्रकीर्णन बल (लंडन बल) होता है।
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Question 23 Marks
संयोजकता आबंध सिद्धांत (VBT) के आधार पर H2 अणु के विरचन की व्याख्या कीजिए।
Answer
माना कि हाइड्रोजन के दो परमाणु A व B, जिनके नाभिक क्रमशः NA व NB हैं तथा उनमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन और हैं, एक-दूसरे की ओर बढ़ते हैं। जब ये दोनों परमाणु एक-दूसरे से बहुत अधिक दूरी पर होते हैं, तो उनके बीच कोई अन्योन्य क्रिया (Interaction) नहीं होती। ज्यों-ज्यों दोनों परमाणु एक-दूसरे के पास आते हैं, त्यों-त्यों उनके बीच आकर्षण तथा प्रतिकर्षण बल उत्पन्न होते हैं।
आकर्षण बल निम्नलिखित स्पीशीज के मध्य उत्पन्न होते हैं-
(i) एक परमाणु के नाभिक तथा उसके इलेक्ट्रॉनों के बीच $N_A-e_A, N_B-e_B$
(ii) एक परमाणु के नाभिक तथा दूसरे परमाणु के इलेक्ट्रॉनों के बीच $N_A-e_B, N_B-e_A$
इसी प्रकार निम्नलिखित स्पीशीज के मध्य प्रतिकर्षण बल उत्पन्न होते हैं-
(i) दोनों परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों के बीच $e_A-e_B$ तथा
(ii) दोनों परमाणुओं के नाभिकों के बीच $N_A-N_B I$
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Question 33 Marks
NH3 तथा NF3 में किस अणु का द्विध्रुव आघूर्ण अधिक है और क्यों?
Answer
NH3 तथा NF3 दोनों अणुओं की पिरामिडीय आकृति होती है, जिनमें नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म है। फ्लुओरीन की विद्युत् ऋणात्मकता नाइट्रोजन की अपेक्षा अधिक होती है तथा नाइट्रोजन की विद्युत् ऋणात्मकता हाइड्रोजन से अधिक होती है। परंतु NH3 का परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण NF3 के द्विध्रुव आघूर्ण की अपेक्षा अधिक होता है। क्योंकि NF3 में नाइट्रोजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का कक्षक द्विध्रुव आघूर्ण तीन N - F आबंधों के द्विध्रुव-आघूर्णों के परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण की विपरीत दिशा में होता है। अतः कक्षक द्विध्रुव आघूर्ण, एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण N - F आबंध-आघूर्णों के परिणामी द्विध्रुव-आघूर्ण के प्रभाव को कम कर देता है। इसके कारण NF3 के अणु का द्विध्रुव आघूर्ण कम हो जाता है। जबकि NH3 में कक्षक द्विध्रुव आघूर्ण तथा तीन N-H आबन्धों के परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा समान होती है। अतः ये दोनों एक-दूसरे के प्रभाव को कम नहीं करते हैं।
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Question 43 Marks
चतुष्फलकीय ज्यामिति के अलावा CH4 अणु की एक और संभव ज्यामिति वर्ग समतली है, जिसमें हाइड्रोजन के चार परमाणु एक वर्ग के चार कोनों पर होते हैं। व्याख्या कीजिए कि CH4 का अणु वर्ग समतलीय नहीं होता है।
Answer
मेथेन की वर्ग समतलीय तथा चतुष्फलकीय संरचना नीचे दर्शायी गयी है-
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VSEPR सिद्धान्त के अनुसार केन्द्रीय परमाणु के चारों ओर इलेक्ट्रॉन युग्मों की व्यवस्था इस प्रकार होनी चाहिए कि उनमें प्रतिकर्षण न्यूनतम हो।
वर्ग समतलीय संरचना में बन्ध कोण 90° होता है जबकि चतुष्फलकीय व्यवस्था में यह बन्ध कोण 109°28′ होता है जिसके कारण, चतुष्फलकीय संरचना में प्रतिकर्षण वर्ग समतलीय की तुलना में कम होता है। अतः CH4 की ज्यामिति वर्ग समतलीय न होकर चतुष्फलकीय होती है।
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Question 53 Marks
$CO _3^{2-}$ आयन के सन्दर्भ में अनुनाद के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer
कार्बन तथा ऑक्सीजन परमाणुओं के मध्य दो एकल आबंध तथा एक द्वि-आबंध वाली लूइस संरचना कार्बोनेट आयन की वास्तविक संरचना को दर्शाने के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इसके अनुसार तीन कार्बन-ऑक्सीजन आबंधों की लंबाई भिन्न-भिन्न होनी चाहिए। परंतु प्रायोगिक परिणामों के अनुसार कार्बोनेट आयन के तीनों कार्बन-ऑक्सीजन आबंधों की लंबाई समान होती है। अतः कार्बोनेट आयन की वास्तविक संरचना को निम्नलिखित तीन विहित संरचनाओं (I, II तथा III) (Canonical Forms) के अनुनाद संकर के रूप में दर्शाया जा सकता है-
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अनुनाद के कारण $CO _3^{2-}$ में C-O बन्ध क्रम 1.33 होता है।
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